ब्रज समाज का इतिहास
ब्रज की धरती को नमन करते ब्रज समाज की प्रगति का अध्याय लिखते है। ब्रज भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता का विकास सृष्टि के उषाकाल से ही माना जाता है। वैदिक काल में यह तपोवन का केंद्र था। ब्रज शब्द संस्कृत भाषा व्रज से आया है। जिसका अर्थ होता है। गौ के अधिष्ठात्री भूमि। तंत्र में गौ शब्द का अर्थ इंन्द्रि बताया गया है। वैदिक युग में गौ शब्द गाय के लिए प्रयुक्त होने लगा इसलिए ब्रज भूमि को गाय के विचरण की भूमि गोचर कहा गया है। अवध राम केन्द्रित संस्कृति है जबकि ब्रज कृष्ण प्रधान संस्कृति है।
*ब्रज समाज का संगठन*
ब्रज समाज की एक केन्द्रीय इकाई होगी जो अपने मुख्यालय से सांस्कृतिक व आर्थिक नीति का निर्माण करेंगी। इनका सहयोग करने के लिए चार प्रांतीय इकाइयां भी होगी। उसके अधीन भुक्ति उपभुक्ति व गाँव इकाइयां होगी।
A. *ब्रज समाज की उत्तर प्रदेश प्रांत इकाई* - केन्द्रीय इकाई द्वारा बनाई गई कार्य योजना को मूर्त रुप देने तथा उत्तर प्रदेश राज्य की राजनीति इकाई के साथ सामंजस्य बिठा कर चलाने वाली नीति का निर्माण करने वाली परिषद उत्तर प्रदेश प्रांत इकाई है। इसमें 12 भुक्ति एवं 1 उपभुक्ति इकाई है। अत: कार्य की सुविधा के लिए इस दो क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।
*a. पूर्वी क्षेत्र उप इकाई* - यहाँ से ब्रज समाज के पूर्वी भाग में स्थित पांच भुक्ति व एक उपभुक्ति की कार्य योजना का संचालन होगा।
1. *औरैया भुक्ति* - यह विविधताओं की भुक्ति कहलाती है।औरैया, बिधुना व अजितमल नामक तीन तहसीलें तथा 7 ब्लॉक व 848 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - दिब्यापुर व औरैया विधानसभा क्षेत्र इटावा लोकसभा क्षेत्र के तथा बिधूना विधानसभा क्षेत्र कनौज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस प्रकार औरैया, बिधूना व दिब्यापुर नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है। लोकसभा क्षेत्र इटावा व कनौज की परिधि में है।
2. *मैनपुरी भुक्ति* - मैनपुरी, भोंगाव, करहल, किशनी, कुरावली और घिरोर नामक 6 तहसीलें तथा 868 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - मैनपुरी एक लोकसभा क्षेत्र है तथा मैनपुरी, भोंगाव, करहल व किशनी नामक चार विधानसभा क्षेत्र है।
3. *इटावा भुक्ति* -इटावा, जसवंतनगर, सैफई, भरथना, ताखा व चकरनगर नामक 6 तहसीलें है तथा 8 ब्लॉक है।
*राजनैतिक स्वरूप* इटावा एक लोकसभा क्षेत्र है तथा इटावा व भरथना इटावा तथा जसवंत नगर मैनपुरी लोकसभा क्षेत्राधिकार वाले तीन विधानसभा क्षेत्र है।
4. *फर्रुखाबाद भुक्ति* - इस भुक्ति में तीन तहसीलें है - कायमगंज तहसीलें में तीन विकास खंड कायमगंज, नवाबगंज व शमसाबाद, फर्रुखाबाद तहसील में बढ़पुर, मोहम्मदाबाद व *_कमालगंज विकास खंड जो की अवधी समाज अंग है_ तथा *_अमृतपुर तहसीलें भी अवधी समाज का अंग है_
*राजनैतिक स्वरूप* - फर्रुखाबाद एक लोकसभा क्षेत्र तथा कायमगंज फर्रुखाबाद भोजपुर व अमृतपुर नामक चार विधानसभा क्षेत्र है। *_जिसमें अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र अवधी समाज का अंग है।_
