मध्यप्रदेश का राजनैतिक व समाज आंदोलन

*मध्यप्रदेश का राजनैतिक परिदृश्य एवं समाज आंदोलन*

1. परिचय -भारत की संस्कृति में मध्यप्रदेश जगमगाते दीपक के समान है, जिसकी रोशनी की सर्वथा अलग प्रभा और प्रभाव है। यह विभिन्न संस्कृतियों की अनेकता में एकता का जैसे आकर्षक गुलदस्ता है, मध्यप्रदेश, जिसे प्रकृति ने राष्ट्र की वेदी पर जैसे अपने हाथों से सजाकर रख दिया है, जिसका सतरंगी सौन्दर्य और मनमोहक सुगन्ध चारों ओर फैल रहे हैं। यहाँ के जनपदों की आबोहवा में कला, साहित्य और संस्कृति की मधुमयी सुवास तैरती रहती है। यहाँ के लोक समूहों और जनजाति समूहों में प्रतिदिन नृत्य, संगीत, गीत की रसधारा सहज रूप से फूटती रहती है। यहाँ का हर दिन पर्व की तरह आता है और जीवन में आनन्द रस घोलकर स्मृति के रूप में चला जाता है। *इस प्रदेश के तुंग-उतुंग शैल शिखर विन्ध्य-सतपुड़ा, मैकल-कैमूर की उपत्यिकाओं के अन्तर से गूँजते अनेक पौराणिक आख्यान और नर्मदा, सोन, सिन्ध, चम्बल, बेतवा, केन, धसान, तवा, ताप्ती, शिप्रा, काली सिंध आदि सर-सरिताओं के उद्गम और मिलन की मिथकथाओं से फूटती सहस्त्र धाराएँ यहाँ के जीवन को आप्लावित ही नहीं करतीं, बल्कि परितृप्त भी करती हैं।* 

*2. इतिहास का झरोखा* - स्वत्रंता पूर्व मध्य प्रदेश क्षेत्र अपने वर्तमान स्वरूप से काफी अलग था। तब यह ३-४ हिस्सों में बटा हुआ था। १९५० में सर्वप्रथम मध्य प्रांत और बरार को छत्तीसगढ़ और मकराइ रियासतों के साथ मिलकर मध्य प्रदेश का गठन किया गया था। तब इसकी राजधानी नागपुर में थी। इसके बाद १ नवंबर १९५६ को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश तथा भोपाल राज्यों को भी इसमें ही मिला दिया गया, जबकि दक्षिण के मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र को (राजधानी नागपुर समेत) बॉम्बे राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया।  १ नवंबर २००० को एक बार फिर मध्य प्रदेश का पुनर्गठन हुआ, और छ्त्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर भारत का २६वां राज्य बन गया।

*3. संस्कृतियों की संगम स्थली* - मध्यप्रदेश में मालवा, बुंदेलखंड, बघेलखंड, ब्रज, भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी व सहयाद्रि नामक सात संस्कृतियों के संगम की राजनैतिक इकाई है। 


*4. भूगोल* - मध्य उच्च प्रदेश, सतपुड़ा श्रेणी प्रदेश व पूर्वी पठार नामक तीन भौगोलिक क्षेत्र है। 

*5. राजनैतिक इतिहास* - 1956 से पूर्व मध्य प्रदेश भोपाल, मध्य भारती व विंध्य प्रदेश में विभक्त था। 1956 में मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया तब से लेकर 2003 तक कांग्रेस का एक सत्र राज रहा यद्यपि 1977 में जनता पार्टी तथा 1990 में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के गढ़ में छेंदमारी थी लेकिन वह असफल सिद्ध हुई। उसके बाद मानो भाजपा के शिवराज सिंह चौहान उर्फ मामा को राज्य की राजनीति सौप दी गई है। यद्यपि 2018 के जनादेश ने कांग्रेस की ओर रूख किया था मगर राजनैतिक कुचक्र में पारी लुढ़क गई । 
*समाज आंदोलन से उभरेंगे मध्यप्रदेश की राजनीति की नई तस्वीर*

मध्यप्रदेश भारत वर्ष की हृदय स्थली के नाम से जानी जाती है। यहाँ समाज आंदोलन की सात संस्कृतियों का संगम है। मालवा मध्यप्रदेश का मूलाधार है। बघेलखंड व बुंदेलखंड मध्यप्रदेश के संस्कृति के मुकटमणी है। ब्रज, भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी व सहयाद्रि संस्कृति के आभूषण है। अतः यहाँ समाज आंदोलन प्रांत व देश की दशा एवं दिशा बदलेगा। 

*मध्यप्रदेश में समाज आंदोलन तस्वीर*

1.*मालवा समाज* 
 

*पूर्वी भाग मालवा समाज*

1. नीमच

2. मंदसौर

3. रतलाम

4. झाबुआ

5. अलीराजपुर

6.बडवानी

7. घार

8. उज्जैन


*मध्य  भाग मालवा समाज*

9. आगर मालवा

10 . इन्दौर

11. खरगौन

12. राजागढ़

13. शाजापुर

14. देवास

15. खंड़वा

16. सीहोर


*पश्चिम भाग मालवा समाज*

17. भोपाल

18. हरदा

19. विदिशा

20. रायसेन

21. होशंगाबाद

22. बैतूल

23. छिंदवाड़ा

24. नरसिंहपुर

2. *बुंदेलखंडी समाज*


1. भिंड
2. ग्वालियर
3. दातिंया
4. अशोक नगर
5. गुना
6. सागर
8. दमोह
9. छतरपुर
10. टिकमगढ़ 
11. करैरा (शिवपुरी) 

*3. बघेलखंडी समाज*

1. सिवनी
2. जबलपुर
3. कटनी
4. सतना
5. पन्ना
6. मंडला
7. डिडौरी
8.उमरिया
9. अनूपपुर
10. शाहडोल
11.सीधी
12. रीवा 

*4. ब्रज समाज*
1. मुरैना
2. श्योपुर
3. शिवपुरी

*5. प्रगतिशील भोजपुरी समाज*

1. सिंगरौली

*6. छत्तीसगढ़ी समाज*

1. बालाघाट

*7. सहयाद्रि समाज*

1. बुरहानपुर
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