प्रउत अभियान में एक अध्याय समाज आंदोलन के नाम से लिखा गया है। उसने विश्व को 247 समाज इकाइयों में सर्वजन सुख व हित का उद्देश्य चरितार्थ किया है। समाज आंदोलन के प्रथम व अंतिम पृष्ठ में इस बात पर ही अध्ययन करेंगे।
प्रउत की सामाजिक आर्थिक इकाइयां भाषा, सांस्कृतिक, भौगौलिक एवं भावनात्मक समानता नामक चार स्तंभ पर स्थापित है। उदाहरणार्थ मारवाड़ी समाज कहते ही मारवाड़ी भाषा, मारवाड़ी संस्कृति, मारवाड़ी समाज की भौगौलिक स्थिति एवं मारवाड़ी समाज के नागरिकों की भावनात्मक सामाजिक एकता का प्रतिनिधित्व करता है। अतः हम इन बिन्दुओं को समझ कर समाज आंदोलन का प्रथम एवं अंतिम पृष्ठ लिखेंगे।
1. भाषा
भाषा भाव प्रेषण का साधन है। यह अपनत्व की डोर में बांधने की प्रथम व अंतिम मजबूत डोर है। प्रउत ने इस डोर का मजबूती से गढ़ने के लिए सामाजिक आर्थिक इकाई का नामकरण ही इस पर किया। यह तथ्य ही एक अखंड अविभाज्य मानव समाज को गढ़ने का मजबूत तथ्य है। समाजशास्त्रियों की समझ में नहीं आया। मेरे प्रभु ने अहैतुकी कृपा कर इस मर्म को हमारे सामने रखा। इसको नहीं समझना ही समाज आंदोलन की शिथिलता का कारण है। इसके बिना यदि समाज इकाई बनती तो समझना सरल होता लेकिन वह समाज आंदोलन के मूल भाव को अंकुरित नहीं होने देता। जिससे समाज इकाई बीज नष्ट हो जाता। इसका संपूर्ण दोषारोपण समाज के निर्माता पर आता। अतः कभी भी उस भवन का निर्माण मत करो जिसकी नीव ही कमजोर है। भाषा तत्व समाज आंदोलन की नीव है। अतः भाषा तत्व को अच्छी प्रकार से समझना चाहिए तथा उसके आधार पर गढ़ना चाहिए। भाषा तत्व समाज इकाई का अस्तित्व है।
2. संस्कृति
संस्कृति आदर्श मूल्यों की वाहक होती है। प्रउत ने समाज इकाई के गठन में इनको भी स्थान दिया है। जहाँ भाषा भूगोल में असमंजस दिखाई दे वहाँ संस्कृति नाम तथ्य की छतरी खोलनी होगी। उसके छत्रछाया में समाज निर्माण के कर्म यज्ञ को पूर्णाहुति देनी है। संस्कृति नामक तथ्य छत्रक है, जहाँ व्यक्ति एवं समाज सुरक्षित है। अतः संस्कृति शब्द समाज आंदोलन का सुरक्षा कवच है। समाज आंदोलनकारियों को अपनी संस्कृति के सुरक्षा कवच को मजबूती से धारण करना चाहिए।
3. भौगोलिक स्थिति
भौगोलिक स्थिति विकास एवं प्रगति है। जब मनुष्य के विकास में भूगोल ही बाधक बन जाए तो विकास का सपना आसमानी बन जाता है। प्रउत आसमानी सपना नहीं है, यह धरातल की वास्तविकता का संस्पर्श है। अत: समाज इकाई के निर्माण में भौगोलिक स्थिति का बड़ी बेखुबी से ध्यान रखा गया है। जहाँ भाषा व संस्कृति शब्द किंकर्तव्यविमूढ़ स्थित में आ जाए। वहाँ भौगोलिक संरचना पर ध्यान गढ़ देना। समस्या का समाधान हो जाएगा। छोटी व बड़ी सामाजिक आर्थिक इकाई के सृजन में इसकी भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। भौगोलिक संरचना समाज इकाई विस्तार है, प्रगति का संदेश है।
4. भावनात्मक एकता
समाज निर्माण का मजबूत तथ्य भावनात्मक एकता से सृजित होती है। यह समाज इकाई के निवासियों की सांझी संपदा से निर्मित होता है। सांझी संपदा जनगोष्ठी का इतिहास में निहित है। जहाँ इतिहास नहीं वहाँ भविष्य भी नहीं है। अतः समाज इकाई निर्माण का कोई तथ्य समझ में नहीं आए तो भावात्मक एकता शब्द को समझ लेना होगा। यही भवन की सुदृढ़ता है।
समाज आंदोलन का यह पृष्ठ यहाँ ही नहीं रुकता अंत में सर्व समाज समिति नामक इकाई पर जाकर केन्द्रित होती है।
सर्व समाज समिति
प्रउत की सामाजिक आर्थिक इकाई संरक्षक सर्व समाज समिति को बनाया गया है। उसे एक छत्रक संगठन के रुप में चित्रित किया गया है। यह समाज इकाई को लक्ष्य भ्रमित नहीं होने तथा नैराश्य के गर्त में नहीं जाने देती है।
यह समाज आंदोलन का प्रथम व अंतिम पृष्ठ था।
सर्व भवंतु सुखिनः.........
0 Comments: