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श्री आनन्द किरण
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मानव सभ्यता का प्रथम काल्पनिक चित्र रामराज्य के रुप में खिंचा गया था। राम उस कहानी के पात्र थे तथा अयोध्या वह नगरी थी जहाँ रामराज्य को दिखाना था। संभवतया उन दिनों गुरूकुलों से कुछ नाटकों का मंथन हो रहा था। उसमें से रामराज्य, सीता स्वयंवर, वन में राम तथा रावण वध नाम नाटक बहुत अधिक लोकप्रिय रहे होंगे। क्योंकि यह सामाजिक नाटक बन पाये थे। रामायण पर गहन मंथन करने पर यह परिणाम आए है। वशिष्ठ गुरुकुल में रामराज्य नामक नाटक का मंथन हुआ जिसमें राम नायक तथा भरत सह नायक थे। माता कैकेयी खलनायिका थी। विश्वामित्र गुरुकुल में सीता स्वयंवर नाटक का मंथन हुआ। जिसमें राम नायक, सीता नायिका, लक्ष्मण सह नायक तथा परशुराम को खलनायक बताया गया था। इसी प्रकार भारद्वाज गुरुकुल में वन में राम नाटक का मंथन हुआ जिसमें राम नायक थे तथा ऋषि मुनि जन उनके संवादक थे। एक अन्य नाटक अगस्त्य गुरुकुल में रावण वध के नाम से मंथित हुआ, जिसमें राम नायक तथा रावण खलनायक था। कालांतर में बाल्मीकि गुरुकुल में लवकुश नाटक की रुपरेखा तैयार की गई। जिसमें लवकुश वीरता एवं राम की प्रभुता का चित्रण किया गया। यह नाटक भारतीय समाज के मन को भा गए थे। इसलिए रामलीला नामक वृतचित्र का मंथन होने लगा जिसमें राम केन्द्रित सभी नाटकों को जोड़ा गया। इन सबका बिंदु अवधी समाज क्षेत्र रहा। कालांतर में संभवतया गुप्त काल में जब रामायण भाष्य के रुप में आई तब उसे महाकाव्य की उपमा दी गई। सरयू नदी के किनारे अयोध्या नामक स्थान को लेकर लंबी पुराण कथाओं की रचना की जाने लगी। इसी अयोध्या शब्द से अवध शब्द आया है। अवध का इतिहास बनता बिगड़ता मुस्लिम काल में एक नवाबी परंपरा लेकर अधिक चर्चित रहा। अवध के नवाब ओर अंग्रेजों की नीति ने अवध राज्य को आकर्षण का केंद्र बना दिया। बेगम हज़रत महल की वीरता ने अवध को इतिहास में प्रसिद्ध दिलाई।
अवधी समाज के इतिहास के पन्नों में मुस्लिम काल की रचना रामचरितमानस ने चार चांद लगा दिए तथा यह भूमि साहित्यकारों व लेखकों की जननी के रुप में ख्याति पाई। अवध की सांस्कृतिक परंपरा एवं विरासत अवधी समाज को जोड़कर रखती है। अवधी भाषा की लंबा साहित्य है। इस हिन्दी की ओट में छिपा कर रखना न्याय नहीं है। इसलिए अवधी भाषा, अवधी संस्कृति व अवधी समाज इकाई को आर्थिक दृष्टि से एक आत्म निर्भर इकाई बनना चाहिए। यहाँ के भूगर्भ में आर्थिक प्रगति की प्रचुर संभावनाएं निहित है। उसको खोज निकालने के लिए ही अवधी समाज आंदोलन की आवश्यकता है।
अध्ययन एवं नीति निर्माण की सुविधा के लिए अवधी समाज इकाई को तीन मंडल में विभाजित किया जा रहा है।
*A . पश्चिम मंडल*
1. पीलीभीत
2. शाहजहांपुर
3. विकास खंड कमालगंज ( जिला फर्रुखाबाद)
4. तहसील अमृतपुर ( जिला फर्रुखाबाद)
5. कनौज
6. हरदोई
7. सीतापुर
8. लखीमपुर खीरी
*B. मध्य मंडल*
9. कानपुर देहात
10. कानपुर नगर
11. उन्नाव
12. लखनऊ
13. बारबंकी
14. बहराइच
15. श्रावस्ती
16. फतेहपुर
17. रायबरेली
18. अमेठी
*C. पूर्व मंडल*
19. अयोध्या (पुराना नाम फैजाबाद)
20. गोंडा
21. बलरामपुर
22.तहसील सिराथू ( जिला कौशाम्बी)
