समाज आंदोलन अपनी यात्रा के क्रम में उतर प्रदेश नामक राजनैतिक इकाई से गुजरते गुजरते कुछ अध्ययन किया, वह निम्नानुसार है।
उत्तर प्रदेश नामक राजनैतिक इकाई में समाज आंदोलन कुछ इस प्रकार दिखाई दे रहा है। यह उत्तर प्रदेश सर्व समाज समिति का जिम्मेदारी में है।
*1. हरियाणी समाज (उत्तर प्रदेश)*
1. बरेली
2. रामपुर
3. संभल
4. मुरादाबाद
5. बिजनौर
6. अमरोहा
7. बुलंदशहर
8. गौतम बुद्ध नगर
9. गाजियाबाद
10. हापुड़
11. मेरठ,
12. मुजफ्फरनगर
13. शामली
14. बागपत
15. सहारनपुर
*2. ब्रज समाज (उत्तर प्रदेश)*
1. औरिया
2. मैनपुरी
3. इटावा
4. फर्रुखाबाद
5. बदायूं
6. कासगंज
7. एटा
8. फिरोजाबाद
9. आगरा
10. हाथरस
11. अलिगढ़
12. मथुरा
13.गुन्नौर ( संभलपुर)
*3. बुंदेलखंड समाज (उत्तर प्रदेश)*
1. ललितपुर,
2. झांसी,
3. हम्मीरपुर,
4. महोबा,
5. बांदा
6. जालौन
*4. अवधी समाज (उत्तर प्रदेश )*
1.इलाहाबाद (प्रयागराज)
2.प्रतापगढ़
3.सुल्तानपुर
4.अम्बेडकर नगर
5.फैजाबाद
6.गोंडा
7. बलरामपुर
8. श्रीवस्ती
9. बहराइच
10. बारबंकी
11. रायबरेली
12. अमेठी
13. फतेहपुर
14.सिराथू (कौशाम्बी)
15. कानपुर नगर
16.कानपुर देहात
17.हरदोई
18.उन्नाव
19. सीतापुर
20.लखीमपुर खीरी
21.पीलीभीत
22.शाहजहांपुर
24.कनौज
25. कमालगंज ( फर्रुखाबाद)
26.अमृतपुर (फर्रुखाबाद)
27.कपिलवस्तु ( सिद्धार्थ नगर)
*5. बघेलखंडी समाज (उत्तर प्रदेश)*
1. चित्रकुट
2. मंझनपुर
3.प्रयाग का हिस्सा
*6. प्रगतिशील भोजपुरी समाज (उत्तर प्रदेश)*
1. कुशीनगर
2. गोरखपुर
3.देवरिया
4. बलिया
5.गाजीपुर
6.चंदौली
7.सोनभद्र
8.मिर्जापुर
9.वाराणसी
10. आजमगढ़
11.मऊ
12.संत कबीर नगर
13.महाराजगंज -
14.सिद्धार्थनगर
15.जोनपुर,
16. बस्ती
17.संत रविदास नगर
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आज समाज आंदोलन का रथ
उत्तर प्रदेश राष्ट्र का एक मात्र ऐसा राज्य है, जिसने भारतवर्ष को सबसे अधिक प्रधानमंत्री दिए है तथा भारतीय राजनीति में एक कहावत है कि उत्तर प्रदेश ही भारतीय राजनीति का भाग्यतय करता है। उत्तर प्रदेश राज्य आजादी से पूर्व ब्रिटिश भारत का अंग था। आजादी के बाद लंबे अर्चे तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक सत्र शासन रहा। श्री गोविन्द वल्लभ पंत से लेकर नारायण दत्त तिवारी तक कांग्रेस युग कहा जा सकता है। यद्यपि इस दरमियान चौधरी चरण सिंह ने प्रथम बार कांग्रेस के राज में छेद मारा था। यह खेल अस्थायी सिद्ध हुआ। 1989 की राम लहर ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का स्वाह कर दिया तथा उसके बाद मुलायम युग की शुरुआत हुई। इसके मध्य भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी इत्यादि ने उत्तर प्रदेश के सियासी, समीकरण को इधर उधर किया लेकिन राजनीति मुलायम सिंह यादव के इर्दगिर्द घुमती रही है। मोदी युग में उत्तर प्रदेश की राजनीति बहुत अधिक प्रभावित रही एक बार लगा की मुलायम युग की समाप्ति हो गई तथा नया युग शुरू हुआ। लेकिन किसान आंदोलन की चेतना बताया की उत्तर प्रदेश करवट बदल सकता है। आदर्श हीन राजनीति के इस युग में दिशाहीन नेतृत्व राज्य का जनमन लुकाछिपी का खेल खेल रहा है। भारतीय लोकसभा को 80 सांसद देने वाली उत्तर प्रदेश की भूमि को नेताओ भी कहा जाता है।
