प्रउत के आलोक में अनन्त सूत्र
प्रउत के आलोक में अनन्त सूत्र

अनन्त का सिद्धांत
अनन्त - अनन्त = ?


गणित के परिपेक्ष्य में अनन्त सिद्धांत : गणित और विशेष रूप से कैलकुलस (Calculus) के नजरिए से देखा जाए, तो अनन्त (infty) - अनन्त(infty) का उत्तर सीधा 0 नहीं होता। इसे गणित में "अनिर्धारित रूप" (Indeterminate Form) कहा जाता है।
अनन्त कोई निश्चित संख्या नहीं है : अनन्त (infty) एक विचार या अवधारणा (Concept) है, कोई एक निश्चित संख्या (Fixed Number) नहीं। चूँकि हमें यह नहीं पता कि एक अनन्त दूसरे अनन्त के बराबर है या उससे बड़ा, इसलिए हम उन्हें घटाकर किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुँच सकते।
अलग-अलग परिणाम संभव हैं : सीमाओं (Limits) के सिद्धांत के अनुसार, infty - infty की स्थिति में उत्तर कुछ भी हो सकता है। इसे निम्नलिखित उदाहरणों से समझा जा सकता है:
उदाहरण A: यदि हम x में से x घटाते हैं जब x अनन्त की ओर बढ़ रहा हो:
उदाहरण B: यदि हम 2x में से x घटाते हैं: 
उदाहरण C: यदि हम (x + 5) में से x घटाते हैं: है
आध्यात्मिक दृष्टि में अनन्त सिद्धांत : 
आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि से अनंत - अनंत = अनंत ही होता है। जहाँ गणित इसे 'अनिर्धारित' मानता है, वहीं आध्यात्म इसे 'पूर्णता' के सिद्धांत से समझाता है।
पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ईशावास्य उपनिषद

आध्यात्मिक व्याख्या के मुख्य बिंदु
​अक्षय ऊर्जा का सिद्धांत : आध्यात्मिक दृष्टि से 'अनंत' वह स्रोत है जो कभी कम नहीं होता। जैसे एक जलते हुए दीपक से यदि आप हजारों दीपक भी जला लें, तो पहले दीपक की लौ (ऊर्जा) कम नहीं होती। वह अपनी पूर्णता में वैसी ही बनी रहती है।
​चेतना का विस्तार का सिद्धांत : यदि आप 'अनंत' (परमात्मा) को स्वयं से अलग करके घटाते भी हैं, तो भी जो शेष बचता है वह शून्य नहीं, बल्कि फिर से वह अनंत सत्य ही होता है। क्योंकि सत्य के टुकड़े नहीं किए जा सकते।
​शून्य और अनंत का मिलन: कि परम शून्य और परम अनंत एक ही बिंदु पर मिलते हैं। जब व्यक्ति अपने अहंकार (जो कि एक सीमा है) को अनंत में विसर्जित कर देता है, तब वह स्वयं अनंत हो जाता है।
​निष्कर्ष: आध्यात्मिक गणित के अनुसार, आप अनंत में कुछ जोड़ें (infty + infty) या कुछ घटाएं (infty - infty), परिणाम हमेशा अनंत ही रहेगा क्योंकि 'पूर्ण' कभी भी अपूर्ण नहीं हो सकता।

प्रउत दर्शन में अनन्त सिद्धांत 
1. सृष्टि चक्र (Srishti cakra) और अनंत का अस्तित्व
​आनंदमूर्ति जी के दर्शन के अनुसार, यह संपूर्ण ब्रह्मांड 'ब्रह्म' का ही एक हिस्सा है, जो कि स्वयं अनंत है। ब्रह्मचक्र में दो प्रक्रियाएं होती हैं :
​संचर (Sancara): अनंत चेतना का जड़ पदार्थ (Matter) में परिवर्तित होना।
​प्रतिसंचर (Pratisancara): जड़ पदार्थ का पुनः विकसित होकर अनंत चेतना में विलीन होना।
​इस चक्र में, यदि आप भौतिक जगत (जो कि सीमित दिखता है पर ऊर्जा रूप में अनंत है) को मूल सत्ता से घटाते भी हैं, तो भी शेष 'ब्रह्म' ही बचता है। क्योंकि ब्रह्म 'अखंड' है, उसके टुकड़े नहीं किए जा सकते।
​2. भौतिक संपदा बनाम आध्यात्मिक उपलब्धि
​प्राउटिस्ट दर्शन में 'अनंत' की इस अवधारणा को व्यावहारिक रूप से लागू किया जाता है:
​भौतिक वस्तुएं सीमित हैं : पृथ्वी पर संसाधन (भोजन, पानी, जमीन) सीमित हैं। इसलिए यहाँ "अनंत - अनंत" जैसी स्थिति नहीं हो सकती। यहाँ वितरण का नियम चलता है।
​मानसिक और आध्यात्मिक प्यास अनंत है: मनुष्य की इच्छाएं अनंत हैं। यदि इन इच्छाओं को भौतिक वस्तुओं (सीमित) से भरने की कोशिश की जाए, तो परिणाम शून्य या नकारात्मकता होती है।
​समाधान : जब मनुष्य अपनी 'अनंत प्यास' को 'अनंत परमात्मा' की ओर मोड़ देता है, तो वह पूर्णता प्राप्त करता है। यहाँ आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के बाद भी स्रोत (परमात्मा) में कोई कमी नहीं आती।
​3. सामाजिक न्याय और प्रउत (PROUT) का दृष्टिकोण
 ​"शारीरिक जगत की वस्तुएं सीमित हैं, लेकिन उनका उपयोग 'अनंत' (प्रकृति) की संपदा मानकर करना चाहिए।"
​जब हम समाज के संसाधनों को 'अनंत' की संपदा समझकर वितरित करते हैं, तो समाज से अभाव का अंत होता है। 
प्रउत का पहला सिद्धांत :- संचय पर समाज का आदेश - भौतिक संपदा सीमित उनका संचय अनियंत्रित रहने पर अव्यवस्था का जन्म होता है। अतः मनुष्य को अपनी संचय करने की प्रवृत्ति (Acquisition instinct) को भौतिक वस्तुओं के बजाय ज्ञान, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद (जो कि अनंत है) की ओर मोड़ना चाहिए।
प्रउत का दूसरा सिद्धांत :- (१) चरम उत्कर्ष का सिद्धांत : - यदि हम सीमित संसाधनों से अपनी "अनन्त" इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं, तो संघर्ष और गरीबी पैदा होती है। जब हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करके एक छोटे से संसाधन से अधिकतम लाभ निकालते हैं, तो हम उसे उसकी 'चरम सीमा' तक ले जाते हैं। भौतिक वस्तु भले ही सीमित हो, लेकिन उसे उपयोग करने वाली मानवीय बुद्धि और विचार 'अनन्त' हैं। इसलिए, संसाधनों का अभाव कभी नहीं होगा यदि हम अपनी वैचारिक शक्ति का सही उपयोग करें। (२) न्यायपूर्ण वितरण का सिद्धांत :- , समाज के हर व्यक्ति को भोजन, आवास आदि की गारंटी के साथ जो लोग समाज के लिए अतिरिक्त योगदान देते हैं (जैसे वैज्ञानिक, डॉक्टर), उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं देना। इससे उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं मिलनी चाहिए ताकि वे अपनी 'अनन्त' संभावनाओं का और विकास कर सकें।
प्रउत का तीसरा सिद्धांत : व्यष्टि व समष्टि की संभावनाओं का चरम उपयोग का सिद्धांत :‌ जब व्यक्ति अपनी क्षमताओं को समाज के लिए पूरी तरह अर्पित कर देता है, तो वह शून्य नहीं होता, बल्कि समाज की "अनन्त" शक्ति का हिस्सा बन जाता है। इसि प्रकार समाज जब व्यक्ति को विकसित होने के अनन्त अवसर देता है, तो समाज की सामूहिक गरिमा बनी रहती है।
प्रउत का चौथा सिद्धांत :- व्यष्टि व समष्टि की क्षमताओं के उपयोग में सुसंतुलन का सिद्धांत :- जब समष्टि (समाज) अपने 'अनन्त' संसाधनों में से व्यक्ति (व्यष्टि) के विकास के लिए 'अनन्त' अवसर निकालती है, तो समाज दरिद्र नहीं होता। इसके विपरीत, वह व्यक्ति विकसित होकर समाज को और अधिक 'अनन्त' समृद्धि लौटाता है। प्रगति एक निरंतर प्रक्रिया है। जब तक एक भी व्यक्ति (व्यष्टि) दुखी या पिछड़ा है, तब तक समष्टि (समाज) का संतुलन बिगड़ा रहेगा। समष्टि व्यक्ति अपनी क्षमता का उचित समायोजन नहीं करता व्यक्ति क्षमता व्यर्थ चली जाती है। 
प्रउत का पांचवां सिद्धांत :- विस्तार और उपयोग का निरंतर परिवर्तन :- यही सिखाता है कि उपयोग की पद्धति बदल सकती है, लेकिन सामूहिक प्रगति की यात्रा अनंत है।
​संक्षेप में: आध्यात्मिक और प्राउटिस्ट दृष्टि से: अनंत (परमात्मा) - अनंत (सृष्टि) = अनंत (अपरिवर्तनीय सत्य) ​यह दर्शाता है कि संसार में सब कुछ बदल जाने या समाप्त हो जाने के बाद भी वह 'चेतना' हमेशा पूर्ण बनी रहती है। 

नीचे प्रउत की विभिन्न नीतियों के संदर्भ में इस धारणा का विश्लेषण दिया गया है:
1. शिक्षा नीति (Education Policy)
शिक्षा केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं है, बल्कि 'सा विद्या या विमुक्तये' (शिक्षा वही है जो मुक्त करे) पर आधारित है। ज्ञान का भंडार अनंत है। प्रउत के अनुसार, शिक्षा को किसी भी वर्ग या शुल्क की सीमा में नहीं बांधना चाहिए। छात्र के भीतर की अनंत संभावनाओं को जागृत करना ताकि वह संकीर्णता से मुक्त होकर मानवता की सेवा कर सके।
2. चिकित्सा नीति (Medical Policy)
स्वास्थ्य को एक व्यापार (Business) के बजाय जन्मसिद्ध अधिकार माना जाता है। जीवन अनमोल और अनंत महत्ता का है। चिकित्सा नीति का लक्ष्य केवल बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से इतना सुदृढ़ बनाना है कि वह अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य (अनंत) की ओर अग्रसर हो सके। आधुनिकतम चिकित्सा सुविधाएं और प्राकृतिक पद्धतियां (योग-आयुर्वेद, वेदक शास्त्र) समाज के हर सदस्य को बिना किसी भेदभाव के सुलभ कराना।
3. कृषि नीति (Agricultural Policy)
कृषि को प्रउत में सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त है। पृथ्वी की उर्वरता और प्रकृति के संसाधन अनंत हैं यदि उनका वैज्ञानिक और संतुलित दोहन किया जाए।‌‌ अनन्त' की धारणा यहाँ सहकारी खेती (Co-operative Farming) के रूप में दिखती है, जहाँ भूमि का उपयोग निजी संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि सामूहिक प्रगति के लिए होता है ताकि कोई भी भूखा न रहे।
4. उद्योग और व्यापार नीति (Industrial & Trade Policy)
प्रउत 'अधिकतम उपयोग और तर्कसंगत वितरण' (Maximum Utilization & Rational Distribution) की बात करता है। स्थानीय कच्चे माल का उपयोग कर विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था बनाना।बिचौलियों को समाप्त कर उपभोक्ता सहकारी समितियों के माध्यम से व्यापार करना। लाभ की इच्छा सीमित होनी चाहिए, लेकिन सेवा की भावना अनंत। संपत्ति पर किसी का व्यक्तिगत एकाधिकार नहीं होना चाहिए क्योंकि यह परम पुरुष की सामूहिक संपत्ति है।
5. श्रमिक नीति एवं रोजगार (Labor & Employment)
प्रउत 'काम के बदले अधिकार' नहीं, बल्कि 'अधिकार के रूप में काम' की वकालत करता है। (१) न्यूनतम आवश्यकताएँ: भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और शिक्षा की गारंटी हर नागरिक को होनी चाहिए। (२) क्रय शक्ति (Purchasing Power): केवल रोजगार देना काफी नहीं है, बल्कि लोगों की क्रय शक्ति को लगातार बढ़ाना 'अनन्त' प्रगति का सूचक है। (३) श्रमिक: श्रमिकों को उद्योगों का केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि साझीदार (Partner) माना जाता है। प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) इसी नीति और दर्शन को धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत है। इस प्रकार नियोजित करते हैं, तो परिणाम स्वरूप मिलने वाली सुख-शांति भी 'अनंत' होती है।
प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) के वैचारिक ढांचे में 'अनंत' की यह अवधारणा केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक न्याय का आधार माना गया है।
​1. भौतिक जगत: सीमित वस्तुएं, सामूहिक उपयोग
प्रउत कहता है कि भौतिक जगत के संसाधन (जैसे धन, भूमि, खनिज) सीमित हैं। यहाँ "अनंत - अनंत" का अर्थ यह है कि यदि मुट्ठी भर लोग 'अनंत' संग्रह की लालसा करेंगे, तो शेष समाज के लिए 'शून्य' बचेगा।
​PSS का लक्ष्य: संसाधनों का अधिकतम उपयोग और तर्कसंगत वितरण (Rational Distribution) करना ताकि किसी को भी अभाव न हो। यहाँ 'सीमित' को 'अनंत' प्रेम और सेवा के साथ बांटना ही समाधान है।
​2. मानसिक जगत: अनंत ज्ञान का विस्तार
​मानसिक स्तर पर ज्ञान और विचार 'अनंत' होते हैं। प्राउटिस्ट विचारधारा के अनुसार, ज्ञान बांटने से घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है।‌​यहाँ अनंत - अनंत = अनंत का अर्थ है: समाज को जितना अधिक शिक्षित और जागरूक (Pubclicity and Publication) बनाया जाएगा, समाज की सामूहिक शक्ति उतनी ही बढ़ती जाएगी।