23. प्रतापगढ़
24. सुल्तानपुर
25. अम्बेडकर नगर
26. प्रयागराज (पुराना नाम इलाहाबाद)
27. क्षेत्र कपिलवस्तु (जिला सिद्धार्थ नगर)
🌼पश्चिम अंचल (अवधी समाज) 🌼
अवधी समाज के पश्चिमी क्षेत्र में पीलीभीत, शाहजहाँपुर, कनौज, हरदोई, सीतापुर व लखीमपुर खीरी भुक्तियां तथा अमृतपुर उपभुक्ति व कमालगंज विकास खंड है।
पीलीभीत भुक्ति
अवधी समाज क्षेत्र की पीलीभीत भुक्ति नेपाल की सीमा पर हिमालय के उप बेल्ट में स्थित है।
1. *विस्तार* - यह 28°6 ‘और 28°53′ उत्तर अक्षांश और 79°57 ‘और 80°27′ पूर्वी देशांतर के परिधि के समानांतर के बीच है। पीलीभीत भुक्ति का क्षेत्र 3,504 वर्ग किलोमीटर है।
2. *भूगोल* -हिमालय के बिलकुल समीप स्थित होने के बावजूद इसकी भूमि समतल है। इसका मुख्य भाग घने जंगल से ढंका है। कुल 78478 हेक्टेयर वन है। शारदा नहर जिले की मुख्य नहर है, अन्य इसकी शाखाएं हैं जिले में कुल नहरों की लंबाई 938 किलोमीटर है।
3. *अर्थव्यवस्था* - यद्यपि पीलीभीत भुक्ति उद्योग के क्षेत्र में थोड़ा पीछे है तथा पीलीभीत की अर्थ व्यवस्था कृषि पर आधारित है। इस क्षेत्र में मुख्य फसल गन्ना है इसलिए मझोला, पुरनपुर, बीसलपुर और पीलीभीत में चार चीनी मिल हैं। अन्य प्रमुख इकाइयां तीन विलायक संयंत्र, एक आटा मिल, एक इस्पात संयंत्र और एक अलकोहल आसवनी हैं। यहां के उद्योगों में चीनी, काग़ज़, चावल और आटा मिलों की प्रमुखता है। कुटीर उद्योग में बांस और ज़रदोज़ी, ईंट क्लिंस, मोमबत्तियां का काम प्रसिद्ध है। पीलीभीत में मुख्य रूप से बांसुरी (बांसुरी) निर्माण का कार्य किया जाता है |
4. *प्रशासनिक इकाइयां* - सदर, पीलीभीत, पूरनपुर, कलीनगर व अमरिया नामक 5 तहसील, 7 ब्लॉक, 14 थाने, 9 नगर पंचायतें, 721 ग्राम पंचायत व 1440 गाँव है।
5. *राजनैतिक स्वरूप* - पीलीभीत एक संसदीय क्षेत्र भी है तथा इस भुक्ति में चार विधानसभा सीटें - पीलीभीत, बरखेड़ा, पूरनपुर व बीसलपुर है।
शाहजहाँपुर भुक्ति
अवधी समाज क्षेत्र की शाहजहाँपुर भुक्ति कृषि प्रधान है।
1. *परिचय* - शाहजहाँपुर सिटी दिलेर खान और श्री शेर बहादुर खान द्वारा स्थापित किया गया है जो कि मुगल सम्राट जहॉगीर की सेना में सैनिक थे l सेना को “धनुष” की आपूर्ति के कारण इस शहरी क्षेत्र को “तीर कमान नगर” के रूप में बुलाया जाता था l
2. *विस्तार* - जिला शाहजहाँपुर रोहिलखंड डिवीजन के दक्षिण पूर्व में स्थित है. इसकी स्थापना 1813 में हुई थी l शाहजहाँपुर जिला बनने से पहले यह जिला बरेली का एक हिस्सा था l भौगोलिक दृष्टि से, यह 27.35 एन अक्षांश और 79.37 ई देशांतर पर स्थित है l l इसका भौगोलिक क्षेत्र 4575 वर्ग किलोमीटर है l
3. *भूगोल* - यह उत्तर प्रदेश का एक कृषि आधारित जिला है l रामगंगा, गर्रा और गोमती इस जिले की मुख्य नदियां हैं l ज्यादातर बाढ़ से प्रभावित तहसील जलालाबाद है l
4. *अर्थव्यवस्था* - जिले की प्रमुख फसलें गेहूं, चना, बाजरा, और आलू है l
5. *प्रशासनिक इकाइयां* - जिला शाहजहाँपुर में सदर, तिलहर, जलालाबाद व पुवॉया नामक 4 तहसील, 15 ब्लाक, 10 नगर पंचायत, 23 थाना क्षेत्र,1077 ग्राम पंचायत और 2325 गाँव है।
6. *राजनैतिक स्थित* - शाहजहाँपुर एक संसद निर्वाचन क्षेत्र और 6 विधानसभा क्षेत्र - कटरा, जलालाबाद, तिलहर, पुवॉया, शाहजहाँपुर व ददरौल है।