5. *बदायूं भुक्ति* - बिसौली, सहसवान, बिल्सी, बदायूं व दातागंज नामक पांच तहसील, 15 विकास खंड तथा 1474 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - बदायूं एक लोकसभा क्षेत्र है तथा बिसौली, सहसवान, बिल्सी, बदायूं, शेखपुर व दातागंज नामक छ विधानसभा क्षेत्र है।
6. *उपभुक्ति गुन्नौर* ( संभलपुर भुक्ति) - इस तहसील में 385 गाँव है व 3 तीन विकास खंड है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह एक विधानसभा क्षेत्र है।
b. *पश्चिमी क्षेत्र उप इकाई* - यहाँ से ब्रज समाज के पश्चिमी भाग में स्थित सात भुक्ति की कार्य योजना का संचालन होगा।
1. *कासगंज भुक्ति* - कासगंज, सहावर और पटियाली नामक तीन तहसील, 7 विकास खंड व 715 गाँव की भुक्ति कासगंज को 2008 में एटा अलग कर जिला बनाया गया था। बहुजन विचारक कांशीराम के नाम नगर का नाम रखा गया। यह गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि बताई जाती है। अमीर खुसरो का संबंध कासगंज बताया जाता है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह एटा लोकसभा क्षेत्र में आता है तथा कासगंज, अंमापुर व पटियाली नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है।
2. *एटा भुक्ति* - अलीगंज, एटा व जलेसर नामक तीन तहसीलें, 8 विकास खंड व 892 गाँव का एटा जिला जयप्रकाश भैया की कर्मभूमि है।
*राजनैतिक स्वरूप* - एटा एक लोकसभा क्षेत्र है तथा अलीगंज, एटा, जलेसर व मारहरा नामक चार विधानसभा क्षेत्र है।
3. *फिरोजाबाद भुक्ति* - फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, जसराना व सिरसागंज नामक 5 तहसीलें व 806 गाँव की फिरोजाबाद भुक्ति चुडी उद्योग के प्रसिद्ध है।
*राजनैतिक स्वरूप* - फिरोजाबाद एक लोकसभा क्षेत्र है तथा फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, जसराना व सिरसागंज नामक 5 विधानसभा क्षेत्र है।
4. *आगरा भुक्ति* - एतमादपुर, आगरा, किरौली, खैरागढ़, फ़तेहाबाद और बाह नामक 6 तहसीलें, 15 विकास खंड व 906 गांव वाली आगरा भुक्ति ताजमहल के कारण विश्वप्रसिद्ध है। अंगिरा ऋषि का संबंध आगरा बताया जाता है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यहाँ 2 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र फतेहपुर सीकरी और आगरा तथा 9 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बाह, फ़तेहाबाद, एतमादपुर, दयालबाग, आगरा छावनी, आगरा उत्तर, आगरा दक्षिण, खैरागढ़ तथा फतेहपुर सीकरी हैं।
5. *हाथरस भुक्ति* - हाथरस, सादाबाद, सिकन्दरा राऊ और सासनी नामक 4 तहसीलें, 7 ब्लॉक व 683 गाँव की हाथरस भुक्ति हींग व गुलाल के लिए प्रसिद्ध है।
*राजनैतिक स्वरूप* - हाथरस लोकसभा क्षेत्र है तथा हाथरस, सादाबाद और सिकन्दरा राऊ नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है।