​3. आध्यात्मिक जगत: परम लक्ष्य
प्रउत का अंतिम लक्ष्य "आत्म-मोक्षार्थं जगद्धिताय च" (स्वयं की मुक्ति और जगत का कल्याण) है। ब्रह्मचक्र का सिद्धांत: हर मनुष्य उस 'अनंत' (ब्रह्म) का हिस्सा है। जब एक व्यक्ति अपनी सीमित पहचान (अहंकार) को मिटा देता है, तो वह शून्य नहीं होता, बल्कि वह उस 'अनंत' में समाहित होकर स्वयं 'अनंत' हो जाता है।. 
प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) के संदर्भ में इस दर्शन का महत्व:
 राष्ट्रीय कार्यकारिणी का उद्देश्य :- सकारात्मक मूल उद्देश्य इसी दार्शनिक सत्य को धरातल पर उतारना है:
​भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और शिक्षा: ये पांच बुनियादी आवश्यकताएं न्यूनतम रूप से सबको मिलनी चाहिए।
​जब समाज के हर व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं, तब उसकी मानसिक ऊर्जा मुक्त होती है। वह मुक्त ऊर्जा फिर 'अनंत' की खोज (आध्यात्मिक प्रगति) में लग सकती है।
निष्कर्ष: प्रउत के लिए 'अनंत' कोई गणितीय उलझन नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। यह हमें सिखाता है कि हम भौतिक रूप से चाहे जितने भी छोटे या सीमित क्यों न हों, हमारा लक्ष्य और हमारी क्षमता उस 'अनंत' सत्ता के समान ही विशाल है। प्रगतिशील उपयोगितावाद (PROUT/प्रउत) के दर्शन में 'अनन्त-अनन्त = अनन्त' का सिद्धांत एक क्रांतिकारी आध्यात्मिक और सामाजिक अवधारणा है। यह इस विचार पर आधारित है कि चूँकि परमात्मा (परम पुरुष) अनंत हैं और यह जगत उन्हीं की अभिव्यक्ति है, इसलिए संसाधनों का प्रबंधन भी इसी व्यापक दृष्टिकोण से होना चाहिए ताकि हर व्यक्ति की अंतहीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक भूख शांत हो सके।

करण सिंह राजपुरोहित
    प्रकाशन सचिव,
प्राउटिस्ट सर्व समाज
   9982322405

प्रउत के उदय ने यथार्थवाद को आईना दिखाया
प्रउत के उदय 
ने 
यथार्थवाद को आईना दिखाया

 

पृष्ठ -01
यथार्थवाद बनाम प्रउत

यथार्थवाद (Realism) और प्रउत (PROUT - Progressive Utilization Theory) के बीच का संवाद दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र के एक महत्वपूर्ण संगम को दर्शाता है। जहाँ यथार्थवाद दुनिया को उसके "वास्तविक" और अक्सर कठोर स्वरूप में देखता है, वहीं प्रउत उसे एक प्रगतिशील और आध्यात्मिक ढांचे के भीतर बदलने का प्रयास करता है।
यहाँ यथार्थवाद का विस्तृत विश्लेषण और प्रउत के दृष्टिकोण से उसका मूल्यांकन प्रस्तुत है:
1. यथार्थवाद (Realism) : एक परिचय
यथार्थवाद वह विचारधारा है जो आदर्शवाद (Idealism) के विपरीत कार्य करती है। यह इस बात पर जोर देती है कि दुनिया वैसी नहीं है जैसी "होनी चाहिए", बल्कि वैसी है जैसी "वह वास्तव में है"।
यथार्थवाद के मुख्य स्तंभ:
 * शक्ति की राजनीति : अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवाद का मानना है कि राज्य हमेशा अपनी शक्ति और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
 * मानव स्वभाव : यथार्थवादी अक्सर मानव स्वभाव को स्वार्थी और सत्ता-लोलुप मानते हैं (जैसा कि मैकियावेली और हॉब्स ने वर्णित किया)।
 * अराजकता (Anarchy) : यथार्थवाद का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कोई केंद्रीय सत्ता नहीं है, इसलिए हर राष्ट्र को अपनी रक्षा स्वयं करनी पड़ती है।
 * भौतिकवाद : यह विचारधारा नैतिक सिद्धांतों के बजाय व्यावहारिक परिणामों और भौतिक लाभ को प्राथमिकता देती है।
2. प्रउत (PROUT ) : संक्षिप्त अवलोकन
प्रउत का प्रतिपादन श्री प्रभात रंजन सरकार (श्री आनंदमूर्ति) द्वारा 1959 में किया गया था। यह सिद्धांत "सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय" पर आधारित है, लेकिन यह कोरी कल्पना नहीं है।
प्रउत के पांच बुनियादी सिद्धांत :
 * (1) सृष्टि की किसी भी संपत्ति का संचय समाज की अनुमति के बिना नहीं होना चाहिए।
 * (2) ब्रह्मांड की भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्षमता का अधिकतम उपयोग और तर्कसंगत वितरण होना चाहिए।
 * (3) मानव समाज की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संभावनाओं का पूर्ण विकास होना चाहिए।
 * (4) इन संसाधनों का उपयोग इस तरह हो कि समाज के बीच एक संतुलन बना रहे।
 * (5) बदलते समय और स्थान के साथ उपयोग की पद्धति बदलती रहनी चाहिए।
3. यथार्थवाद का प्रउत के दृष्टिकोण से मूल्यांकन
प्रउत यथार्थवाद को पूरी तरह से नकारता नहीं है, बल्कि उसे एक ऊंचे धरातल पर ले जाता है। प्रउत के प्रवर्तक श्री सरकार ने इसे "व्यक्तिपरक दृष्टिकोण के साथ वस्तुनिष्ठ समायोजन" (Objective adjustment with a subjective approach) कहा है।
क. मानव स्वभाव का विश्लेषण
 * यथार्थवाद : मानव को जन्मजात स्वार्थी और हिंसक मानता है।
 * प्रउत का दृष्टिकोण: प्रउत मानता है कि मनुष्य में "पशु प्रवृत्ति" और "दिव्य प्रवृत्ति" दोनों होती हैं। यथार्थवाद केवल पशु प्रवृत्ति (काम, क्रोध, लोभ) पर ध्यान केंद्रित करता है। प्रउत का कहना है कि सही आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से मनुष्य की निम्न प्रवृत्तियों को नियंत्रित कर उसकी आध्यात्मिक क्षमता को जगाया जा सकता है।
ख. सत्ता और शक्ति (Power)
 * यथार्थवाद : शक्ति का अर्थ सैन्य और आर्थिक वर्चस्व है।
 * प्रउत का दृष्टिकोण : प्रउत "सामाजिक चक्र" (Social Cycle) की बात करता है। सत्ता कभी योद्धाओं (क्षत्रिय), कभी बुद्धिजीवियों (विप्र) और कभी व्यापारियों (वैश्य) के हाथ में होती है। प्रउत का लक्ष्य सत्ता को "सद्विप्र" (Sadvipras) के हाथ में देना है—ऐसे नैतिक और आध्यात्मिक व्यक्ति जो समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा कर सकें। यहाँ "शक्ति" का अर्थ शोषण नहीं, बल्कि सेवा है।
ग. संसाधनों का वितरण और भौतिकवाद
 * यथार्थवाद : संसाधनों पर कब्जा और संचय को राष्ट्र की मजबूती मानता है।
 * प्रउत का दृष्टिकोण : प्रउत इसे "मनो-आर्थिक रोग" मानता है। प्रउत के अनुसार, भौतिक संसाधनों का असीमित संचय दूसरों को उनके बुनियादी अधिकारों (भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा, शिक्षा) से वंचित करता है। प्रउत एक "यथार्थवादी तर्कसंगत वितरण" का समर्थन करता है, न कि साम्यवाद की तरह पूर्ण समानता का, क्योंकि लोगों की क्षमताएं अलग-अलग होती हैं।
घ. राष्ट्रवाद बनाम विश्ववाद
 * यथार्थवाद : राष्ट्र-राज्य (Nation-state) को सर्वोच्च मानता है।
 * प्रउत का दृष्टिकोण : प्रउत संकीर्ण राष्ट्रवाद को मानवता के लिए खतरा मानता है। यह "नव्य-मानवतावाद" (Neo-humanism) का समर्थन करता है, जो मनुष्य के साथ-साथ पशु, पक्षी और पौधों के प्रति भी प्रेम और सम्मान सिखाता है। प्रउत एक "विश्व सरकार" की कल्पना करता है जो यथार्थवादी आधार पर क्षेत्रीय स्वायत्तता और वैश्विक एकता का संतुलन बनाए।
4. प्रउत का "यथार्थवादी" समाधान: आर्थिक लोकतंत्र
प्रउत केवल दर्शन नहीं है, यह व्यावहारिक यथार्थवाद पर आधारित है:
 * (१) विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था‌ : सत्ता और धन का केंद्र कुछ हाथों में न होकर स्थानीय समुदायों के पास होना चाहिए।
 * (२) न्यूनतम आवश्यकताएं‌ : हर व्यक्ति को जीवन की 5 बुनियादी ज़रूरतें गारंटी के साथ मिलनी चाहिए।
 * (३) अधिकतम क्रय शक्ति‌ : केवल आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, लोगों की "खरीदने की क्षमता" (Purchasing Power) बढ़ाना प्रउत का वास्तविक आर्थिक लक्ष्य है।
5. निष्कर्ष: एक नया समन्वय
यथार्थवाद जहाँ समाज की कड़वी सच्चाइयों और संघर्षों को उजागर करता है, वहीं प्रउत उन संघर्षों को समाप्त करने का एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक मार्ग प्रदान करता है। प्रउत का यथार्थवाद "शोषक" नहीं बल्कि "पोषक" है।
प्रउत के अनुसार, सच्चा यथार्थवाद वह है जो भौतिक जगत की सीमाओं को पहचानते हुए, मनुष्य को उसकी आध्यात्मिक अनंतता की ओर ले जाए। जैसा कि प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) का उद्देश्य है—सभी के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना—यही वह धरातल है जहाँ यथार्थवाद और आदर्शवाद का मिलन होता है।







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"यथार्थवाद जहाँ लड़खड़ाता है, वहाँ प्रउत सहारा देता है " 

यह कथन अत्यंत गहरा और तार्किक है। यथार्थवाद (Realism) अपनी तमाम व्यवहारिकता के बावजूद जहाँ मानवीय मूल्यों और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर विफल होने लगता है, प्रउत (PROUT) वहाँ एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समाधान प्रस्तुत कर समाज को गिरने से बचाता है।
​इसे हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं:
​1. स्वार्थ बनाम परोपकार (मानव स्वभाव का द्वंद्व)
​यथार्थवाद जहाँ लड़खड़ाता है : यथार्थवाद मानकर चलता है कि मनुष्य स्वभाव से स्वार्थी और सत्ता का भूखा है। यह विचारधारा शोषण को "प्राकृतिक" मानकर उसे स्वीकार कर लेती है, जिससे समाज में 'मत्स्य न्याय' (बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है) वाली स्थिति पैदा होती है।
​प्रउत का सहारा: प्रउत इस बात को स्वीकार करता है कि मनुष्य में स्वार्थ है, लेकिन वह इसे अंतिम सत्य नहीं मानता। प्रउत 'नव्य-मानवतावाद' के जरिए मनुष्य की चेतना को संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठाकर उसे ब्रह्मांडीय प्रेम से जोड़ता है। यह मनुष्य को लड़खड़ाने से रोकता है क्योंकि यह उसे पशु प्रवृत्ति से दिव्य प्रवृत्ति की ओर ले जाता है।
​2. संसाधनों का संचय बनाम तर्कसंगत वितरण
​यथार्थवाद जहाँ लड़खड़ाता है‌ : आर्थिक यथार्थवाद (पूंजीवाद का एक रूप) कहता है कि जिसके पास शक्ति है, वह संसाधन जुटाएगा। इसका परिणाम यह होता है कि दुनिया की 1% आबादी के पास 90% संपत्ति जमा हो जाती है, जिससे गरीबी और अपराध जन्म लेते हैं।
​प्रउत का सहारा : प्रउत का पहला सिद्धांत ही संचय पर रोक लगाता है—"समाज की अनुमति के बिना किसी को भौतिक संपत्ति का संचय नहीं करना चाहिए।" यह आर्थिक विषमता को रोककर समाज में संतुलन (Balance) प्रदान करता है।

​3. संघर्ष बनाम समन्वय (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
​यथार्थवाद जहाँ लड़खड़ाता है : अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में यथार्थवाद "शक्ति संतुलन" की बात करता है, जो अंततः हथियारों की दौड़ और युद्ध की ओर ले जाता है। यहाँ शांति केवल दो युद्धों के बीच का अंतराल बन जाती है।
​प्रउत का सहारा : प्रउत एक 'विश्व सरकार' (World Government) और 'विश्व संघ' की वकालत करता है। यह राष्ट्रों के बीच संघर्ष के बजाय 'सामाजिक चक्र' के आधार पर सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे वैश्विक राजनीति को एक स्थायी आधार मिलता है।
​4. भौतिकवाद की सीमा
​यथार्थवाद जहाँ लड़खड़ाता है : यथार्थवाद केवल भौतिक लाभ (GDP, सैन्य बल) को सफलता मानता है। लेकिन केवल भौतिक उन्नति से मानसिक शांति नहीं मिलती, जिससे समाज अवसाद और नैतिक पतन का शिकार हो जाता है।
​प्रउत का सहारा : प्रउत "शारीरिक-मानसिक-आध्यात्मिक" तीनों स्तरों पर प्रगति की बात करता है। यह मनुष्य को केवल 'आर्थिक प्राणी' नहीं मानता, बल्कि उसे एक आध्यात्मिक इकाई के रूप में प्रतिष्ठा देता है।


​प्रउतवादी दृष्टिकोण का चित्रमय सारांश
​यथार्थवाद एक टूटे हुए आईने की तरह है जो केवल वर्तमान की विकृतियों को दिखाता है। प्रउत उस आईने को जोड़कर उसे एक दूरबीन बनाता है, जिससे भविष्य की सुंदर और न्यायपूर्ण दुनिया देखी जा सके। जहाँ यथार्थवाद सत्ता के नशे में नैतिकता को भूल जाता है, वहाँ प्रउत 'सद्विप्रों' (नैतिक नेताओं) के माध्यम से समाज को सहारा देता है।











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प्रउत ने यथार्थवाद को आईना दिखाया है,

 यथार्थवाद (Realism) जहाँ केवल "अस्तित्व की लड़ाई" (Survival of the fittest) तक सीमित था, वहीं प्रउत ने उसे समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराया।
​प्रउत ने यथार्थवाद की कमियों को उजागर करते हुए उसे निम्नलिखित चार आईने दिखाए :
​1. संचय का आईना : "असीमित संचय प्रगति नहीं, चोरी है"
​यथार्थवाद मानता है कि अधिक से अधिक संसाधन जुटाना एक राष्ट्र या व्यक्ति की शक्ति का परिचायक है। प्रउत ने आईना दिखाते हुए कहा कि भौतिक संसाधन सीमित हैं। यदि एक व्यक्ति अपनी आवश्यकता से अधिक संचय करता है, तो वह अनजाने में ही किसी दूसरे की थाली से रोटी छीन रहा होता है।
​प्रउत का समाधान: प्रउत ने भौतिक संसाधनों के 'तर्कसंगत वितरण' का सिद्धांत देकर यथार्थवाद को स्वार्थ से ऊपर उठना सिखाया।
​2. शक्ति का आईना: "दमन नहीं, सेवा ही असली शक्ति है"
​यथार्थवाद में 'शक्ति' का अर्थ है—दूसरे को नियंत्रित करने या हराने की क्षमता। प्रउत ने आईना दिखाया कि जो शक्ति समाज के अंतिम व्यक्ति के आंसू न पोंछ सके, वह शक्ति नहीं बल्कि 'अहंकार' है।
​प्रउत का समाधान : प्रउत ने सद्विप्र (Sadvipra) की अवधारणा दी। सद्विप्र वह है जो शक्तिशाली तो है, लेकिन उसकी शक्ति का उपयोग समाज के शोषण को रोकने और न्याय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए होता है।
​3. लोकतंत्र का आईना : "राजनीतिक आजादी बिना आर्थिक आजादी के अधूरी है"
​यथार्थवादी राजनीति केवल वोट और सत्ता के समीकरणों तक सीमित रहती है। प्रउत ने आईना दिखाया कि एक भूखा व्यक्ति अपनी राजनीतिक आजादी का सही उपयोग कभी नहीं कर सकता। उसे पैसे के दम पर खरीदा जा सकता है।
​प्रउत का समाधान : प्रउत ने आर्थिक लोकतंत्र (Economic Democracy) का विचार दिया। इसके अनुसार, स्थानीय लोगों का स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण होना चाहिए ताकि उनकी न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी हो सकें और वे सही अर्थों में स्वतंत्र हो सकें।
​4. प्रगति का आईना : "केवल भौतिक विकास विनाश की ओर ले जाता है"
​यथार्थवाद केवल GDP और सैन्य शक्ति को विकास का पैमाना मानता है। प्रउत ने आईना दिखाया कि यदि समाज मानसिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित नहीं है, तो वह भौतिक संसाधनों का उपयोग केवल विनाशकारी हथियारों या पर्यावरण को नष्ट करने में करेगा।
​प्रउत का समाधानज्ञ: प्रउत ने प्रगति की परिभाषा बदली। असली प्रगति वह है जो मनुष्य को भौतिकता के दलदल से निकालकर मानसिक शांति और आध्यात्मिक बोध की ओर ले जाए।
​निष्कर्ष
​प्रउत ने यथार्थवाद को यह एहसास कराया कि दुनिया केवल एक बाज़ार या युद्ध का मैदान नहीं है, बल्कि एक "साझा परिवार" है। प्राउटिस्ट सर्व समाज के माध्यम से इन सिद्धांतों की बात करते हैं, तो वे वास्तव में समाज को वही आईना दिखा रहे होते हैं जो उसे उसकी नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
​"यथार्थवाद हमें जमीन पर रहना सिखाता है, लेकिन प्रउत हमें उस जमीन को सबके लिए उपजाऊ बनाना सिखाता है।"













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विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था धरातल पर यथार्थवाद का परिक्षण

प्रउत की विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था (Decentralized Economy) वह ठोस धरातल है, जहाँ यथार्थवाद के खोखले वादे समाप्त होते हैं और वास्तविक समाधान शुरू होते हैं। वर्तमान वैश्विक यथार्थवाद (पूंजीवाद) में सत्ता और संपत्ति का केंद्र कुछ महानगरों या कुछ पूंजीपतियों के पास होता है, जबकि प्रउत इसे 'जमीन' तक वापस ले जाता है।
​प्रउत के विकेंद्रीकृत आर्थिक मॉडल के मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:
​1. स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण
​यथार्थवाद में दूर बैठा कोई निवेशक किसी गांव के संसाधनों का दोहन करता है। प्रउत इसे बदलकर "भूमिपुत्र" के सिद्धांत को लागू करता है।
​सिद्धांत: किसी क्षेत्र के कच्चे माल, खनिज और श्रम का उपयोग सबसे पहले वहीं के लोगों के विकास के लिए होना चाहिए।
​लाभ: इससे गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनेगी।
​2. तीन-स्तरीय औद्योगिक ढांचा
​प्रउत उद्योगों को उनकी प्रकृति के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटता है ताकि शोषण की गुंजाइश न रहे:
​मुख्य उद्योग (Key Industries): बिजली, संचार, और भारी खनन जैसे उद्योग जिन्हें निजी हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता, उन्हें स्थानीय सरकार द्वारा संचालित किया जाना चाहिए (बिना लाभ-हानि के सिद्धांत पर)।
​सहकारी उद्योग (Cooperative Industries): अधिकांश वस्तुओं का उत्पादन सहकारी समितियों (Cooperatives) द्वारा होना चाहिए। यह प्रउत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
​लघु उद्योग (Small-scale Industries): बहुत छोटे स्तर के उद्योग व्यक्तिगत मालिकाना हक में रह सकते हैं।
​3. सहकारी खेती (Cooperative Farming)
​वर्तमान यथार्थ यह है कि छोटे किसान खेती छोड़ रहे हैं। प्रउत इसका समाधान 'सहकारी कृषि' में देखता है।
​किसान अपनी जमीन का मालिकाना हक रखते हुए मिलकर खेती करेंगे।
​आधुनिक तकनीक और सिंचाई के साधनों का सामूहिक उपयोग होगा।
​इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) भी बढ़ेगी।
​4. आर्थिक खंड (Socio-Economic Units)
​प्रउत पूरी दुनिया को केवल राजनीतिक सीमाओं में नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक खंडों (Samajas) में बांटने की बात करता है।
​ये खंड अपनी भौगोलिक स्थिति, संस्कृति और आर्थिक समस्याओं के आधार पर अपनी योजनाएं खुद बनाएंगे।
 प्राउटिस्ट सर्व समाज इसी 'समाज' की अवधारणा को सशक्त करने का प्रयास है, ताकि हर क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान के साथ आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सके।
​5. मुद्रा और लाभ का स्थानीय चक्र
​विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था में यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्थानीय क्षेत्र में कमाया गया पैसा वहीं के बाजार में घूमता रहे।
​जब पैसा बाहर नहीं जाएगा (Drain of wealth रुकेगा), तो उस क्षेत्र की समृद्धि तेजी से बढ़ेगी।
​इसके विपरीत, वर्तमान यथार्थवादी मॉडल में गांव का पैसा शहरों में और देश का पैसा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के जरिए विदेश चला जाता है।
प्रउत का यह मॉडल यथार्थवाद को "हवाई किलों" से उतारकर "जमीन की हकीकत" पर लाता है। यह केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट है जिससे गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक गुलामी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
6. यथार्थवादी पूंजीवाद बनाम प्रउत का आर्थिक मॉडल
यथार्थवादी पूंजीवाद और प्रउत के आर्थिक मॉडल के बीच का अंतर मुख्य रूप से 'शक्ति के केंद्र' और 'लक्ष्य' का है। यहाँ इनका संक्षिप्त तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
​1. सत्ता और नियंत्रण
​यथार्थवादी पूंजीवाद: आर्थिक सत्ता केंद्रीयकृत होती है। निर्णय लेने का अधिकार कुछ बड़े पूंजीपतियों या केंद्रीय संस्थाओं के पास होता है।
​प्रउत: आर्थिक सत्ता विकेंद्रीकृत होती है। संसाधनों पर पहला अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति स्थानीय लोगों (Local People) के पास होती है।
​2. उत्पादन का उद्देश्य
​यथार्थवादी पूंजीवाद: इसका मुख्य लक्ष्य 'अधिकतम लाभ' (Profit Maximization) कमाना है, चाहे उससे समाज का अहित ही क्यों न हो।
​प्रउत: इसका मुख्य लक्ष्य 'अधिकतम उपयोग' (Maximum Utilization) और मानवता की सेवा है। उत्पादन उपभोग के लिए होता है, न कि केवल मुनाफे के लिए।
​3. संसाधनों का स्वामित्व
​यथार्थवादी पूंजीवाद: संसाधनों पर निजी स्वामित्व (Private Ownership) को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे धन का संचय कुछ ही हाथों में सिमट जाता है।
​प्रउत: मुख्य उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण और मध्यम उद्योगों में 'सहकारी तंत्र' (Cooperatives) को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि लाभ का बंटवारा न्यायपूर्ण हो।
​4. रोजगार और क्रय शक्ति
​यथार्थवादी पूंजीवाद: लाभ बढ़ाने के लिए मशीनीकरण द्वारा श्रम की कटौती की जाती है, जिससे बेरोजगारी बढ़ती है।
​प्रउत: इसका प्राथमिक उद्देश्य हर व्यक्ति को 'पूर्ण रोजगार' देना और उसकी 'क्रय शक्ति' (Purchasing Power) को बढ़ाना है।

Presented by -
Karan Singh Rajpurohit
Publication Secretary, Proudist Sarva Samaj
9982322405


नैरोबी सेक्टर में समाज आंदोलन

नैरोबी सेक्टर में समाज आंदोलन





Shri P. R. Sarkar




       










नैरोबी सेक्टर(Nairobi Sector)

की समाज इकाइयों

​(1) इबो — Ibo

(2) योरूबा — Yoruba

(3) ईडो — Edo

(4) गा — Ga

(5) हौसा — Hausa

(6) ईवे — Ewe

(7) ट्वी अकन — Twi Akan

(8) डियुला — Dioula

(9) बेटे — Bete

(10) बाकुला — Bacula

(11) मोसी — Mossi

(12) सेंगलेस — Sengales

(13) क्रियोलो — Criolo

(14) मेंडे — Mende

(15) टेम्ना — Temna

(16) पिग्मी — Pigmy

(17) लांडा — Landa

(18) हॉटेनटॉट — Hottentot

(19) ज़ुलु — Zulu

(20) डी-एन-शी — Di-N-Shi

(21) बगंडा — Baganda

(22) बुशमैन — Bushman

(23) होमा — Homa

(24) लोजी — Lozi

(25) न्यान्ज़ा — Nyanza

(26) स्वाहिली — Swahili

(27) अम्हारिक् — Amharic

(28) एओमो — Eomo






नैरोबी सेक्टर की समाज इकाइयों उत्तर से दक्षिण के क्रम में

(1) अम्हारिक् — Amharic (इथियोपिया - उत्तर-पूर्व)

(2) हौसा — Hausa (नाइजीरिया/नाइजर - सहेल क्षेत्र)

(3) मोसी — Mossi (बुर्किना फासो)

(4) सेंगलेस — Sengales (सेनेगल - पश्चिम अफ्रीका)

(5) डियुला — Dioula (माली/आइवरी कोस्ट)

(6) मेंडे — Mende (सिएरा लियोन)

(7) टेम्ना — Temna (सिएरा लियोन)

(8) क्रियोलो — Criolo (गिनी-बिसाऊ/केप वर्डे)

(9) योरूबा — Yoruba (नाइजीरिया/बेनिन)

(10) ईडो — Edo (नाइजीरिया)

(11) इबो — Ibo (नाइजीरिया)

(12) ट्वी अकन — Twi Akan (घाना)

(13) गा — Ga (घाना)

(14) ईवे — Ewe (घाना/टोगो)

(15) बेटे — Bete (आइवरी कोस्ट)

(16) एओमो — Eomo (ओरोमो - इथियोपिया/केन्या सीमा)

(17) बगंडा — Baganda (युगांडा)

(18) स्वाहिली — Swahili (केन्या/तंजानिया तटीय क्षेत्र)

(19) न्यान्ज़ा — Nyanza (केन्या/तंजानिया - विक्टोरिया झील क्षेत्र)

(20) बाकुला — Bacula (कांगो क्षेत्र)

(21) पिग्मी — Pigmy (मध्य अफ्रीका के वर्षावन)

(22) लांडा — Landa (लुंडा - अंगोला/कांगो/जाम्बिया)

(23) डी-एन-शी — Di-N-Shi (मध्य/दक्षिण-मध्य अफ्रीका)

(24) लोजी — Lozi (जाम्बिया/नामीबिया)

(25) होमा — Homa (नामीबिया/बोत्सवाना क्षेत्र)

(26) बुशमैन — Bushman (कालाहारी मरुस्थल - बोत्सवाना)

(27) हॉटेनटॉट — Hottentot (खोईखोई - नामीबिया/दक्षिण अफ्रीका)

(28) ज़ुलु — Zulu (दक्षिण अफ्रीका)









नैरोबी सेक्टर की समाज इकाइयों देशवार

पश्चिम अफ्रीका (West Africa)

  • ​नाइजीरिया (Nigeria): (1) इबो — Ibo 

(2) योरूबा — Yoruba (3) ईडो — Edo

 (4) हौसा — Hausa (नाइजर में भी)

  • ​घाना (Ghana):

 (5) ट्वी अकन — Twi Akan 

(6) गा — Ga

 (7) ईवे — Ewe (टोगो में भी)

  • ​सिएरा लियोन (Sierra Leone): 

(8) मेंडे — Mende 

(9) टेम्ना — Temna

  • ​आइवरी कोस्ट / कोटे डी आइवर (Ivory Coast): (10) डियुला — Dioula (11) बेटे — Bete

  • ​सेनेगल (Senegal): 

(12) सेंगलेस — Sengales

  • ​बुर्किना फासो (Burkina Faso): 

(13) मोसी — Mossi

  • ​गिनी-बिसाऊ / केप वर्डे (Guinea-Bissau): 

(14) क्रियोलो — Criolo

​पूर्वी अफ्रीका (East Africa)

  • ​इथियोपिया (Ethiopia): (15) अम्हारिक् — Amharic 

(16) एओमो — Eomo (ओरोमो)

  • ​युगांडा (Uganda):

 (17) बगंडा — Baganda

  • ​केन्या और तंजानिया (Kenya & Tanzania): (18) स्वाहिली — Swahili (19) न्यान्ज़ा — Nyanza

​मध्य अफ्रीका (Central Africa)

  • ​कांगो और आसपास के वर्षावन (Congo Basin): (20) पिग्मी — Pigmy (21) बाकुला — Bacula

  • ​अंगोला / कांगो (Angola/DRC):

 (22) लांडा — Landa (लुंडा)

  • ​मध्य अफ्रीका क्षेत्र: 

(23) डी-एन-शी — Di-N-Shi

​दक्षिणी अफ्रीका (Southern Africa)

  • ​दक्षिण अफ्रीका (South Africa)

 (24) ज़ुलु — Zulu

  • ​बोत्सवाना और नामीबिया (Botswana/Namibia): (25) बुशमैन — Bushman (सान)

 (26) हॉटेनटॉट — Hottentot (खोईखोई) (27) होमा — Homa

  • ​जाम्बिया (Zambia): 

(28) लोजी — Lozi








नैरोबी सेक्टर की 

सामाजिक आर्थिक इकाई का

 सामान्य परिचय

​(1) इबो (Ibo/Igbo): दक्षिण-पूर्वी नाइजीरिया की प्रमुख इकाई। ये अपनी उद्यमिता और व्यापारिक कुशलता के लिए जाने जाते हैं।

(2) योरूबा (Yoruba): नाइजीरिया और बेनिन के निवासी। इनकी संस्कृति और नगरीय सभ्यता (Ifé) का इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्ध है।

(3) ईडो (Edo): नाइजीरिया के बेनिन साम्राज्य से संबंधित। ये अपनी कलाकृति और कांस्य (Bronze) शिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं।

(4) गा (Ga): मुख्य रूप से घाना की राजधानी अकरा और आसपास के तटीय क्षेत्रों के निवासी। ये पारंपरिक रूप से मछुआरे और व्यापारी रहे हैं।

(5) हौसा (Hausa): उत्तरी नाइजीरिया और नाइजर की विशाल इकाई। यह पूरे पश्चिम अफ्रीका में व्यापार और इस्लाम के प्रसार की मुख्य भाषा है।

(6) ईवे (Ewe): घाना, टोगो और बेनिन में फैली इकाई। ये अपनी जटिल बुनाई (Kente cloth) और संगीत के लिए जाने जाते हैं।

(7) ट्वी अकन (Twi Akan): घाना की सबसे बड़ी सांस्कृतिक इकाई। सोने के व्यापार और सशक्त राजनीतिक व्यवस्था (अशांति साम्राज्य) इनका इतिहास रहा है।

(8) डियुला (Dioula): यह एक व्यापारिक समुदाय है जो माली, आइवरी कोस्ट और बुर्किना फासो में फैला है। ये व्यापार और इस्लाम के वाहक रहे हैं।

(9) बेटे (Bete): आइवरी कोस्ट के निवासी। ये मुख्य रूप से कृषि (कोको और कॉफी) पर आधारित समाज हैं।

(10) बाकुला (Bacula): यह मुख्य रूप से कांगो क्षेत्र के समूहों से संबंधित है, जो अपनी स्थानीय कला और सामुदायिक जीवन के लिए जाने जाते हैं।

(11) मोसी (Mossi): बुर्किना फासो की प्रमुख इकाई। इनका इतिहास शक्तिशाली मोसी साम्राज्यों से जुड़ा है जो सदियों तक स्थिर रहे।

(12) सेंगलेस (Sengales): सेनेगल की मिश्रित सांस्कृतिक पहचान, जिसमें वोलोफ और अन्य समुदायों का प्रभाव है। यह फ्रेंच और स्थानीय भाषाओं का संगम है।

(13) क्रियोलो (Criolo): केप वर्डे और गिनी-बिसाऊ के मिश्रित अफ्रीकी-पुर्तगाली मूल के लोग। इनकी अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति है।

(14) मेंडे (Mende): सिएरा लियोन की प्रमुख कृषि प्रधान इकाई। ये अपने गुप्त समाजों (जैसे Poro) और अनुष्ठानों के लिए जाने जाते हैं।

(15) टेम्ना (Temna): सिएरा लियोन के उत्तरी क्षेत्र की प्रमुख इकाई, जो खेती और व्यापार में सक्रिय है।

​(16) पिग्मी (Pigmy): मध्य अफ्रीका के वर्षावनों के मूल निवासी। ये अपनी कम लंबाई और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव (शिकार और संग्रहण) के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।

(17) लांडा (Landa/Lunda): कांगो, अंगोला और जाम्बिया में फैले लोग। इनका अतीत महान लुंडा साम्राज्य से जुड़ा है।

(18) हॉटेनटॉट (Hottentot): इन्हें अब 'खोईखोई' कहा जाता है। ये दक्षिणी अफ्रीका के चरवाहे समूह हैं जिनकी भाषा में 'क्लिक' ध्वनियाँ होती हैं।

(19) ज़ुलु (Zulu): दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध योद्धा इकाई। राजा शाका ज़ुलु के नेतृत्व में इनका सैन्य इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है।

(20) डी-एन-शी (Di-N-Shi): मध्य अफ्रीका के आंतरिक क्षेत्रों की एक स्थानीय सांस्कृतिक इकाई।

(21) बगंडा (Baganda): युगांडा की सबसे बड़ी इकाई। इनके पास 'बुगांडा' नाम की अपनी राजशाही व्यवस्था है जो आज भी सांस्कृतिक रूप से सक्रिय है।

(22) बुशमैन (Bushman): इन्हें 'सान' भी कहा जाता है। ये कालाहारी मरुस्थल के प्राचीन निवासी हैं और शिकार की अद्भुत कला के लिए जाने जाते हैं।

(23) होमा (Homa): मुख्य रूप से नामीबिया और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित एक छोटा भाषाई और सांस्कृतिक समूह।

(24) लोजी (Lozi): जाम्बिया के पश्चिमी प्रांत के निवासी। ये अपनी वार्षिक बाढ़ रस्म 'कुओम्बोका' के लिए प्रसिद्ध हैं।

(25) न्यान्ज़ा (Nyanza): विक्टोरिया झील के आसपास के लोग (जैसे लुओ)। इनका मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और कृषि है।

(26) स्वाहिली (Swahili): पूर्वी अफ्रीका (केन्या-तंजानिया) के तटीय लोग। यह अरब और अफ्रीकी संस्कृति का मिश्रण है और इनकी भाषा पूरे अफ्रीका में प्रसिद्ध है।

(27) अम्हारिक् (Amharic): इथियोपिया की प्रमुख इकाई। यह इथियोपिया की आधिकारिक भाषा है और इसका संबंध प्राचीन ईसाई साम्राज्य से है।

(28) एओमो (Eomo/Oromo): इथियोपिया की सबसे बड़ी जातीय इकाई। इनकी अपनी प्राचीन लोकतांत्रिक सामाजिक व्यवस्था है जिसे 'गडा' (Gadaa) कहा जाता है।

​ये सभी इकाइयाँ पी.आर. सरकार (P.R. Sarkar) द्वारा प्रतिपादित प्रउत (PROUT) दर्शन के अनुसार स्थानीय आर्थिक स्वावलंबन और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी गई हैं।














 

नैरोबी सेक्टर (अफ़्रीका) की सभी 28 इकाइयों के लिए प्रउत (PROUT) के सिद्धांतों पर आधारित 

क्रमवार विकास योजना 

​इन सभी योजनाओं का मूल मंत्र है: "स्थानीय कच्चा माल, स्थानीय श्रम और स्थानीय उपभोग।"

​पश्चिम अफ्रीकी ब्लॉक (West African Block)

​(1) इबो (Ibo)

  • ​आर्थिक: 'सहकारी इंजीनियरिंग हब' की स्थापना। छोटे कल-पुर्जों और घरेलू उपकरणों के निर्माण में इनकी उद्यमशीलता का उपयोग।

  • ​सामाजिक: तकनीकी शिक्षा के लिए 'पीपल्स यूनिवर्सिटी' का निर्माण।

  • ​सांस्कृतिक: इबो साहित्य और लोक कला के संरक्षण हेतु डिजिटल आर्काइव।

​(2) योरूबा (Yoruba)

  • ​आर्थिक: 'अदिरे' (वस्त्र) और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों का सहकारी नेटवर्क।

  • ​सामाजिक: शहरी नियोजन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की प्राथमिकता।

  • ​सांस्कृतिक: इनके प्राचीन नगरीय इतिहास और कला के लिए 'सांस्कृतिक विनिमय केंद्र'।

​(3) ईडो (Edo)

  • ​आर्थिक: विश्व प्रसिद्ध कांस्य (Bronze) और धातु शिल्प का औद्योगिक स्तर पर सहकारी उत्पादन।

  • ​सामाजिक: शिल्पकारों के लिए सुरक्षित आवास और वृद्धावस्था पेंशन योजना।

  • ​सांस्कृतिक: बेनिन कला संग्रहालयों का स्थानीय संचालन।

​(4) गा (Ga)

  • ​आर्थिक: समुद्री भोजन प्रसंस्करण और डिब्बाबंद मछली के निर्यात के लिए सहकारी इकाइयाँ।

  • ​सामाजिक: तटीय स्वच्छता और जल शुद्धिकरण परियोजनाओं का क्रियान्वयन।

  • ​सांस्कृतिक: 'होमोवो' उत्सव के माध्यम से सामुदायिक एकता का संचार।

​(5) हौसा (Hausa)

  • ​आर्थिक: चमड़ा उद्योग और शुष्क अनाज (बाजरा-ज्वार) के लिए विशाल कृषि सहकारी समितियाँ।

  • ​सामाजिक: मोबाइल औषधालयों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा।

  • ​सांस्कृतिक: हौसा मौखिक परंपराओं और संगीत का संरक्षण।

​(6) ईवे (Ewe)

  • ​आर्थिक: उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प और संगीत वाद्ययंत्रों का निर्माण उद्योग।

  • ​सामाजिक: महिला सहकारी समितियों को वस्त्र उद्योग का नेतृत्व देना।

  • ​सांस्कृतिक: पारंपरिक नृत्य और संगीत के लिए अकादमियों की स्थापना।

​(7) ट्वी अकन (Twi Akan)

  • ​आर्थिक: खनिज संसाधनों (सोना) का स्थानीय सहकारी स्वामित्व और लकड़ी उद्योग का सतत विकास।

  • ​सामाजिक: सभी के लिए बुनियादी शिक्षा और कौशल विकास।

  • ​सांस्कृतिक: 'असांते' गौरव और पारंपरिक शासन पद्धति का सम्मान।

​(8) डियुला (Dioula)

  • ​आर्थिक: अंतर-क्षेत्रीय व्यापार के लिए सहकारी रसद (Logistics) और वेयरहाउसिंग।

  • ​सामाजिक: व्यापारियों और मजदूरों के लिए बीमा और सुरक्षा योजनाएँ।

  • ​सांस्कृतिक: व्यापारिक नैतिकता और भाषाई विविधता का संवर्धन।

​(9) बेटे (Bete)

  • ​आर्थिक: कोको और कॉफी का शत-प्रतिशत स्थानीय प्रसंस्करण (चॉकलेट निर्माण)।

  • ​सामाजिक: कृषि मजदूरों के लिए मुफ्त चिकित्सा और शिक्षा।

  • ​सांस्कृतिक: कृषि आधारित उत्सवों और लोकगीतों का आयोजन।

​(10) बाकुला (Bacula)

  • ​आर्थिक: सामुदायिक फल और सब्जी उत्पादन केंद्र।

  • ​सामाजिक: स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान।

  • ​सांस्कृतिक: स्थानीय बोली और सामुदायिक रीति-रिवाजों का दस्तावेजीकरण।

​(11) मोसी (Mossi)

  • ​आर्थिक: जल संचयन तकनीक और पशुधन आधारित डेयरी उद्योग।

  • ​सामाजिक: मृदा संरक्षण के लिए सामुदायिक वानिकी।

  • ​सांस्कृतिक: ऐतिहासिक मोसी साम्राज्य की न्यायप्रिय परंपराओं का पुनरुद्धार।

​(12) सेंगलेस (Sengales)

  • ​आर्थिक: इको-पर्यटन और समुद्री व्यापार की सहकारी प्रबंधन प्रणाली।

  • ​सामाजिक: बेरोजगारी मिटाने के लिए कौशल विकास कार्यशालाएँ।

  • ​सांस्कृतिक: अफ्रीकी और वैश्विक संस्कृति के संगम का उत्सव।

​(13) क्रियोलो (Criolo)

  • ​आर्थिक: समुद्री नमक उत्पादन और सौर ऊर्जा आधारित कुटीर उद्योग।

  • ​सामाजिक: द्वीपीय क्षेत्रों में संचार और परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था।

  • ​सांस्कृतिक: क्रियोल भाषा और संगीत के लिए विशेष शोध संस्थान।

​(14) मेंडे (Mende)

  • ​आर्थिक: पाम ऑयल और प्राकृतिक फाइबर से निर्मित उत्पादों का उद्योग।

  • ​सामाजिक: ग्रामीण बुनियादी ढांचे (सड़क और बिजली) का विस्तार।

  • ​सांस्कृतिक: 'पोरो' जैसे पारंपरिक समाजों के नैतिक मूल्यों का उपयोग।

​(15) टेम्ना (Temna)

  • ​आर्थिक: उन्नत चावल की खेती और भंडारण के लिए सामुदायिक साइलो (Silos)।

  • ​सामाजिक: किसानों के लिए सस्ती ऋण सुविधा और बीज बैंक।

  • ​सांस्कृतिक: स्थानीय कला और लोक कथाओं का स्कूलों में शिक्षण।

​मध्य और पूर्वी अफ्रीकी ब्लॉक (Central & East African Block)

​(16) पिग्मी (Pigmy)

  • ​आर्थिक: गैर-काष्ठ वन उत्पाद (शहद, औषधि) का सहकारी विपणन।

  • ​सामाजिक: उनके प्राकृतिक आवास (जंगल) के अधिकारों का संरक्षण।

  • ​सांस्कृतिक: उनके अद्वितीय जंगल कौशल और संगीत का विश्वव्यापी सम्मान।

​(17) लांडा (Landa)

  • ​आर्थिक: तांबे और खनिजों के मूल्य-संवर्धन हेतु रिफाइनरी परियोजनाएँ।

  • ​सामाजिक: खदान क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य लाभ।

  • ​सांस्कृतिक: लांडा शाही परंपराओं का ऐतिहासिक संरक्षण।

​(18) हॉटेनटॉट (Hottentot/Khoikhoi)

  • ​आर्थिक: भेड़ों की उन्नत नस्ल का पालन और ऊन आधारित वस्त्र इकाइयाँ।

  • ​सामाजिक: अर्ध-खानाबदोश समुदायों के लिए चल-स्कूल और अस्पताल।

  • ​सांस्कृतिक: 'क्लिक' भाषाओं के संरक्षण के लिए भाषाई शोध।

​(19) ज़ुलु (Zulu)

  • ​आर्थिक: डेयरी उत्पादन और आधुनिक कृषि-फार्म सहकारी समितियाँ।

  • ​सामाजिक: युवाओं के लिए शारीरिक और सैन्य प्रशिक्षण अकादमियाँ।

  • ​सांस्कृतिक: ज़ुलु मार्शल आर्ट और पारंपरिक शिल्प का संवर्धन।

​(20) डी-एन-शी (Di-N-Shi)

  • ​आर्थिक: बांस और स्थानीय लकड़ी से टिकाऊ फर्नीचर निर्माण।

  • ​सामाजिक: सामुदायिक स्वच्छता और पोषण सुरक्षा।

  • ​सांस्कृतिक: क्षेत्रीय बोलियों और लोक कला का प्रदर्शन।

​(21) बगंडा (Baganda)

  • ​आर्थिक: केले के फाइबर से कागज़ और वस्त्र निर्माण के कारखाने।

  • ​सामाजिक: सुव्यवस्थित सामुदायिक प्रशासन और न्याय व्यवस्था।

  • ​सांस्कृतिक: लुगांडा भाषा और शाही संगीत का संरक्षण।

​(22) बुशमैन (Bushman/San)

  • ​आर्थिक: पारिस्थितिकी-पर्यटन और पारंपरिक औषधियों का पेटेंट।

  • ​सामाजिक: जल संसाधनों तक स्थायी पहुँच सुनिश्चित करना।

  • ​सांस्कृतिक: उनके प्राचीन रॉक आर्ट और मरुस्थलीय ज्ञान का सम्मान।

​(23) होमा (Homa)

  • ​आर्थिक: शुष्क भूमि खेती और छोटे पैमाने के सिंचाई प्रोजेक्ट।

  • ​सामाजिक: साक्षरता दर बढ़ाने के लिए प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम।

  • ​सांस्कृतिक: स्थानीय लोकगीतों का डिजिटल संरक्षण।

​(24) लोजी (Lozi)

  • ​आर्थिक: बाढ़ के मैदानों में जलीय कृषि (Aquaculture) और धान की खेती।

  • ​सामाजिक: आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत के लिए स्थायी बुनियादी ढांचा।

  • ​सांस्कृतिक: 'कुओम्बोका' समारोह को वैश्विक पर्यटन से जोड़ना।

​(25) न्यान्ज़ा (Nyanza)

  • ​आर्थिक: विक्टोरिया झील के किनारे मत्स्य पालन और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क।