अमृतपुर उपभुक्ति
व
कमालगंज क्षेत्र
(फर्रुखाबाद भुक्ति)
अवधी समाज परिधि में फर्रुखाबाद भुक्ति की अमृतपुर तहसील व विकास खंड ( ब्लाक) कमालगंज को शामिल किया गया है। फर्रुखाबाद भुक्ति के दक्षिण पूर्वी भाग अमृतपुर तहसील है तथा फर्रुखाबाद सदर तहसील का कमालगंज विकास खंड जिले दक्षिण पश्चिम में स्थित है। अमृतपुर एक विधानसभा क्षेत्र है जबकि कमालगंज नगर पंचायत क्षेत्र है।
कनौज भुक्ति
अवधी समाज की पश्चिम कनौज भुक्ति ऐतिहासिक कारणों से प्रसिद्ध है
1. *विस्तार* - 27°13'30'' उत्तर अक्षांश पर व 79°19' से 89°1' पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। इसका क्षेत्रफल 2093 वर्ग किलोमीटर है।
2. *प्रशासनिक इकाइयां* - कनौज, छिबरामऊ व तिर्वा नामक तीन तहसीलें, 8 विकास खंड, 8 नगर पंचायत व 499 ग्राम पंचायत है।
3.*भूगोल* - यहाँ गंगा, काली व ईशान नामक तीन नदियाँ बहती है। कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
4. *राजनैतिक स्वरूप* - कनौज लोकसभा क्षेत्र है। जिसमें कनौज जिले की 3 ( कनौज,छिबरामऊ व तिर्वा) औरैया की 1( बिधूना) तथा कानपुर देहात की 1 रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र है।
हरदोई भुक्ति
हरदोई जिला भारत के उत्तर प्रदेश प्रांत में लखनऊ कमीशन का एक जिला है। द्वापर युग की तीर्थयात्री नेमीशारयन जिला मुख्यालय से सिर्फ 45 किमी दूर है। इसका इतिहास हिरण्यकश्यप जोड़ कर बताते है।
1. *विस्तार* - यह 26°53' से 27°46' उत्तरी अक्षांश और 79°4' से 80°46' पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। । इस जिले की लंबाई उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व है तथा भौगोलिक क्षेत्रफल 5989 वर्ग किमी है।
2. *प्रशासनिक इकाइयां* - हरदोई भुक्ति में हरदोई, शाहाबाद, बिलग्राम , संडीला और सवायजपुर नामक 5 तहसील 1306 ग्राम सभा और 19 07 गांव हैं। इसमें 7 नगर पालिका परिषद और 6 नगर पंचायत भी हैं।
3. *भूगोल* - यहाँ गोमती, रामगंगा, गर्रा , सुखेता, सई, घरेहरा नामक नदियाँ बहती है।
4. *राजनैतिक स्वरूप* - हरदोई भुक्ति में हरदोई व मिश्रिख नामक 2 संसदीय क्षेत्र की सीमाएं है तथा सवायजपुर, शाहबाद, हरदोई, गोपामऊ व सांडी नामक 5 विधानसभा क्षेत्र हरदोई संसदीय क्षेत्र में तथा बिलग्राम, बालामऊ व संडीला नामक तीन विधानसभा क्षेत्र मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में है। कुल 8 विधानसभा क्षेत्र है।
सीतापुर भुक्ति
इस भुक्ति को राजा विक्रमादित्य स्थापित किया
1. *विस्तार* - क्षेत्र 5743 वर्ग है किमी। अक्षांश 27.57°N देशांतर 80.66°E है।
2. *प्रशासनिक इकाइयां* - सीतापुर, बिसवां ,मिश्रिख , लहरपुर, महमूदबाद, महोली और सिधौली नामक सात तहसील,19 ब्लॉक, 1329 ग्राम पंचायत व 2348 गाँव है।
3. *राजनैतिक स्वरूप* - सीतापुर व मिश्राख नामक दो संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और सेवटा, बिस्वान, महमूदबाद, सिधाली, लाहरपुर, सीतापुर, हरगोण, मिश्रीख और महोली नामक 9 विधानसभा क्षेत्र हैं।
4. *प्रसिद्ध व्यक्तित्व* - कैप्टन मनोज पांडे, राजा तोड़दार मल, कवि नरोत्तम दास, आचार्य नरेन्द्र देव, मौलाना फजले हक खैरबादी, रियाज खैरबादी, जवाला प्रसाद वर्क है
5. *पार्क और पिकनिक स्पॉट* - इलसीया बाल वनोडियन (इलियासिया पार्क), महावीर उद्यान (टिकुनी पार्क), सरोजिनी वटिकावैधी व वाटकनीलगाँव नामक पिकनिक स्थान है।
लखीमपुर खीरी भुक्ति
भारत, नेपाल सीमा पर स्थित लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। इसकी प्रशासनिक राजधानी लखीमपुर शहर है।लखीमपुर को पूर्व में लक्ष्मीपुर के नाम से जाना जाता था। खीरी, लखीमपुर शहर से 2 किलोमीटर (1.2 मील) एक क़स्बा है। इसका नाम साईंद खुर्द के अवशेषों पर निर्मित कब्र से लिया गया है।
1. *विस्तार* - 27.6 डिग्री से 28.6 डिग्री उत्तर अक्षांश और 80.34 डिग्री और 81.30 डिग्री पूर्वी पूर्व में स्थित है, और लगभग 7,680 वर्ग किलोमीटर (2,970 वर्ग मील) क्षेत्र में स्थित है।
2 *भूगोल* - जिला हिमालय के आधार पर तेराई निचला इलाकों के भीतर है, जिसमें कई नदियों और हरे भरे वनस्पति शामिल हैं। लखीमपुर में कई नदियों का प्रवाह इनमें से कुछ शारदा, घागरा, कोरियाला, उले, सरायन, चौका, गोमती, कठन, सराय और मोहन हैं। गेहूं, चावल, मक्का, जौ और दालें प्रमुख खाद्य फसलें हैं। हाल ही में किसानों ने जिले में मेन्थॉल टकसाल खेती शुरू कर दी है, क्योंकि तराई क्षेत्र यह टकसाल खेती के लिए आदर्श है। चीनी गएई और तिलहन प्रमुख गैर-खाद्य फसलें हैं। स्थानीय जिले की रीढ़ की हड्डी बनकर इस जिले में चीनी का उत्पादन और संसाधित किया जाता है।
3. *प्रशासनिक स्वरूप* - लखीमपुर,धोराहरा, गोला गोकरन नाथ, मोहम्मदी, निगासन व पलिया नामक 6 तहसीलें, 7,680 वर्ग किलोमीटर वाले इस जिले में 1797 राजस्व ग्राम और 995 ग्राम पंचायतें हैं।
4. *राजनैतिक स्वरूप* - खीरी व धौरहरा नामक दो संसदीय क्षेत्र तथा धौराहरा, गोला गोकरन नाथ, मोहम्मदी, निगासन, पलिया, श्रीनगर, कास्ता व लखीमपुर नामक 8 विधानसभा क्षेत्र है।
अवध समाज क्षेत्र का पश्चिम इलाका कृषि व प्राकृतिक संसाधन संपन्न है। यहाँ हिन्दू व मुस्लिम सौहार्द देखने को मिलता है। दमित जन बाहुल्य क्षेत्र है।
💐मध्य अंचल ( अवधी समाज) 💐
अवधी समाज के मध्य क्षेत्र में कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती फतेहपुर, रायबरेली व अमेठी नाम दस भुक्तियों को रखा गया है।
कानपुर
कान्हपुरम् से कानपुर शब्द बना है। यह एक औद्योगिक नगर है। इतिहास के पन्ने सोमवंशी राजा कान्हा द्वारा बसाया गया नगर बताते हैं। कानपुर भुक्ति वर्तमान में कानपुर देहात व कानपुर नगर नामक दो भुक्तियों में विभाजित है।
कानपुर देहात भुक्ति
गंगा-यमुना के दोआब के दक्षिणी भाग में अवस्थित है। जिले की अधिकांश भूमि पर रबी की फसलें होती हैं। रबी की मुख्य उपज गेहूँ, जौ, चना, मटर अरहर और सरसों आदि तथा खरीफ की उपज चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास आदि हैं। गन्ने की खेती भी होती है। यहाँ जलवायु शुष्क है। इस भूमि क्रांतिकारी अमर शहीद गौर राजा दरियावचन, शाहपुर की रानी, राजा विजय सिंह, शिवराम पाण्डेय, नित्यानंद पाण्डेय, रामाधार त्यागी, रामखेलावन मिश्र, द्विजेन्द्र नाथ शुक्ल, शम्भू दयाल चतुर्वेदी, राम स्वरुप गुप्ता, विश्वम्भर नाथ द्विवेदी व बाबूराम प्रसाद शुक्ल यहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। अकबरपुर, भोगनीपुर, डेरापुर, रसूलाबाद, सिकंदरा व मैथा नामक 6 तहसीलें है। यहाँ 10 विकास खंड भी है। अकबरपुर में जिला मुख्यालय है।