6. *अलिगढ़ भुक्ति* - अतरौली, खैर, इगलास,कोल व गाभना नामक पांच तहसीलें, 12 विकास खंड व 1210 गाँव की अलीगढ़ भुक्ति ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। इसका नया नाम हरिगढ़ रखना प्रस्तावित है।
*राजनैतिक स्वरूप* -अलीगढ़ एक लोकसभा क्षेत्र तथा खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ व इगलास नामक 7 विधानसभा क्षेत्र है
7. *मथुरा भुक्ति* - श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा भुक्ति में मथुरा, गोवर्धन, छाता, मांट व माहवन नामक पांच तहसीलें, 10 विकास खंड व 880 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - मथुरा एक लोकसभा क्षेत्र है तथा मथुरा, गोवर्धन, छाता, मांट व बलदेव नामक पांच विधानसभा क्षेत्र है।
B. *ब्रज समाज की हरियाणा प्रांत इकाई* - केन्द्रीय इकाई द्वारा बनाई गई कार्य योजना को मूर्त रुप देने तथा हरियाणा राज्य की राजनीति इकाई के साथ सामंजस्य बिठा कर चलाने वाली नीति का निर्माण करने वाली परिषद हरियाणा प्रांत इकाई है। इसमें एक भुक्ति व एक उपभुक्ति है।
1. *पलवल भुक्ति* - महाभारत के इतिहास से निकट रिश्ता रखने वाले पलवल में गांधी की पहली गिरफ्तार हुए थे, यहाँ पलवल, होडल व हथीन है। यहाँ 282 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह फरीदाबाद लोकसभा अंग है।पलवल, होडल व हथीन नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है।
2. *बल्लबगढ उपभुक्ति* ( भुक्ति फरीदाबाद) - बल्लभगढ़ एक तहसील है जो हरियाणा के फिरोजाबाद जिले में है। यहाँ 85 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - बल्लभगढ़ फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र की एक विधानसभा है।
C. *ब्रज समाज की राजस्थान प्रांत इकाई* - केन्द्रीय इकाई द्वारा बनाई गई कार्य योजना को मूर्त रुप देने तथा राजस्थान राज्य की राजनीति इकाई के साथ सामंजस्य बिठा कर चलाने वाली नीति का निर्माण करने वाली परिषद राजस्थान प्रांत इकाई है। इसमें राजस्थान की दो भुक्ति इकाइयां है।
1.*भरतपुर भुक्ति* - साइबेरिन पक्षियों की प्रवास स्थली केवलादेव घाना पक्षी विहार लिए प्रसिद्ध राजस्थान की भरतपुर भुक्ति में भरतपुर, कुम्हेर, नदबई, डीग, नगर, बयाना, वैर, रूपवास, कामां व पहाड़ी नामक 10 तहसील है, जिसमें 1534 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - भरतपुर एक लोक सभा क्षेत्र है तथा भरतपुर, डिंग-कुम्हेर, नदबई, नगर, बयाना, वैर व कामां नामक सात विधानसभा क्षेत्र है।
2. *धौलपुर भुक्ति* - धौलपुर पथ्थर के प्रसिद्ध धौलपुर जिले में बरी, बसेरी, धौलपुर, राजाखेड़ा व सैपऊ नामक 5 तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - करौली धौलपुर मिलित एक लोकसभा क्षेत्र है तथा धौलपुर जिले में धौलपुर, बरी व राजाखेड़ा नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है।
D. *ब्रज समाज की मध्यप्रदेश प्रांत इकाई* - केन्द्रीय इकाई द्वारा बनाई गई कार्य योजना को मूर्त रुप देने तथा मध्य प्रदेश राज्य की राजनीति इकाई के साथ सामंजस्य बिठा कर चलाने वाली नीति का निर्माण करने वाली परिषद मध्य प्रदेश प्रांत इकाई है। इसमें मध्यप्रदेश की तीन भुक्ति इकाइयां है।