  • ​सामाजिक: जलजनित रोगों के नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य योजनाएँ।

  • ​सांस्कृतिक: झील के तट की पारंपरिक कहानियों और गीतों का संकलन।

​(26) स्वाहिली (Swahili)

  • ​आर्थिक: मसालों का प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सहकारी समितियाँ।

  • ​सामाजिक: तटीय शहरों में उच्च गुणवत्ता वाली नागरिक सुविधाएँ।

  • ​सांस्कृतिक: स्वाहिली भाषा को 'लिंगुआ फ्रेंका' के रूप में प्रउत साहित्य से जोड़ना।

​(27) अम्हारिक् (Amharic)

  • ​आर्थिक: उच्च भूमि कृषि, कॉफी उत्पादन और निर्यात सहकारी केंद्र।

  • ​सामाजिक: आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पारंपरिक चिकित्सा का एकीकरण।

  • ​सांस्कृतिक: प्राचीन गीज़ (Ge'ez) लिपि और ऑर्थोडॉक्स कला का संरक्षण।

​(28) एओमो (Eomo/Oromo)

  • ​आर्थिक: बड़े पैमाने पर पशुपालन और अनाज उत्पादन सहकारी समितियाँ।

  • ​सामाजिक: 'गडा' (Gadaa) प्रणाली को सहभागी लोकतंत्र के रूप में लागू करना।

  • ​सांस्कृतिक: ओरोमो भाषा के साहित्य और पारंपरिक खेलों का विकास।

​करण सिंह राजपुरोहित जी, यह प्लान प्रउत के "आत्मनिर्भर आर्थिक इकाइयों" के सपने को साकार करने की दिशा में एक रूपरेखा है।

ये सभी प्रोजेक्ट्स "सबकी न्यूनतम आवश्यकताओं की गारंटी" के प्रउतवादी सिद्धांत पर आधारित हैं। 





प्रउत (PROUT) के सिद्धांतों के आधार पर 

उदाहरण के लिए 

पिग्मी सामाजिक-आर्थिक इकाई 

के लिए मास्टर प्लान 

​1. आर्थिक मास्टर प्लान (Economic Blueprint)

​इसका मुख्य लक्ष्य 'पूंजी का केंद्रीकरण' रोकना और स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण करना है।

​वन-आधारित सहकारी समितियाँ : लकड़ी काटे बिना (Non-Timber Forest Products) शहद, औषधीय पौधों, मशरूम और प्राकृतिक रबर के संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए सहकारी समितियां बनाई जाएंगी।

​मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्चे माल को बाहर बेचने के बजाय, पिग्मी क्षेत्रों में ही छोटी औषधीय अर्क इकाइयां (Processing Units) स्थापित की जाएंगी ताकि लाभ का बड़ा हिस्सा वहीं रहे।

​भूमि अधिकार और कृषि: इन्हें वर्षावनों के भीतर 'एग्रो-फॉरेस्ट्री' (वन-खेती) के लिए सुरक्षित भूमि आवंटित की जाएगी, जहाँ ये अपनी पारंपरिक जीवनशैली के साथ सात्विक खेती कर सकें।

​2. सामाजिक मास्टर प्लान (Social Blueprint)

​इसका लक्ष्य 'न्यूनतम आवश्यकताओं की गारंटी' देना है।

​आवास और स्वास्थ्य : वर्षावनों के अनुकूल, पर्यावरण-हितैषी आधुनिक आवास और 'चल-चिकित्सालय' (Mobile Clinics) जो स्थानीय जड़ी-बूटियों और आधुनिक चिकित्सा का संगम हों।

​शिक्षा : पिग्मी बच्चों के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था जो उनकी वन-विद्या को भी मान्यता दे और उन्हें आधुनिक विज्ञान से भी जोड़े।

​शोषण से मुक्ति : बिचौलियों को पूरी तरह समाप्त कर सीधे सहकारी विपणन प्रणाली (Direct Marketing) लागू करना।

​3. सांस्कृतिक मास्टर प्लान (Cultural Blueprint)

​इसका लक्ष्य 'सांस्कृतिक विरासत' का संरक्षण और विकास है।

​भाषा और संगीत का संरक्षण : पिग्मी संगीत और उनकी अद्वितीय मौखिक परंपराओं को डिजिटल रूप में संरक्षित करना और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाना।

​सांस्कृतिक पर्यटन (Eco-Tourism): पर्यटन को केवल व्यावसायिक न रखकर 'सांस्कृतिक विनिमय' बनाना, जहाँ लोग पिग्मी समुदाय से प्रकृति के साथ संतुलन में रहना सीख सकें।

​4. सदविप्र राज स्थापना (Establishment of Sadvipra Leadership)

​प्रउत का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ नैतिक नेतृत्व है।

​स्थानीय बोर्ड का गठन : पिग्मी समुदाय के भीतर से ही उन व्यक्तियों को चुनना जो नैतिक रूप से सुदृढ़, निस्वार्थ और सेवाभावी हों। इन्हें 'सदविप्र' के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

​निगरानी समिति : ये सदविप्र यह सुनिश्चित करेंगे कि सहकारी समितियों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो और आर्थिक लाभ का वितरण न्यायसंगत (Rational Distribution) हो।

​जागरूकता केंद्र : सदविप्रों द्वारा संचालित केंद्र जो समुदाय को उनके अधिकारों और शोषण के प्रति जागरूक करेंगे।

​निष्कर्ष: यह मास्टर प्लान पिग्मी समुदाय को केवल "मदद" देने के बजाय उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था का "मालिक" बनाने पर केंद्रित है। जब समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति स्वावलंबी होगा, तभी नैरोबी सेक्टर में वास्तविक प्रउत की स्थापना होगी।

करण सिंह राजपुरोहित

प्रकाशन सचिव

प्राउटिस्ट सर्व समाज

9982322405

जॉर्जटाउन सेक्टर में समाज आंदोलन

जॉर्जटाउन सेक्टर में समाज आंदोलन




Shri P. R. Sarkar





"जॉर्जटाउन सेक्टर 
(Georgetown Sector)

​(1) ब्राजीलियाई (Brazilian)
(2) अर्जेंटीनी (Argentinian)
(3) उरुग्वेयन (Uruguayan)
(4) कोलंबियाई (Colombian)
(5) क्वेशुआ (Quechua)
(6) चिलियन (Chilian)
(7) वेनेजुएला (Venezuelan)
(8) गुआरानी (Guarani)
(9) गयाना - फ्रेंच (Guyana - French)
(10) गयाना - ब्रिटिश (Guyana - British)
  जार्ज टाऊन : सामाजिक आर्थिक इकाइयों का देशवार विवरण
​1. वेनेजुएला इकाई (Venezuelan)
​देश: वेनेजुएला (Venezuela)
​क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका का उत्तरी तट।
​2. कोलंबियाई (Colombian)
​देश: कोलंबिया (Colombia)
​क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका का उत्तर-पश्चिमी भाग।
​3. गयाना - फ्रेंच (Guyana - French)
​देश/क्षेत्र: फ्रेंच गयाना (फ्रांस का विदेशी विभाग)
​स्थिति: दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित फ्रांसीसी क्षेत्र।
​4. गयाना - ब्रिटिश (Guyana - British) 
​देश: गयाना (Guyana)
​विवरण: इसे पहले ब्रिटिश गयाना कहा जाता था, अब यह एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र है।
​5. ब्राजीलियाई (Brazilian)
​देश: ब्राजील (Brazil)
​क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका का सबसे विशाल मध्य और पूर्वी भाग।
​6. क्वेशुआ (Quechua)
​देश: पेरू, बोलीविया, इक्वाडोर (मुख्य रूप से)
​विवरण: यह एक सांस्कृतिक और भाषाई इकाई है जो 'एंडीज पर्वतमाला' के देशों में फैली हुई है।
​7. गुआरानी (Guarani)
​देश: पराग्वे, ब्राजील, अर्जेंटीना और बोलीविया
​विवरण: यह भाषाई समुदाय मुख्य रूप से पराग्वे और उसके पड़ोसी देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित है।
​8. चिलियन (Chilian)
​देश: चिली (Chile)
​क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित लंबी संकरी पट्टी।
​9. उरुग्वेयन (Uruguayan)
​देश: उरुग्वे (Uruguay)
​क्षेत्र: अर्जेंटीना और ब्राजील के बीच दक्षिण-पूर्वी तट पर।
​10. अर्जेंटीनी (Argentinian)
​देश: अर्जेंटीना (Argentina)
​क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका का दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भाग।






समाज इकाइयों की स्थिति
( उत्तर से दक्षिण का क्रम (North to South Order)) 


​(1) वेनेजुएला (Venezuelan) - महाद्वीप के सबसे उत्तर में स्थित।
(2) कोलंबियाई (Colombian) - वेनेजुएला के दक्षिण-पश्चिम में।
(3) गयाना - फ्रेंच (Guyana - French) - उत्तरी तट पर स्थित।
(4) गयाना - ब्रिटिश (Guyana - British) - वर्तमान गयाना, उत्तरी क्षेत्र।
(5) ब्राजीलियाई (Brazilian) - विशाल क्षेत्र जो मध्य तक फैला है।
(6) क्वेशुआ (Quechua) - मुख्य रूप से पेरू और बोलिविया के ऊंचे क्षेत्रों में (ब्राजील के समानांतर)।
(7) गुआरानी (Guarani) - पराग्वे और दक्षिण-मध्य ब्राजील के आसपास का क्षेत्र।
(8) चिलियन (Chilian) - दक्षिण-पश्चिम की लंबी पट्टी।
(9) उरुग्वेयन (Uruguayan) - दक्षिण-पूर्वी हिस्से में।
(10) अर्जेंटीनी (Argentinian) - महाद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ।






समाज इकाई का सामान्य परिवार
​1. वेनेजुएला (Venezuelan)
​यह दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित देश है। यह अपनी विशाल तेल संपदा और 'एंजेल फॉल्स' (दुनिया का सबसे ऊँचा जलप्रपात) के लिए प्रसिद्ध है।
​2. कोलंबियाई (Colombian)
​यह महाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह दुनिया का प्रमुख कॉफी उत्पादक देश है और इसकी सीमा कैरिबियन सागर और प्रशांत महासागर दोनों से लगती है।
​3. गयाना - फ्रेंच (Guyana - French)
​यह फ्रांस का एक विदेशी क्षेत्र (Overseas Department) है। यहाँ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का प्रमुख प्रक्षेपण केंद्र 'कौरो' (Kourou) स्थित है।
​4. गयाना - ब्रिटिश (Guyana - British)
​इसे अब केवल गयाना के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण अमेरिका का एकमात्र देश है जहाँ अंग्रेजी आधिकारिक भाषा है। यहाँ भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है।
​5. ब्राजीलियाई (Brazilian)
​दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश। यहाँ अमेज़न वर्षावन का अधिकांश हिस्सा स्थित है और यह अपनी फुटबॉल संस्कृति और सांबा नृत्य के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है।
​6. क्वेशुआ (Quechua)
​यह कोई देश नहीं बल्कि एक स्वदेशी जातीय समूह है। ये लोग मुख्य रूप से एंडीज पर्वत श्रृंखला (पेरू, बोलीविया, इक्वाडोर) में रहते हैं और प्राचीन 'इंका साम्राज्य' के वंशज माने जाते हैं।
​7. गुआरानी (Guarani)
​यह भी एक महत्वपूर्ण स्वदेशी समूह है। ये मुख्य रूप से पराग्वे, ब्राजील और अर्जेंटीना के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाए जाते हैं। 'गुआरानी' पराग्वे की आधिकारिक भाषाओं में से एक है।
​8. चिलियन (Chilian), 
​चिली महाद्वीप के पश्चिमी तट पर एक लंबी और संकरी पट्टी जैसा देश है। यह तांबे (Copper) का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और यहाँ 'अटाकामा रेगिस्तान' स्थित है।
​9. उरुग्वेयन (Uruguayan)
​यह अर्जेंटीना और ब्राजील के बीच स्थित एक छोटा लेकिन प्रगतिशील देश है। यह अपने उच्च साक्षरता दर और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
​10. अर्जेंटीनी (Argentinian)
​दक्षिण अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा देश। यह अपने 'पम्पास' (घास के मैदान), टैंगो नृत्य और महान फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।
 



1
वेनेजुएला समाज
(प्रउत आधारित विकास मॉडल) 
​वेनेजुएला वर्तमान में अत्यधिक मुद्रास्फीति और तेल पर निर्भरता की चुनौतियों से जूझ रहा है। प्रउत का मॉडल इसे 'विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था' की ओर ले जाने का प्रस्ताव देता है।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "आत्मनिर्भर ब्लॉक" (Socio-Economic Units)
प्रउत के अनुसार, अर्थव्यवस्था को बाहरी शक्तियों के नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए।
​कृषि सहकारी समितियाँ (Agro-Cooperatives): वेनेजुएला की उपजाऊ भूमि पर मक्का, चावल और कॉफी के लिए सहकारी खेती। किसानों को केवल उपज का अधिकार नहीं, बल्कि प्रसंस्करण (Processing) इकाइयों का स्वामित्व भी दिया जाए।
​तेल राजस्व का विविधीकरण: तेल से होने वाली आय को सीधे 'बुनियादी ढांचे' और 'लघु उद्योगों' में निवेश करना, न कि केवल आयातित वस्तुओं पर।
​स्थानीय मुद्रा प्रणाली: राष्ट्रीय मुद्रा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर व्यापार विनिमय के लिए साख (Credit) प्रणाली शुरू करना ताकि वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।

​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "न्यूनतम आवश्यकता गारंटी"
​समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जीवन की पाँच मूलभूत आवश्यकताएं सुनिश्चित करना:
​भोजन, वस्त्र और आवास : 'शहरी कृषि' (Urban Farming) को बढ़ावा देना ताकि शहरों में रहने वाले लोग अपनी खाद्य आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनें। खाली पड़ी भूमि पर सामुदायिक आवास परियोजनाओं का निर्माण।
​शिक्षा: तकनीकी शिक्षा को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना। उदाहरण के लिए, तटीय क्षेत्रों में 'समुद्री विज्ञान' और ग्रामीण क्षेत्रों में 'उन्नत कृषि तकनीक' की अनिवार्य शिक्षा।
​चिकित्सा: प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा का मिश्रण। वेनेजुएला की समृद्ध जैव-विविधता का उपयोग करके हर्बल दवाओं के अनुसंधान केंद्र स्थापित करना। 


​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "नव्य-मानवतावाद" (Neo-Humanism)
​वेनेजुएला की संस्कृति बहुत जीवंत है, इसे संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठाकर 'नव्य-मानवतावाद' से जोड़ना :
​भाषाई और कलात्मक संरक्षण : स्थानीय स्वदेशी भाषाओं (जैसे वयू, पमोन) और संगीत (जैसे जोरोपो - Joropo) को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देना।
​सांस्कृतिक केंद्र : प्रत्येक प्रशासनिक इकाई में 'मानव जागृति केंद्र' बनाना, जहाँ योग, ध्यान और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाए। यह समाज में बढ़ते अपराध और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होगा।
​पर्यावरण संरक्षण : अमेज़न के जंगलों की सुरक्षा को 'सांस्कृतिक जिम्मेदारी' घोषित करना, न कि केवल कानूनी।