कानपुर नगर भुक्ति
10863 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कानपुर नगर भुक्ति है। यहाँ 10 विकास खंड, 42 थाना व 1011 गाँव इकाइयां है। कानपुर सदर, घाटमपुर, बिल्हौर व नर्वल नाम चार तहसीलें है। यह चमड़ा तथा कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
*राजनैतिक स्वरूप* - कानपुर व अकबरपुर नामक दो लोकसभा क्षेत्र व बिल्लौर, बिठूर, कल्याणपुर, महाराजपुर, घाटमपुर, छावनी, किदवई नगर, गोविन्द नगर, आर्य नगर, सीसामऊ, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र नामक 13 विधानसभा क्षेत्र है। रसूलाबाद, रनिया, सिकंदरा व भोगनीपुर नामक चार विधानसभा क्षेत्र कानपुर देहात में है।
उन्नाव भुक्ति
तलवार व कलम की भूमि गंगा और साईं नदी के बीच स्थित उन्नाव जिला साहित्य, सांस्कृतिक, इतिहास एवं धार्मिक विरासत के कारण लोकप्रिय है। यह धरती चंद्रशेखर आजाद, गुलाब सिंह लोधी, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला', उमाशंकर दीक्षित द्वारिकाप्रसाद मिश्र, भगवती चरण वर्मा, नंददुलारे वाजपेयी, रमई काका, शिवमंगल सिंह सुमन, व विश्वम्भर दयालु त्रिपाठी की जननी है।उन्नाव भुक्ति में ६ तहसील हैं - उन्नाव, बांगरमऊ, हसनगंज, सफीपुर, पुरवा और पाटन(बीघापुर)।
*राजनैतिक स्वरूप* - उन्नाव लोक सभा सीट हैं। भुक्ति में ६ विधानसभा क्षेत्र हैं - उन्नाव, पुरवा, भगवन्तनगर, मोहान, सफीपुर और बांगरमऊ।
लखनऊ भुक्ति
2528 वर्ग किलोमीटर की भुक्ति अवध प्रदेश की राजधानी थी। इस का प्राचीन नाम लक्ष्मण पुर है। इसे नवाबों का शहर कहते हैं। गोमती नदी की तट स्थली लखनऊ भुक्ति में 961 गाँव, 43 पुलिस स्टेशन, 8 विकास खंड तथा सदर, सरोजनी नगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद व मोहन लाल गंज नामक 6 तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - लखनऊ एवं मोहनलालगंज नामक दो संसदीय क्षेत्र तथा मलिहाबाद, बख्शी का तालाब, सरोजनी नगर, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तर, लखनऊ पूर्व, लखनऊ मध्य, लखनऊ केंट, मोहनगंज नामक 9 विधानसभा क्षेत्र है।
बाराबंकी भुक्ति
साधना भूमि नाम से व्याख्याता बाराबंकी भुक्ति में गन्ना विभाग है, जहाँ 1845 गाँव 1 नगर परिषद, 23 पुलिस स्टेशन व नवाबगंज, फतेहपुर, रामसनेही घाट, हैदरगढ़, रामनगर, सिरौली ग़ौसपुर नामक छ तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र है तथा कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी, जैदपुर व हैदरगढ़ नामक पाच विधानसभा क्षेत्र है।
बहराइच भुक्ति
भहराइच शब्द से बहराइच शब्द आया है। अवधी समाज की यह भुक्ति बहराइच के पूर्वी हिस्से में हैं।जिले का उत्तरी भाग ताराई क्षेत्र है जो घने प्राकृतिक वन के द्वारा कवर किया गया है। चकिया, सुजौली, निशंगरा, मिहिनपुरवा, बिची और बाघौली जिले के मुख्य वन क्षेत्र हैं। सरजू और घाघरा जिले की प्रमुख नदियां हैं। 1387 गाँव व 4 नगरी इस भुक्ति में 23 पुलिस थाना, 14 विकास ब्लॉक व प्रयागपुर, नानपारा, मोतिपुर, महसी, बहराइच व केशरगंज नामक छ: तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* -बहराइच एक लोकसभा क्षेत्र है तथा बलहा, प्रयागपुर, नानपारा, मटेरा, महसी, बहराइच व केशरगंज नामक 7 विधानसभा क्षेत्र है।