1. *मुरैना भुक्ति* - मुरैना भुक्ति चार डिवीजन तथा 9 तहसीलों में बातें गया है। प्रथम मुरैना सबडिवीजन में मुरैना शहरी, मुरैना ग्रामीण व बोमर, अम्बाह सबडिवजन में अम्बाह व पोरसा, जोरा सबडिवजन में जोरा व पहाड़गंज तथा सबलगढ़ सबडिवजन में सबलगढ़ व कैलारस तहसीलें है तथा 815 गाँव है
*राजनैतिक स्वरूप* - मुरैना एक लोकसभा क्षेत्र है जिसमें मुरैना व श्योपुर जिले आते है।मुरैना, सबलगढ़, जौरा, सुमावली, दिमनी और अंबाह नामक छ विधानसभा क्षेत्र है।
2. *श्योपुर भुक्ति* - श्योपुर, बडोदा, विजयपुर व कराहल नामक चार तहसीलें क्षेत्र है तथ 585 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह मुरैना लोकसभा क्षेत्र में आता है। इस जिले श्योपुर में श्योपुर व विजयपुर विधानसभा क्षेत्र है।
3. *शिवपुरी भुक्ति* - 1326 गाँव वाली शिवपुरी में शिवपुरी, पोहरी, बैराड, कोलारस, बदरवास, पिछोर, खनियाधाना, करेरा, नरवर नामक 9 तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - शिवपुरी जिला ग्वालियर व गुना लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहाँ शिवपुरी, करैरा( मालवा समाज का अंग) , पोहरी, पिछोर व कोलारस नामक विधानसभा क्षेत्र है।
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अध्ययन कर्ता - आनन्द किरण
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ब्रजभाषा से.........
1. मथुरा, अलिगढ़, आगरा व धौलपुर में बोली जाने वाली ब्रजभाषा को विशुद्ध ब्रजभाषा का दर्जा दिया गया है।
2. ब्रज भाषा की जननी संस्कृत को बताया गया है।
3. हिन्दी व हिन्दुस्तानी आने से पूर्व मध्यदेश (उत्तर प्रदेश) में अवधी एवं ब्रज भाषा ही साहित्यक भाषा थी।
4. ब्रज भाषा के कवि व भक्त सूरदास, रहीम रसखान, केशव धनानंद व बिहारी।
5. आज भी ब्रज भाषा क्षेत्र के संवाद की भाषा ब्रज भाषा है।
6. इतिहासकारों का मानना है कि ब्रज भाषा शौरसेनी प्राकृत से आई है।
7. ब्रज भाषा पर अन्य भाषा लटक - केंद्रीय ब्रजभाषा क्षेत्र के उत्तर पश्चिम की ओर अथवा उत्तरी पट्टी में खड़ी बोली की लटक आने लगती है। उत्तरी-पूर्वी जिलों अर्थात् बदायूँ और एटा जिलों में इसपर कन्नौजी का प्रभाव प्रारंभ हो जाता है। दक्षिण की ओर श इसमें बुंदेली की झलक आने लगती है। पश्चिम की ओर मारवाड़ी से प्रभावित है।
8. ब्रजभाषा पर अध्ययन करने वाले प्रमुख विद्वान - 'वंश भास्कर' के रचयिता सूरजमल,
'तुहफतुल हिंद' के रचयिता मिर्जा खाँ, लल्लूजीलाल, डॉ॰ धीरेन्द्र वर्मा, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र व ग्रियर्सन
9. ब्रज भाषा क्षेत्र के बाहर के कवि जिन्होंने ब्रज भाषा को महत्व दिया है -ब्रज की वंशी- ध्वनि के साथ अपने पदों की अनुपम झंकार मिलाकर नाचने वाली *मीरा मेवाड़ मारवाड़* की थीं, *नामदेव महाराष्ट्र* के थे, *नरसी गुजरात* के थे, *भारतेन्दु हरिश्चंद्र भोजपुरी* भाषा क्षेत्र के थे। ...बिहार में भोजपुरी, मगही और मैथिली भाषा क्षेत्रों में भी ब्रजभाषा के कई प्रतिभाशाली कवि हुए हैं। पूर्व में बंगाल के कवियों ने भी ब्रजभाषा में कविता लिखी।