2
कोलंबियाई समाज
 (विकेंद्रीकृत विकास योजना) 
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "सहकारी औद्योगिक क्रांति"
​कोलंबिया की अर्थव्यवस्था को मुट्ठी भर कॉर्पोरेट्स के हाथ से निकालकर आम जनता के हाथों में सौंपना :
​कॉफी और कोको सहकारी नेटवर्क: कोलंबिया की विश्व प्रसिद्ध कॉफी का केवल कच्चा माल निर्यात न करके, स्थानीय स्तर पर ही 'प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग' इकाइयाँ लगाना। मुनाफा सीधा उत्पादक किसानों को मिले।
​कृषि-औद्योगिक परिसर (Agro-Industrial Complexes): गन्ने, फूलों और फलों के उत्पादन क्षेत्रों में छोटे कारखाने स्थापित करना जो कच्चे माल को अंतिम उत्पाद (जैसे जूस, इत्र, जैम) में बदल सकें।
​पर्यटन का विकेंद्रीकरण: बड़े होटलों के बजाय 'इको-विलेज' और सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देना, जिससे राजस्व सीधा स्थानीय समुदायों के पास जाए।

​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "शांति और बुनियादी सुरक्षा"
​दशकों के संघर्ष के बाद, समाज को जोड़ने के लिए प्रउत का 'न्यूनतम आवश्यकता' सिद्धांत अनिवार्य है:
​शिक्षा और कौशल: "शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए।" ग्रामीण युवाओं के लिए उन्नत कृषि और डिजिटल तकनीक के निशुल्क केंद्र।
​चिकित्सा सुरक्षा: कोलंबिया की समृद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित 'स्वदेशी चिकित्सा केंद्रों' का निर्माण। दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में मोबाइल क्लीनिक और टेली-मेडिसिन का विस्तार।
​भूमि सुधार: खाली पड़ी उपजाऊ जमीनों का उन लोगों में 'तर्कसंगत वितरण' जो वास्तव में खेती करना चाहते हैं, ताकि कोई भी परिवार आवासहीन न रहे।

​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "विविधता में एकता (Neo-Humanism)"
​कोलंबिया में अफ्रीकी, स्वदेशी (Indigenous) और स्पेनिश संस्कृतियों का संगम है :
​सांस्कृतिक विनिमय केंद्र : 'कैरिबियन' और 'पैसिफिक' तटों की लोक कलाओं, संगीत (जैसे कुम्बिया और वैलेनाटो) को संरक्षित करने के लिए सामुदायिक रेडियो और थिएटर का विकास।
​नैतिक शिक्षा : स्कूलों में 'चरित्र निर्माण' और 'अध्यात्म' (बिना किसी संप्रदाय के) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना ताकि युवा हिंसा और नशीली दवाओं के प्रभाव से दूर रहें।
​प्रकृति पूजा: एंडीज पर्वत श्रृंखला और नदियों को 'जीवित इकाई' मानकर उनके संरक्षण को एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाना।

कोलंबिया के लिए विकास का मुख्य सूत्र
​स्थानीय उत्पादन : स्थानीय उपभोग के लिए स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता।
​सहकारिता : उत्पादन और वितरण के क्षेत्रों में सहकारी समितियों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन।
​क्रय शक्ति : वेतन के बजाय लोगों की 'क्रय शक्ति' (Purchasing Power) को आर्थिक सफलता का पैमाना मानना।





3
गयाना समाज
(फ्रेंच - प्रभुत्व) 
(प्रगतिशील एवं स्वावलंबी विकास मॉडल) 

​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "अंतरिक्ष से धरती तक आत्मनिर्भरता"
​वर्तमान में यहाँ की अर्थव्यवस्था यूरोपीय अंतरिक्ष केंद्र (Kourou) पर टिकी है। प्रउत के अनुसार इसे बहुआयामी बनाना होगा:
​स्पेस-लिंक इंडस्ट्रीज : केवल रॉकेट लॉन्चिंग पैड बनने के बजाय, यहाँ छोटे उपग्रहों के पुर्जे बनाने और डेटा प्रोसेसिंग की स्थानीय इकाइयाँ स्थापित करना, जिनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।
​समुद्री संपदा का दोहन (Blue Economy) : अटलांटिक तट पर स्थित होने के कारण, मछली पकड़ने और समुद्री भोजन प्रसंस्करण (Seafood Processing) के लिए आधुनिक सहकारी समितियों का गठन।
​वन आधारित उद्योग : यहाँ का 90% हिस्सा जंगलों से ढका है। लकड़ी के फर्नीचर और औषधीय पौधों (Medicinal Plants) के टिकाऊ प्रसंस्करण केंद्र बनाना, जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना राजस्व दें।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "मूलभूत आत्मनिर्भरता"
​फ्रेंच गयाना वर्तमान में भोजन और वस्तुओं के लिए फ्रांस से होने वाले आयात पर निर्भर है। इसे बदलना अनिवार्य है :
​खाद्य संप्रभुता (Food Sovereignty) : तटीय मैदानों में चावल, फल और सब्जियों की खेती के लिए 'एग्रो-ब्लॉक' बनाना ताकि आयात पर निर्भरता खत्म हो और भोजन सस्ता हो।
​विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य सेवा : जंगलों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए 'फ्लोटिंग क्लीनिक' (नौका अस्पताल) और स्थानीय जड़ी-बूटियों पर आधारित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र।
​व्यावसायिक शिक्षा: अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में विशेषज्ञता प्रदान करने वाले स्थानीय विश्वविद्यालयों की स्थापना।

​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "अमेज़ोनियन पहचान का पुनरुत्थान"
​यहाँ की संस्कृति में अफ्रीकी, स्वदेशी और यूरोपीय तत्वों का मिश्रण है:
​जनजातीय गौरव केंद्र : 'मारून' (Maroon) और 'अमेराइंडियन' (Amerindian) संस्कृतियों की कला, बुनाई और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय और प्रशिक्षण केंद्र।
​प्राकृतिक पर्यटन (Eco-Humanist Tourism): अमेज़न के वर्षावनों को केवल 'संसाधन' नहीं बल्कि 'सांस्कृतिक धरोहर' मानकर पर्यटन को इस तरह विकसित करना कि प्रकृति का सात्विक संतुलन न बिगड़े।
​सांप्रदायिक सद्भाव : विभिन्न जातीय समूहों के बीच 'नव्य-मानवतावाद' के आधार पर सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन, जो यूरोपीय और स्थानीय पहचान के बीच की दूरी को पाट सके।
​विकास का मुख्य स्तंभ (The Pivot)
​चूंकि गयाना-फ्रेंच की जनसंख्या कम है और संसाधन अधिक, इसलिए यहाँ 'तर्कसंगत वितरण' (Rational Distribution) के सिद्धांत को कड़ाई से लागू किया जा सकता है, जिससे प्रति व्यक्ति जीवन स्तर दुनिया में सबसे ऊंचा हो सके।


4
गयाना समाज 
(संप्रभु) (पूर्व ब्रिटिश) 
(सात्विक एवं जन-केंद्रित विकास मॉडल) 
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "तेल से उर्वरता तक" (From Oil to Soil)
प्रउत का मानना है कि केवल कच्चे माल का निर्यात शोषण को जन्म देता है। अतः गयाना के लिए योजना इस प्रकार होगी:
​स्थानीय रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स : तेल को कच्चा बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर रिफाइनरी और प्लास्टिक/उर्वरक कारखाने लगाना, जिससे स्थानीय युवाओं को तकनीकी रोजगार मिले।
​धान और चीनी का सहकारी पुनरुद्धार : गयाना के तटीय क्षेत्रों में गन्ने और चावल की खेती की प्रधानता है। इन्हें 'कॉर्पोरेट' से मुक्त कर सहकारी चीनी मिलों और एग्रो-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स में बदलना।
​भारतीय-कैरिबियन व्यापार गलियारा : स्थानीय भारतीय मूल के व्यापारियों के माध्यम से लघु उद्योगों (Small Scale Industries) का जाल बिछाना जो दैनिक उपभोग की वस्तुओं का निर्माण करें।

​2. सामाजिक प्रोजेक्ट : "सबके लिए आवास और उन्नत कौशल"
​गयाना की कम जनसंख्या और बढ़ते राजस्व का लाभ सीधे जनता को मिलना चाहिए:
​आदर्श ग्राम (Model Villages) : तेल राजस्व का उपयोग करके प्रत्येक नागरिक के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले आधुनिक और सस्ते आवासों का निर्माण।
​निशुल्क उच्च शिक्षा : तकनीकी संस्थानों की स्थापना करना ताकि 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) रुके और स्थानीय लोग ही देश के तेल और गैस क्षेत्र का प्रबंधन करें।
​सात्विक स्वास्थ्य प्रणाली : गयाना की दलदली और उष्णकटिबंधीय जलवायु को देखते हुए जल-जनित रोगों के लिए उन्नत निवारक स्वास्थ्य केंद्र और मुफ्त टीकाकरण।

​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "सांस्कृतिक संगम (Samanvaya)"
​यहाँ की संस्कृति अफ्रीकी (Afro-Guyanese) और भारतीय (Indo-Guyanese) परंपराओं का सुंदर मिश्रण है:
​बहु-सांस्कृतिक संस्थान : 'नव्य-मानवतावाद' के आधार पर ऐसे केंद्र जहाँ हिंदू, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के त्योहारों और कलाओं को सामूहिक रूप से मनाया जाए, जिससे नस्लीय तनाव समाप्त हो।
​स्थानीय बोलियों का संरक्षण : भारतीय विरासत को संजोने के लिए हिंदी शिक्षा और स्थानीय संगीत (जैसे चटनी संगीत - Chutney Music) को बढ़ावा देना।
​नदी संस्कृति का सम्मान : गयाना का अर्थ ही 'जल की भूमि' है। एसेक्विबो (Essequibo) जैसी विशाल नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना और उन्हें सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बनाना।
​विकास का मूल मंत्र
​गयाना के लिए प्रउत का संदेश है— 
"प्राकृतिक संसाधनों पर समाज का सामूहिक स्वामित्व।" यहाँ के तेल भंडार कुछ नेताओं या कंपनियों की संपत्ति न होकर पूरे 'गयाना समाज' की उन्नति का आधार बनने चाहिए।






5
ब्राजीलियाई समाज
(प्रगतिशील एवं संतुलित विकास मॉडल) 
​ब्राजील में संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन धन का संकेंद्रण बहुत अधिक है। प्रउत का मॉडल यहाँ 'आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने पर केंद्रित होगा।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "विकेंद्रीकृत कृषि-औद्योगिक क्रांति"
​ब्राजील दुनिया का 'फूड बास्केट' है, लेकिन यहाँ छोटे किसान हाशिए पर हैं।
​एग्रो-इंडस्ट्रियल ब्लॉक्स : ब्राजील के सोयाबीन, गन्ना और मक्का क्षेत्रों में बड़ी कंपनियों के बजाय सहकारी प्रोसेसिंग प्लांट लगाना। उदाहरण के लिए, गन्ने से इथेनॉल बनाने का अधिकार स्थानीय सहकारी समितियों को हो।
​अमेज़न 'ग्रीन' इकोनॉमी : वनों को काटे बिना रबर, मेवे (Brazil Nuts) और औषधियों के टिकाऊ संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए लघु उद्योग स्थापित करना।
​स्थानीय उत्पादन और उपभोग : 'ब्राजीलियाई समाज' की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में आवश्यक वस्तुओं (कपड़ा, जूते, बुनियादी मशीनरी) के उत्पादन को प्राथमिकता देना ताकि आयात पर निर्भरता कम हो।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "पाँच मूलभूत आवश्यकताओं का अधिकार"
​ब्राजील की 'फावेला' (झुग्गी-बस्तियां) और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने के लिए:
​शहरी पुनर्विकास और आवास : झुग्गी बस्तियों को 'को-ऑपरेटिव हाउसिंग' में बदलना जहाँ स्वच्छ जल, बिजली और इंटरनेट की सुविधा मुफ्त या नाममात्र दर पर हो।
​सात्विक शिक्षा: ब्राजील की युवा शक्ति को नैतिकता और कौशल (Skill Development) आधारित शिक्षा देना, जिसमें 'नव-मानवतावाद' का पाठ अनिवार्य हो।
​सार्वजनिक स्वास्थ्य : आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ प्राकृतिक चिकित्सा केंद्रों का जाल बिछाना, जो अमेज़न की समृद्ध जड़ी-बूटियों का शोध और उपयोग करें।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "नव-मानवतावादी गौरव"
​ब्राजील की संस्कृति 'विविधता' का उत्सव है, जिसे आध्यात्मिक दिशा देना आवश्यक है:
​सांस्कृतिक सुरक्षा : अफ्रीकी, यूरोपीय और स्वदेशी मूल की कलाओं (जैसे कैपोइरा, सांबा) को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता और शारीरिक अनुशासन के रूप में विकसित करना।
​पारिस्थितिकी के प्रति अध्यात्म: प्रकृति को 'परम पुरुष' की अभिव्यक्ति मानकर अमेज़न और पैंटानल जैसे पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा करना। यहाँ के स्वदेशी समुदायों को "जंगलों का रक्षक" घोषित कर उन्हें सम्मानजनक मानदेय देना।
​योग और ध्यान केंद्र : प्रत्येक समुदाय में सामुदायिक योग केंद्र स्थापित करना ताकि समाज में नशीली दवाओं और अपराध की प्रवृत्ति को कम किया जा सके।
​विकास का मूल सिद्धांत
​ब्राजील के लिए प्रउत का सूत्र है— 
"अधिकतम उपयोग और तर्कसंगत वितरण" (Maximum Utilization and Rational Distribution)। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग मुट्ठी भर लोगों के लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता और जीव-जगत के कल्याण के लिए होना चाहिए।









6
क्वेशुआ समाज
(प्रगतिशील एवं स्वदेशी पुनरुत्थान मॉडल) 
प्रउत के अनुसार, क्वेशुआ समाज को उनकी प्राचीन गौरवशाली विरासत (इंका सभ्यता) और आधुनिक तकनीक के मेल से पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "पर्वतीय स्वावलंबन"
​क्वेशुआ लोग कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहते हैं, इसलिए उनकी अर्थव्यवस्था 'विकेंद्रीकृत' होनी चाहिए :
​टेरेस फार्मिंग सहकारी समितियाँ : एंडीज की सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming) को आधुनिक सिंचाई और जैविक उर्वरकों से उन्नत करना। 'क्विन्वा' (Quinoa) और आलू की स्थानीय प्रजातियों के प्रसंस्करण के लिए सहकारी इकाइयाँ लगाना।
​अल्पाइन पशुपालन (Alpaca & Llama) : अल्पाका ऊन के उत्पादन और उससे बने उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों के निर्यात के लिए 'क्वेशुआ टेक्सटाइल क्लस्टर' बनाना, ताकि लाभ बिचौलियों के पास न जाए।
​स्वदेशी पर्यटन (Ethno-Tourism): पर्यटन का प्रबंधन स्थानीय समुदायों के हाथ में हो, जहाँ सैलानी क्वेशुआ जीवनशैली और इंका इतिहास को करीब से देख सकें।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "पाचमामा (Pachamama) की सेवा"
​क्वेशुआ संस्कृति में धरती को 'पाचमामा' (Mother Earth) कहा जाता है। सामाजिक योजना इसी भाव पर आधारित होगी:
​स्थानीय द्विभाषी शिक्षा : शिक्षा क्वेशुआ और स्पेनिश दोनों भाषाओं में हो, जिसमें प्राचीन 'इंका इंजीनियरिंग' और आधुनिक विज्ञान का समावेश हो।
​सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : एंडीज की दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर आधारित चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक निदान (Diagnosis) के साथ जोड़ना।
​पहाड़ी बुनियादी ढांचा : दुर्गम क्षेत्रों में सौर और पवन ऊर्जा के छोटे ग्रिड स्थापित करना ताकि प्रत्येक घर तक ऊर्जा की पहुंच हो।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "नव्य-मानवतावाद और गौरव"
​सांस्कृतिक सुरक्षा: क्वेशुआ भाषा, संगीत और उनके 'चाकना' (Andean Cross) जैसे प्रतीकों को संरक्षित करना। 'अध्यात्म' को उनके प्रकृति-प्रेम के साथ जोड़कर 'नव-मानवतावाद' का प्रसार करना।
​सामुदायिक न्याय (Ayllu System): उनके प्राचीन 'अयलु' (Ayllu) सामाजिक ढांचे को आधुनिक सहकारी कानूनों के साथ समन्वयित करना, जहाँ निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाएं।
​आध्यात्मिक केंद्र : ऊंचे पर्वतीय शिखरों पर साधना और योग केंद्र बनाना, जो क्वेशुआ लोगों की अंतर्निहित आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करें।
​विकास का मूल सूत्र
​क्वेशुआ समाज के लिए प्रउत का मंत्र है— "प्रकृति के साथ तालमेल और सामूहिक प्रगति।" यह मॉडल उन्हें वैश्विक बाजार की शोषणकारी प्रवृत्तियों से बचाकर एक आत्मनिर्भर 'सांस्कृतिक ब्लॉक' के रूप में स्थापित करेगा।
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गुआरानी (Guarani)
(प्रगतिशील एवं सामुदायिक सशक्तिकरण मॉडल) 
​गुआरानी समाज का मूल मंत्र "तेको पोरा" (Teko Porã) यानी "शुद्ध जीवन" है, जो प्राउट के 'सात्विक जीवन' और 'नव्य-मानवतावाद' से पूरी तरह मेल खाता है।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "पारंपरिक ज्ञान आधारित सहकारिता"
​गुआरानी लोग वनों और जल संसाधनों के संरक्षण में कुशल हैं:
​येरबा मेट (Yerba Mate) सहकारी समितियाँ : 'येरबा मेट' गुआरानी संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और वैश्विक विपणन (Marketing) के लिए स्थानीय सहकारी समितियां बनाना, ताकि मुनाफा सीधा समुदाय को मिले।
​पारिस्थितिकी-आधारित उद्योग (Eco-Industries) : वनों की कटाई किए बिना शहद, औषधीय पौधों और प्राकृतिक रंगों के उत्पादन के लिए लघु इकाइयों की स्थापना।
​सीमा पार व्यापार ब्लॉक : चूंकि गुआरानी कई देशों में फैले हैं, प्राउट यहाँ एक 'मुक्त सांस्कृतिक-आर्थिक क्षेत्र' बनाने का सुझाव देता है जहाँ वे अपनी वस्तुओं का विनिमय बिना जटिल सीमाओं के कर सकें।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "सामुदायिक सुरक्षा और शिक्षा"
​गुआरानी-केंद्रित शिक्षा : गयाना या अन्य क्षेत्रों की तरह यहाँ भी शिक्षा 'गुआरानी' भाषा में होनी चाहिए। पाठ्यक्रम में उनके पारंपरिक खगोल विज्ञान और जड़ी-बूटी ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा जाए।
​स्वच्छ जल और स्वास्थ्य : 'गुआरानी जलभृत' (Guarani Aquifer) दुनिया के सबसे बड़े मीठे पानी के स्रोतों में से एक है। इस जल पर पहला अधिकार स्थानीय गुआरानी समुदायों का हो और इसे प्रदूषण मुक्त रखने की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए।
​भूमि अधिकार: प्राउट के अनुसार, भूमि का स्वामित्व उन लोगों के पास होना चाहिए जो उस पर रहते हैं और उसे संवारते हैं। गुआरानी समुदायों को उनके पैतृक क्षेत्रों में 'सामुदायिक पट्टा' (Community Title) देना।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "शुद्ध जीवन (Teko Porã) और अध्यात्म"
​सांस्कृतिक स्वायत्तता: गुआरानी भाषा को राजकीय सम्मान देना (जैसे पराग्वे में है) और उनके 'पवित्र गीतों' व नृत्यों को 'विश्व धरोहर' के रूप में संरक्षित करना।
​नव-मानवतावादी प्रशिक्षण: उनके 'प्रकृति प्रेम' को 'विश्व-बंधुत्व' की भावना में बदलना। सामूहिक प्रार्थना और साधना केंद्रों (Tapyi) का आधुनिकीकरण करना जहाँ योग और ध्यान का अभ्यास हो सके।
​पर्यावरण के संरक्षक: गुआरानी युवाओं को 'पर्यावरण सेना' के रूप में प्रशिक्षित करना, जो अपने क्षेत्रों की जैव-विविधता की रक्षा के लिए आधुनिक तकनीक (ड्रोन, सेंसर) का उपयोग करें।

विकास का मूल सिद्धांत
​गुआरानी समाज के लिए प्राउट का मंत्र है— "सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करते हुए आर्थिक स्वावलंबन।" यह मॉडल उन्हें बड़े उद्योगों के शोषण से बचाकर अपनी शर्तों पर आधुनिक समाज के साथ जुड़ने का मौका देगा।











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चिलियन समाज
 (प्रगतिशील एवं संतुलित विकास मॉडल) 
​चिली में वर्तमान में आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती है। प्राउट का मॉडल यहाँ 'संसाधनों के समाजीकरण' और 'पारिस्थितिक संतुलन' पर केंद्रित होगा।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट: "खनिज से मानवीय प्रगति तक"
​चिली दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक है, लेकिन इसका लाभ विदेशी कंपनियों को अधिक मिलता है।
​खनिज सहकारी समितियाँ (Mineral Co-ops) : तांबा और लिथियम के खनन में केवल निजी क्षेत्र का प्रभुत्व न हो। लाभ का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय 'सामाजिक-आर्थिक इकाई' (Samaj) को मिले ताकि वे अपने स्कूलों और अस्पतालों का वित्तपोषण कर सकें।
​फलों और वाइन का मूल्यवर्धन (Value Addition) : चिली के अंगूर और सेब पूरी दुनिया में जाते हैं। कच्चे फल के बजाय 'फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स' को सहकारी आधार पर चलाना ताकि किसानों को अंतिम उत्पाद की कीमत का हिस्सा मिले।
​अक्षय ऊर्जा हब: अटाकामा रेगिस्तान में दुनिया की सबसे अच्छी सौर ऊर्जा क्षमता है। यहाँ 'सामुदायिक सौर पार्क' बनाना जो बिजली बेचकर स्थानीय गांवों के लिए राजस्व पैदा करें।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "शिक्षा और स्वास्थ्य का सार्वभौमीकरण"
​निशुल्क उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा : चिली में शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ बड़े आंदोलन हुए हैं। प्राउट यहाँ 'निशुल्क और नैतिक शिक्षा' का प्रस्ताव देता है जो कॉर्पोरेट हितों के बजाय मानवता की सेवा पर आधारित हो।
​पर्वतीय और तटीय स्वास्थ्य नेटवर्क : चिली की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, एंडीज के पहाड़ों और प्रशांत तट के गांवों के लिए विशेष 'हेली-एम्बुलेंस' और 'टेली-मेडिसिन' सहकारी नेटवर्क का निर्माण।
​सामाजिक सुरक्षा : प्रत्येक वृद्ध और विकलांग नागरिक के लिए न्यूनतम क्रय शक्ति की गारंटी देना।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "सांस्कृतिक सुरक्षा और नव्य-मानवतावाद"
​मापुचे (Mapuche) सम्मान : चिली के मूल निवासी 'मापुचे' के अधिकारों और उनकी संस्कृति को संवैधानिक रूप से 'नव-मानवतावाद' के ढांचे में सुरक्षित करना।
​कला और साहित्य‌ : पाब्लो नेरुदा और गैब्रिएला मिस्ट्रल जैसे महान साहित्यकारों की धरती पर 'सामुदायिक पुस्तकालयों' और 'लेखक केंद्रों' की स्थापना करना जो समाज में बौद्धिक जागरण लाएं।
​समुद्री पर्यावरण संरक्षण : प्रशांत महासागर के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए 'सात्विक मत्स्य पालन' (Sustainable Fishing) को बढ़ावा देना, जहाँ समुद्र को 'संसाधन' नहीं बल्कि 'जीवनदाता' माना जाए।
​विकास का मूल सूत्र
​चिली के लिए प्रउत का मंत्र है— "प्रकृति के उपहारों का सामूहिक भोग और भविष्य के लिए संरक्षण।" यह योजना चिली को केवल एक 'खनिज निर्यातक' देश से बदलकर एक 'संपन्न और न्यायपूर्ण समाज' में बदल देगी।

9
उरुग्वेयन समाज
 (प्रगतिशील एवं नीति-आधारित विकास मॉडल) 
​उरुग्वे में पहले से ही मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचा है। प्राउट इसे भौतिकवाद से ऊपर उठाकर 'सात्विक चेतना' की ओर ले जाने का प्रस्ताव देता है।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट : "सहकारी कृषि और हरित ऊर्जा"
​पशुपालन और डेयरी सहकारिता : उरुग्वे की अर्थव्यवस्था मांस और ऊन पर आधारित है। प्राउट के अनुसार, यहाँ 'एग्रो-डेयरी ब्लॉक्स' बनाए जाने चाहिए जहाँ किसान स्वयं प्रसंस्करण इकाइयों (Processing Plants) के मालिक हों, न कि बड़े कॉर्पोरेट्स।
​सॉफ्टवेयर और ज्ञान उद्योग : उरुग्वे दक्षिण अमेरिका का सॉफ्टवेयर हब है। यहाँ 'आईटी सहकारी समितियाँ' बनाई जाएँ ताकि छोटे डेवलपर्स मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और मुनाफे का समान वितरण हो।
​ऊर्जा स्वावलंबन : उरुग्वे ने पवन ऊर्जा में बड़ी प्रगति की है। प्रउत यहाँ 'ग्राम-स्तरीय माइक्रो-ग्रिड' का सुझाव देता है जिससे बिजली का खर्च शून्य हो सके और स्थानीय उद्योगों को बल मिले।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट : "जीवन की गुणवत्ता से जीवन की सार्थकता तक"
​न्यूनतम आवश्यकता से ऊपर : उरुग्वे में बुनियादी जरूरतें काफी हद तक पूरी हैं। प्रउत यहाँ 'क्रय शक्ति में निरंतर वृद्धि' पर ध्यान केंद्रित करेगा ताकि लोग उच्च बौद्धिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए समय निकाल सकें।
​एकीकृत स्वास्थ्य सेवा : आधुनिक चिकित्सा के साथ 'मानसिक स्वास्थ्य' और 'योग उपचार' को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाना, ताकि बढ़ते तनाव और अकेलेपन को कम किया जा सके।
​सद्विप्र (Sadvipra) प्रशिक्षण : उरुग्वे की राजनीतिक स्थिरता का लाभ उठाकर ऐसे 'नैतिक नेतृत्व' केंद्रों की स्थापना करना जो समाज को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करें।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट: "नव-मानवतावाद और गौचो (Gaucho) विरासत"
​गौचो संस्कृति का सात्विक रूप : उरुग्वे के पारंपरिक चरवाहों (Gauchos) की निडरता और सरलता को 'नव्य-मानवतावाद' के साथ जोड़ना, जो केवल मनुष्यों से नहीं बल्कि पशुओं और पर्यावरण से भी प्रेम सिखाता है।
​सांस्कृतिक सुरक्षा : फुटबॉल और टैंगो (Tango) जैसे सांस्कृतिक तत्वों को व्यावसायिकता से बचाकर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य और आनंद का साधन बनाना।
​विश्व बंधुत्व केंद्र : उरुग्वे को 'विश्व शांति केंद्र' के रूप में विकसित करना, जहाँ विभिन्न देशों के लोग आकर 'प्राउट' और 'अध्यात्म' के सिद्धांतों पर शोध कर सकें।
विकास का मूल सूत्र
​उरुग्वे के लिए प्राउट का मंत्र है— "बौद्धिक उत्कर्ष और आध्यात्मिक आनंद।" उरुग्वे जैसे छोटे और शिक्षित देश में प्राउट का 'आदर्श समाज' (Ideal Society) सबसे पहले स्थापित किया जा सकता है

10
 अर्जेंटीनी समाज
 (प्रगतिशील एवं आत्मनिर्भर विकास मॉडल) 
​अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था को बाहरी ऋणदाताओं (IMF आदि) से मुक्त कर स्थानीय लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) पर केंद्रित करना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
​1. आर्थिक प्रोजेक्ट : "पम्पास से समृद्धि तक"
​एग्रो-इंडस्ट्रियल टाउनशिप : अर्जेंटीना के विशाल घास के मैदानों (Pampas) में केवल कच्चा अनाज या मांस निर्यात करने के बजाय, वहां सहकारी खाद्य प्रसंस्करण शहर बसाना। यहाँ आटा, पास्ता, चमड़े के उत्पाद और डेयरी का उत्पादन हो और मुनाफा स्थानीय उत्पादकों को मिले।
​विकेंद्रीकृत बैंकिंग (Social Banking) : बड़ी कॉर्पोरेट बैंकों के बजाय सामुदायिक बैंकों की स्थापना करना, जो स्थानीय उद्योगों को कम ब्याज पर ऋण दें ताकि पैसा देश से बाहर न जाए।
​स्वदेशी तकनीकी उद्योग : अर्जेंटीना के पास अच्छी वैज्ञानिक क्षमता है। यहाँ कृषि मशीनरी और उपग्रह तकनीक के लिए 'श्रमिक-स्वामित्व वाले' (Worker-owned) कारखानों को बढ़ावा देना।
​2. सामाजिक प्रोजेक्ट: "आर्थिक न्याय और सुरक्षा"
​मुद्रास्फीति का समाधान (Indexed Wages) : प्रउत के अनुसार, वेतन को वस्तुओं की कीमतों (Price Index) के साथ जोड़ना ताकि मुद्रास्फीति बढ़ने पर भी आम आदमी की क्रय शक्ति कम न हो।
​ग्रामीण पुनरुद्धार : शहरों (जैसे ब्यूनस आयर्स) पर बोझ कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएं—बिजली, इंटरनेट, और सात्विक चिकित्सा—पहुँचाना ताकि 'रिवर्स माइग्रेशन' (शहर से गांव की ओर) शुरू हो सके।
​बुनियादी आवश्यकता का संवैधानिक अधिकार : भोजन, कपड़ा, आवास, चिकित्सा और शिक्षा को कानूनन अनिवार्य बनाना, जैसा कि PSS का भी उद्देश्य है।
​3. सांस्कृतिक प्रोजेक्ट : "नव्य-मानवतावाद और गौरव"
​टैंगो और लोक कला का आध्यात्मिक पक्ष : अर्जेंटीना की कलाओं को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक विकास और एकाग्रता के माध्यम से 'साधना' से जोड़ना।
​बहु-जातीय सद्भाव : यूरोपीय और मूल निवासी (Indigenous) समुदायों के बीच 'नव्य-मानवतावाद' के आधार पर सांस्कृतिक एकता स्थापित करना, जहाँ नस्ल से ऊपर उठकर 'मानव मात्र एक है' का भाव हो।
​पारिस्थितिकी चेतना : पेटागोनिया (Patagonia) के ग्लेशियरों और वनों की रक्षा के लिए 'पारिस्थितिकी-केंद्रित' जीवनशैली को शिक्षा का हिस्सा बनाना।
​विकास का मूल सिद्धांत
​अर्जेंटीना के लिए प्रउत का मंत्र है— "बाहरी कर्ज से मुक्ति और आंतरिक शक्ति का जागरण।”