श्रावस्ती भुक्ति
बौद्ध पवित्र स्थल श्रावस्ती को 2004 में भुक्ति का दर्जा दिया है। भिनगा, इकौना व जमुनहा नाम तीन तहसीलें तथा पाच विकास खंड, 7 पुलिस थाने व 536 ग्राम है।
*राजनैतिक स्वरूप* - श्रावस्ती एक लोकसभा क्षेत्र है तथा भिनगा व श्रावस्ती नामक दो विधानसभा क्षेत्र है।
फतेहपुर भुक्ति
भृगु ऋषि की तपोभूमि फतेहपुर का वैदिक नाम अन्तर्देश था। यह गंगा यमुना के बीच की यह भुक्ति गणेश शंकर विद्यार्थी व शायर इकबाल की जन्मभूमि है। यहाँ 1521 गाँव, 13 ब्लॉक, 20 पुलिस थाने व फतेहपुर सदर, बिन्दकी व खागा नामक तीन तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - फतेहपुर एक लोकसभा क्षेत्र तथा जहानाबाद, बिन्दकी, फतेहपुर, आयहशाह, हुसैनगंज व खागा नामक छ: विधानसभा क्षेत्र है
अमेठी भुक्ति
गौरीगंज, मुसाफिरखाना, तिलोई व अमेठी नामक चार तहसीलों की भक्ति अम में 13 ब्लॉक 1000 ग्राम है।
*राजनैतिक स्वरूप* - अमेठी एक लोकसभा क्षेत्र है तथा अमेठी, गौरीगंज, तिलोई व जगदीशपुर नामक चार विधानसभा क्षेत्र है।
रायबरेली भुक्ति
शहीदों भूमि रायबरेली भुक्ति में रायबरेली, सलोन, लालगंज, डलमऊ, ऊंचाहार व महाराजगंज नामक 6 तहसीलें, 9 नगर, 19 पुलिस थाना व 1571 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - रायबरेली एक लोकसभा क्षेत्र है तथा बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सरेनी ऊंचाहार व सलोन नामक 6 विधानसभा क्षेत्र है।
🌹 पूर्वी अंचल (अवधी समाज)🌹
अवधी समाज के पूर्वी भाग में अयोध्या, गौंडा, बलरामपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर व प्रयागराज भुक्ति तथा सिराथू उपभुक्ति व कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र है।
अयोध्या भुक्ति
अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या। तस्यां हिरण्मयः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः॥ (अथर्ववेद -- 10.2.31) अयोध्या शब्द की वैदिक व्याख्या के बाद सरयू नदी के तट पर स्थित आयोध्या भुक्ति के संदर्भ में अध्ययन करते है। यह रामायण के मुख्य पात्र भगवान राम, राममनोहर लोहिया, कुंवर नारायण, राम प्रकाश द्विवेदी आदि की यह जन्मभूमि है। इस भुक्ति का एक समय फैजाबाद था। इस भुक्ति में सदर, सोहवल, बीकापुर, मिल्कीपुर व रुदौली नाम पांच तहसीलें है। अयोध्या, सरयू नदी के दक्षिणी तट के किनारे जलोढ़ मैदान के उपजाऊ हिस्से पर बसा हुआ है। यहाँ प्रमुख फ़सलें धान, गन्ना, गेहूँ और तिलहन हैं। अयोध्या के दक्षिण-पूर्व में स्थित टांडा शहर में निर्यात के लिए हथकरघा वस्त्र का निर्माण होता है। अयोध्या शहर के उद्योगों में चीनी प्रसंस्करण और तिलहन की पेराई शामिल है तथा यह कृषि उत्पादों का व्यापारिक केंद्र भी है।
*राजनैतिक स्वरूप* - अयोध्या एक फैजाबाद नामक लोकसभा क्षेत्र है तथा दरियाबाद, रुदौली, मिल्कपुर, बीकापुर व अयोध्या नामक पांच विधानसभा क्षेत्र है।
गोंडा भुक्ति