पश्चिम में राजस्थान तो ब्रजभाषा शैलियों का प्रयोग प्रचुर मात्रा में करता ही रहा। और भी पश्चिम में गुजरात और कच्छ तक ब्रजभाषा शैली समादृत थी। कच्छ के *महाराव लखपत* बड़े विद्याप्रेमी थे। ब्रजभाषा के प्रचार और प्रशिक्षण के लिए इन्होंने एक विद्यालय भी खोला था।
10. ब्रजभाषी क्षेत्र की जनपदीय का रूप पश्चिम से पूर्व की ओर कैसा होता चला गया है, इसके लिए निम्नांकित उदाहरण द्रष्टव्य हैं :
हरियाणा में - ""तमासो देख्ने कू गए। आपस् मैं झग्रो हो रह्यौ हो। तब गानो बंद हो गयो।""
जिला बुलंदशहर में -""लौंडा गॉम् कू आयौ और बहू सू बोल्यौ कै मैं नौक्री कू जांगौ।""
जिला अलीगढ़ में - ""छोरा गाँम् कूँ आयौ औरु बऊ ते बोलौ (बोल्यौ) कै मैं नौक्री कूँ जांगो।""
जिला एटा में - ""छोरा गॉम् कूँ आओ और बऊ ते बोलो कै मैं नौक्री कूँ जाउँगो।""
इसी प्रकार उत्तर से दक्षिण की ओर का परिवर्तन द्रष्टव्य है-
जिला अलीगढ़ में -""गु छोरा मेरे घर् ते चलौ गयौ।""
जिला मथुरा में -""बु छोरा मेरे घर् तैं चल्यौ गयौ।""
जिला भरतपुर में -""ओ छोरा तू कहा कररौय।""
जिला आगरा में -""मुक्तौ रुपइया अप्नी बइयरि कूँ भेजि दयौ।""
ग्वालियर (पश्चिमी भाग) में - "बानैं एक् बोकरा पाल लओ। तब बौ आनंद सै रैबे लगो।""
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*ब्रज संस्कृति*
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भारतीय संस्कृति का बीजारोपण अवध संस्कृति से हुआ था लेकिन उसमें प्राणिन चेतना भरने का कार्य ब्रज संस्कृति के द्वारा हुआ। ब्रज की संस्कृति श्री कृष्ण को समर्पित संस्कृति है। श्रीकृष्ण युग में बही भक्ति की धारा आज भी ब्रज संस्कृति में दिखाई देती है। अत: ब्रज संस्कृति को भक्ति प्रदान संस्कृति कहा जा सकता है। भक्ति तत्व मनुष्य में विश्वास पैदा करता है तथा अंधविश्वास से दूर करता है। इसी विश्वास के बल मनुष्य कर्म को पूजा मानकर करता है। कर्म का यह सूत्र मनुष्य में सामाजिक गुणों का विकास करता है। अतः ब्रज सामाजिक आर्थिक इकाई में मानव समाज के सभी गुण विद्यमान है, जो ब्रज संस्कृति के रुप प्रकट होने को आतुर है। जरुरत है एक सिद्ध हस्त शिल्पकार की जो ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को भावना एकता के सूत्र में पिरोकर सर्वजन हित व सुख के आदर्श का प्रतिफलित कर सके।
हे ब्रज भूमि के सपुतों समाज आंदोलन तुम्हारे द्वार पर दस्तक दे रहा है, जागो उठो एवं चल पड़ो संगच्छध्वम् की राह पर। प्रउत दर्शन तुम से मांग कर रहा है कि सर्वेभवंतु सुखिनः का सूत्र प्रतिफलित करो। हे धर्म ध्वज अपनी जिम्मेदारी को पहचान ओर ब्रज की धरा पर आनन्द मार्ग संस्कार पर आधारित प्रउत व्यवस्था को स्थापित कर दो ।
दुनिया वालो ताकते रहो..........
हम नज़रों को नज़राना दिये गए......
वृदांवनम् परित्यजं पदामेकम् न गच्छामि
🙏🙏🙏🙏
श्री आनन्द किरण "देव"
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