करण सिंह राजपुरोहित
प्रकाशन सचिव
प्राउटिस्ट सर्व समाज
9982322405








प्रउत की हुंकार - 3 जनवरी शनिवारी

https://docs.google.com/document/d/1HvIKjhdqDdyEEyoFX9PzRIiouNOuqbKM5BpA1ES-F4s/edit?usp=drivesdk


आचार्य दिलीप सिंह सागर
                  चैयरमेन, PSS








बिहार विशेषांक : नव-बिहार का उदय


विषय: आदर्श बिहार - प्रगतिशील एवं आत्मनिर्भर सामाजिक-आर्थिक इकाइयां
बिहार की नियति बदलने का समय आ गया है
आज भारतवर्ष का सबसे पिछड़ा हुआ लेकिन सबसे जागरूक राज्य बिहार है। किसी युग में बिहार भारतवर्ष का दिल था और उसकी धड़कन से पूरे आर्यावर्त में जीवन का संचार होता था। आज बिहार पुनः अपनी उसी ऊर्जा को समेटकर अंगड़ाई ले रहा है। प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) का मानना है कि बिहार की गरीबी का कारण संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि केंद्रीयकृत आर्थिक नीतियां और नैतिक नेतृत्व का अभाव है।

        बिहार को चार आत्मनिर्भर
प्राउट (प्रगतिशील उपयोग तत्व) के सिद्धांतों के आधार पर हमने बिहार को चार आत्मनिर्भर इकाइयों में विभाजित कर विकास का एक संपूर्ण 'ब्लूप्रिंट' तैयार किया है।




​अंगिका समाज : पूर्वी भारत का आर्थिक सेतु

​क्षेत्र : अररिया, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया, आलमनगर (मधेपुरा) और हलसी (लखीसराय)।
​औद्योगिक क्रांति : भागलपुर को 'ग्लोबल सिल्क हब' के रूप में पुनर्जीवित किया जाएगा। पूर्णिया और कटिहार की जूट बेल्ट में 'गोल्डन फाइबर' आधारित अत्याधुनिक कारखाने लगेंगे।
​संसाधन उपयोग : मुंगेर के इंजीनियरिंग कौशल को लघु रक्षा उद्योगों और तकनीकी नवाचार से जोड़ा जाएगा।
​विशेष : किशनगंज के साथ समन्वय कर सीमावर्ती व्यापार को सुदृढ़ किया जाएगा। 


2. मिथिला समाज : मेधा और समृद्धि का संगम 

क्षेत्र: सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, समस्तीपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, शिवहर और सीतामढ़ी।
​जल-अर्थव्यवस्था: मखाना, मछली और जलीय पौधों के प्रसंस्करण के लिए दरभंगा को केंद्र बनाकर 'कोसी-कमला आर्थिक क्षेत्र' बनाया जाएगा।
​सांस्कृतिक गौरव: सीतामढ़ी और मधुबनी को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाकर स्थानीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
​बौद्धिक केंद्र: मुजफ्फरपुर और दरभंगा को 'मैक्रो-एजुकेशन जोन' के रूप में विकसित किया जाएगा।

3. प्रगतिशील मगही समाज : ज्ञान और विज्ञान की धुरी

 क्षेत्र: पटना, अरवल, औरंगाबाद, जहानाबाद, गया, नालंदा, लखीसराय, शेखपुरा, सिकंदरा (जमुई) और नवादा।
आध्यात्मिक व शैक्षिक विकास: नालंदा और बोधगया को वैश्विक ज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा।
कृषि सुधार: मगध के पठारी और मैदानी क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक जल संचयन और दलहन-तिलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना होगी।
प्रशासनिक विकेंद्रीकरण: सत्ता का केंद्र 'जनता' होगी, पटना केवल समन्वय का केंद्र रहेगा।

4. प्रगतिशील भोजपुरी समाज: उत्पादन और शौर्य की भूमि 
क्षेत्र: पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, रोहतास और भभुआ।
, ​कृषि-आधारित उद्योग: चंपारण की चीनी मिलों और रोहतास-बक्सर की चावल मिलों को सहकारी मॉडल (Co-operative Model) पर विकसित कर किसानों को मालिक बनाया जाएगा।
​पर्यटन: वीर कुंवर सिंह की शौर्य गाथा और चंपारण के सत्याग्रह को आधार बनाकर 'राष्ट्रवाद पर्यटन' का विकास।
​पलायन पर प्रहार: यहाँ की विशाल श्रम शक्ति के लिए स्थानीय स्तर पर भारी और मध्यम उद्योगों का निर्माणश
5. हमारा संकल्प: आत्मनिर्भर बिहार के 5 सूत्र

                बिहार का प्रगति पुरुष
 तात्विक सुशील रंजन
​विकेंद्रीकरण: प्रत्येक ब्लॉक (इकाई) अपनी आर्थिक योजना खुद बनाएगी। दिल्ली या पटना से थोपी गई योजनाएं बंद होंगी।
​क्रय शक्ति में वृद्धि: हमारा लक्ष्य प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना नहीं, बल्कि हर हाथ को काम और हर व्यक्ति की 'क्रय शक्ति' (Purchasing Power) बढ़ाना है।
​न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति: भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और शिक्षा पर हर बिहारी का जन्मसिद्ध अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
​सहकारी समाज: पूंजीवाद के शोषण और साम्यवाद के जड़त्व को समाप्त कर 'सहकारी खेती' और 'सहकारी उद्योग' की स्थापना।
​नैतिक नेतृत्व (सद्विप्र) : बिहार का नेतृत्व अब स्वार्थी नेता नहीं, बल्कि नैतिकवान प्राउटिस्ट करेंगे।

राजनैतिक लोकतंत्र में लड़खड़ाता बिहार: प्रउत के आर्थिक लोकतंत्र से सुनहरा भविष्य
​बिहार की धरती ने सदा विश्व का मार्गदर्शन किया है, परंतु आधुनिक राजनैतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो विकास की धारा कहीं न कहीं राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं और दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों में उलझी नजर आती है।
​1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अस्तित्व और विभाजन
​बिहार का आधुनिक सफर 1905 में बंगाल विभाजन के साथ शुरू हुआ। 1936 में उड़ीसा और फिर वर्ष 2000 में झारखंड के अलग होने से बिहार ने न केवल अपना भूभाग खोया, बल्कि खनिज संपदा का बड़ा हिस्सा भी खो दिया। इन विभाजनों ने बिहार को एक शुद्ध कृषि प्रधान राज्य बना दिया, जिसे एक नए आर्थिक मॉडल की आवश्यकता थी।
​2. बिहार की राजनीति के विभिन्न पड़ाव और विकास की स्थिति
​कांग्रेस युग (1947 से 1990 तक):
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) और डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह की जोड़ी ने बिहार के निर्माण में महती भूमिका निभाई। यह वह समय था जब बड़े उद्योगों (बरौनी, हटिया) की नींव रखी गई। परंतु 1967, 1970 और 1977 की राजनैतिक अस्थिरता ने निरंतरता को भंग किया। सत्ता के केंद्रीकरण के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जड़ें कमजोर होने लगीं।
​लालू प्रसाद यादव युग (1990 से 2005 तक श) :
इस काल में 'सामाजिक न्याय' और 'स्वर' तो मिला, लेकिन विकास की गति थम गई। औद्योगिक पलायन शुरू हुआ और बुनियादी ढांचा चरमरा गया। आर्थिक लोकतंत्र की अनुपस्थिति में सामाजिक न्याय केवल राजनैतिक सशक्तिकरण तक सीमित रह गया।
​नीतीश कुमार युग (2005 से अब तक):
'सुशासन' के नाम पर सड़कों और बिजली में सुधार तो दिखा, लेकिन रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों में बिहार पिछड़ता गया। सरकारी अनुदान पर निर्भरता बढ़ी, जिससे आत्मनिर्भर बिहार का सपना अधूरा रहा।
​भाजपा की अधूरी महत्वाकांक्षा:
जनसंघ के समय से लेकर वर्तमान गठबंधन की राजनीति तक, भाजपा ने सत्ता में भागीदारी तो की, लेकिन बिहार के लिए कोई मौलिक 'बिहार मॉडल' प्रस्तुत करने के बजाय केंद्रीय योजनाओं पर ही निर्भर रही।
​3. समाधान: प्रउत (PROUT) का आर्थिक लोकतंत्र
​राजनैतिक लोकतंत्र की इन विफलताओं के बीच प्रउत (Progressive Utilization Theory) एक वैकल्पिक और वैज्ञानिक मार्ग प्रशस्त करता है। प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) का मानना है कि जब तक आर्थिक सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं होगा, बिहार का पूर्ण उत्थान असंभव है।
​प्रउत के माध्यम से बिहार का पुनरुद्धार:
​विकेंद्रीकृत नियोजन (Decentralized Planning): प्रउत के अनुसार विकास का केंद्र पटना नहीं, बल्कि 'ब्लॉक' होना चाहिए। बिहार के प्रत्येक जिले की अपनी विशिष्टता है (जैसे मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर का सिल्क)। वहीं के कच्चे माल से वहीं उद्योग लगने चाहिए।
​सहकारी खेती और उद्योग: बिहार की छोटी जोत वाली खेती का समाधान 'सहकारी कृषि' है। किसानों को बीज से लेकर बाजार तक की श्रृंखला में भागीदार बनाकर उनकी क्रय शक्ति बढ़ानी होगी।
​पलायन पर पूर्ण विराम: जब आर्थिक लोकतंत्र के तहत स्थानीय लोगों को रोजगार की गारंटी मिलेगी, तो बिहार की प्रतिभा को दूसरे राज्यों में जाकर अपमानित नहीं होना पड़ेगा।
'सबको काम और सबको सम्मान: प्रउत का मुख्य उद्देश्य 'सबको काम और सबको सम्मान' है। भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और शिक्षा पर हर बिहारी का जन्मसिद्ध अधिकार सुनिश्चित करना ही सच्चा लोकतंत्र है।
​बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन भविष्य केवल राजनैतिक नारों से नहीं संवरेगा। प्राउटिस्ट सर्व समाज जिस आर्थिक लोकतंत्र की बात कर रहा है, वही बिहार को 'बिमारू' राज्य की श्रेणी से निकालकर एक खुशहाल प्रदेश बना सकता है।
​राजनैतिक लोकतंत्र ने हमें केवल 'मत' देने का अधिकार दिया है, लेकिन प्रउत का आर्थिक लोकतंत्र हमें 'भात' (रोटी) और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी देगा। यही बिहार का सुनहरा भविष्य है।

              👉 छपते-छपते...
​✍️ अध्यक्ष जी की कलम से : बिहार की नियति बदल सकती है 'जल नीति’
बिहार का एक बड़ा हिस्सा प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु में नेपाल से आने वाली नदियों के रौद्र रूप और बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर है। प्रकृति की इस त्रासदी को अवसर में बदलने के लिए अब पारंपरिक सोच से हटकर ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।
​नहरों का जाल: कृषि और सुरक्षा का संगम
हमारी प्राथमिकता इन नदियों के अतिरिक्त जल को बड़ी और सुनियोजित नहरों के माध्यम से पूरे बिहार में प्रवाहित करने की होनी चाहिए। यह 'कैनाल नेटवर्क' न केवल हर मौसम में कृषि के लिए सिंचाई सुनिश्चित करेगा, बल्कि जल प्रबंधन के जरिए बाढ़ की समस्या को भी काफी हद तक नियंत्रित कर सकेगा। जब बिहार के हर खेत तक अपनी नहर होगी, तब किसान मानसून की अनिश्चितता से मुक्त होकर आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ेगा।
​रोडवेज नहीं, 'वाटरवेज' है भविष्य
वर्तमान समय में बिहार को केवल एक्सप्रेस रोडवेज की ही नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक 'वॉटरवेज' (जलमार्गों) की आवश्यकता है। ये बड़ी नहरें केवल सिंचाई का साधन मात्र नहीं, बल्कि यातायात और माल ढुलाई का एक सस्ता और सुगम विकल्प भी बनेंगी।
​हॉलैंड की 'डाइक व्यवस्था' से प्रेरणा
बिहार को जल प्रबंधन के लिए हॉलैंड (नीदरलैंड्स) की प्रसिद्ध 'डाइक व्यवस्था' (Dyke System) और वहां की जल-यातायात नीति को अपनाने की जरूरत है। यदि हम आधुनिक तकनीक और दूरदर्शी योजना के साथ अपनी नदियों को जोड़ते हैं, तो बिहार को जल-संकट और बाढ़, दोनों से स्थायी मुक्ति मिल सकती है।
​"बिहार की खुशहाली का रास्ता खेतों की मेड़ से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जल प्रबंधन की नहरों से होकर गुजरता है।”
आह्वान :
बिहार के अंदर आज भी वही क्षमता और ऊर्जा विद्यमान है जिसके बल पर "आदर्श बिहार : प्रगतिशील बिहार" का आलोक फैलेगा। आओ हम सब मिलकर इस महायज्ञ में अपनी आहुति दें।

करण सिंह राजपुरोहित
जनसंपर्क और प्रकाशन सचिव एवं प्रवक्ता, प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) भारतवर्ष 
आनन्द नगर से‌ प्राउटिस्टों की हुंकार
पुरानी यादें… … . 
डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह का सपना : - विश्व के सभी बिखरे हुए प्राउटिस्टों, प्रगतिशील विचारकों, एवं नैतिकवादी को एक कर …..
“विश्व के नैतिकवादी एक हो” 
आदर्श व आप्त वाक्य को सिद्ध करना
श्री प्रभात रंजन सरकार जिन्दाबाद जिन्दाबाद









मीडिया सचिव श्री कृपा शंकर चौधरी के सहयोग से






प्राउटिस्ट सर्व समाज सेवाकेन्द्र की झलकियाँ