4003 वर्गकिलोमीटर वाली गोंडा भुक्ति में सदर, करनैलगंज, तरबगंज व मनकापुर नामक चार तहसीलें, 16 विकास खंड, 3 नगर व 1054 ग्राम है। गेहूँ, मक्का, चावल व तंबाकू मुख्य फसलें तथा बालू मुख्य खनिज है। घाघरा, सरयू व टेढ़ी यहाँ की मुख्य नदियाँ हैं।
*राजनैतिक स्वरूप* - गोण्डा एक लोकसभा क्षेत्र है तथा मेहनौन, गोण्डा, कटरा बाजार, करनैलगंज, तरबगंज, मनकापुर व गौरा नामक 7 विधानसभा क्षेत्र है।
बलरामपुर भुक्ति
राप्ती नदी के किनारे स्थित बलरामपुर का प्राचीन नाम देवी पाटन था। भुक्ति में बलरामपुर, तुलसीपुर और उतरौला नामक 3 तहसील हैं।
*राजनैतिक स्वरूप* - नानाजी देशमुख व अटल बिहारी वाजपेयी नामक दो भारत रत्न देने वाली बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र अब श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र का अंग है। तुलसीपुर, उतरौला, गैसड़ी व बलरामपुर नामक चार विधानसभा क्षेत्र है
उपभुक्ति सिराथू
(भुक्ति कौशांबी )
सिराथू (Sirathu) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कौशाम्बी ज़िले में स्थित एक नगर है। सिराथू का मुख्य पर्यटन स्थल कड़ा धाम है जो कि सिराथू रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में है यहाँ शीतला माता मंदिर स्थित है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह एक विधानसभा क्षेत्र है।
प्रतापगढ़ भुक्ति
प्रतापगढ़ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। इसे को बेला, बेल्हा, परतापगढ़, या प्रताबगढ़ भी कहा जाता है। यह प्रतापगढ़ जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह उत्तर प्रदेश का 72वां जिला है। इसे लोग बेल्हा भी कहते हैं, क्योंकि यहां बेल्हा देवी मंदिर है जो कि सई नदी के किनारे बना है। इस जिले को ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां के विधानसभा क्षेत्र पट्टी से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं॰ जवाहर लाल नेहरू ने अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। इस धरती को राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्म स्थली के नाम से भी जाना जाता है। प्रतापगढ़, कुंडा, लालगंज, पट्टी व रानीगंज नामक पांच तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - प्रतापगढ़ नामक एक लोक सभा क्षेत्र है,इस भुक्ति क्षेत्र में कौशबी लोकसभा का क्षेत्र भी आता है। रानीगंज, कुंडा, विश्वनाथगंज, पट्टी,सदर, बाबागंज, और रामपुर नामक सात विधानसभा क्षेत्र है।
सुल्तानपुर भुक्ति
महर्षि वाल्मीकि, दुर्वासा, वशिष्ठ आदि ऋषि मुनियों की तपोस्थली का गौरव इसी जिले को प्राप्त है । परिवर्तन के शाश्वत नियम के अनेक झंझावातों के बावजूद इसका अस्तित्व अक्षुण्य् रहा है । अयोध्या और प्रयाग के मध्य गोमती नदी के दोनों ओर सई और तमसा नदियों के बीच कभी यह भूभाग अत्याधिक दुर्गम था।गोमती के किनारे का यह क्षेत्र कुश-काश के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है,कुश-काश से बनने वाले बाध की प्रसिद्ध मंडी यही पर है।प्राचीन काल मे सुलतानपुर का नाम कुशभवनपुर था जो कालांतर मे बदलते बदलते सुलतानपुर हो गया। सुल्तानपुर सदर, जयसिंहपुर, लंभुआ, कादीपुर व बल्दीराय नामक पांच तहसीलें है।
*राजनैतिक स्वरूप* - सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र है तथा इस लोकसभा क्षेत्र की इसौली, प्रतापगढ़, सदर, लम्भुआ व कादीपुर विधानसभा क्षेत्र तथा अमेठी संसदीय क्षेत्र की जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र का आंशिक क्षेत्र आता है।
अंबेडकरनगर भुक्ति
29 सितम्बर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा शिवबाबा के खचाखच भरे भीड़ में सृजन की घोषणा के साथ अयोध्या(फैजाबाद) से विभक्त होकर अस्तित्व में आये अम्बेडकरनगर जनपद का मुख्यालय अकबरपुर है। जिले में कुल 5 तहसीलें अकबरपुर, टाण्डा, जलालपुर, आलापुर और भीटी हैं। यह नही 930 ग्राम पंचायतों और 1750 राजस्व गांवो में फैले अम्बेडकरनगर जनपद को पहले 9 विकास खण्डों में विभक्त किया गया हैं।
*राजनैतिक स्वरूप* -
दो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अम्बेडकर नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र (अकबरपुर, जलालपुर, कटेहारी, टाण्डा) व सन्त कबीर नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र (राजेसुल्तानपुर, आलापुर) तथा 5 विधानसभा निर्वाचन क्ष्रेत्र -कटेहारी, अकबरपुर, टाण्डा जलालपुर व अल्लापुर
प्रयागराज भुक्ति
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित प्रयागराज भुक्ति इलाहाबाद कहा जाता था। इलाहबास' या "ईश्वर का निवास" कर दिया, जो बाद में बदलकर 'इलाहाबाद' हो गया। भौगोलिक दृष्टि से, प्रयागराज उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में 25.45 डिग्री उत्तर तथा 81.84 डिग्री पूर्व पर स्थित है। इसके दक्षिणी और दक्षिण पूर्व में बागेलखण्ड क्षेत्र, पूर्व में मध्य गंगा घाटी या पूर्वांचल, दक्षिण-पश्चिम में बुंदेलखंड क्षेत्र, उत्तर और उत्तर-पूर्व में अवध क्षेत्र है। पश्चिम में कौशाम्बी के साथ प्रयागराज दोआब बनाता है जिसे निछला दोआब क्षेत्र कहते हैं। प्रयागराज के उत्तर में प्रतापगढ़, पूर्व में संत रविदासनगर, दक्षिण में रीवा (म०प्र०) तथा पश्चिम में कौशाम्बी स्थित हैं। जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र 5482 वर्ग मीटर किमी है । जिले को प्रयागराज जिले में आठ तहसीले हैं, जो निम्नवत है। सदर, मेजा, करछना, बारा, सोरांव, फूलपुर, कोरांव, हंडिया व 20 विकास खंड में विभाजित किया गया है। भारत के पूर्व-प्रधानमंत्री श्री विश्वप्रताप सिंह मांडा के राजा थे।
*राजनैतिक स्वरूप* - इलाहाबाद व फूलपुर दो लोकसभा क्षेत्र है साथ में भदोही लोकसभा का क्षेत्र प्रयागराज भुक्ति में आता है तथा फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा , करछना, इलाहाबाद पश्चिम , इलाहाबाद उत्तर, इलाहाबाद दक्षिण, बारा, कोरांव नामक 12 विधानसभा क्षेत्र है।
कपिलवस्तु
उपभुक्ति डुमरियागंज
(भुक्ति सिद्धार्थ नगर)
कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज तहसील का एक शहर है। इतिहास के पन्नों से ज्ञात होता है कि महात्मा बुद्ध के वैशाली गणराज्य की राजधानी थी। कतिपय इतिहासकार नेपाल के कपिलवस्तु को महात्मा बुद्ध से संबंधित बताते है।
*राजनैतिक स्वरूप* - डुमरियागंज लोकसभा में कपिलवस्तु एक विधानसभा क्षेत्र है। जो कपिलवस्तु शहर को कवर करती है।
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