हे प्राउटिस्टों उत्तर प्रदेश के जन गण मन को नासमझ राजनीति के भरोसे मत छोड़ों तथा समाज आंदोलन की नीव रखकर उत्तर प्रदेश के भाग्योदय के लिए अपने सामाजिक धर्म का अनुपालन कीजिये।
उत्तर प्रदेश की सामाजिक आर्थिक इकाइयां अवधी, ब्रज, भोजपुरी, हरियाणवी, बुंदेलखंडी, बघेलखंडी नाम से सांस्कृतिक व आर्थिक भविष्य को संवारेंगी। उसके गर्भ से राजनैतिक किरण निकलेंगी, उस राजनीति को प्रउत व्यवस्था के आदर्श में बदलेगी।
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*भोजपुरी समाज*
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समाज आंदोलन के करणीय कार्य
*🌼पहला रचनात्मक कार्य*🌼
*१. प्रबुद्ध मंडल (think tank) अथवा प्रबुद्ध मंडल का निर्माण (building an enlightened circle)* - भोजपुरी साहित्यकारों तथा भाषाविदों के द्वारा पर अपना प्रउत तथा उसका समाज आंदोलन लेकर जाना है। हमारी इस कोशिश से कुछ भाषा एवं साहित्य शिल्पकार हमारे कर्म यज्ञ में अपने आहुति देने को तैयार होंगे ही। उनकी मदद से भोजपुरी समाज को अपने स्थानीय भाषा व संस्कारों में विमर्श, विचार एवं चिंतन मिलेंगे।
*२. सांस्कृतिक व काव्य गोष्ठी (cultural and Poetry conference) अथवा सांस्कृतिक व काव्य दलों का निर्माण करना (create cultural and Poetry groups)* - प्रबुद्ध मंडल द्वारा समाज आंदोलन आनन्द मार्ग दर्शन एवं प्रउत विचारधारा पर आधारित समाज इकाई की सभ्यता एवं संस्कृति की कोख निकली काव्यात्मक, सांस्कृतिक एवं साहित्यक सामग्री को जन जन तक पहुँचाने के लिए समाज के कलाकारों, कवियो व लेखकों को आनन्द मार्ग के संस्कारों एवं प्रउत की कार्ययोजना से दीक्षित कर जन जागरण के लिए भेजना होता है। इसलिए प्रगतिशील भोजपुरी समाज आंदोलन कार्यकारियों यह कार्य तुरंत करना होगा।
*🌼दूसरा रचनात्मक कार्य 🌼*
*१. आर्थिक क्षेत्र (economic zone) अथवा आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण (creation of economic zone)* - सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्धि हुए भोजपुरी समाज आंदोलन को मजबूत देने के लिए आर्थिक क्षेत्र का निर्माण करना होगा। समाज इकाई क्षेत्र के कृषि, खनिज व व्यवसायिक क्षेत्र के अध्ययन से प्राप्त होने वाली विधा के आधार पर एक आर्थिक योजना का निर्माण कर समाज क्षेत्र बड़ा होने पर आर्थिक क्षेत्र एवं विशेष आर्थिक क्षेत्र का निर्माण कर जन सहयोग लेकर शक्तिशाली मास्टर यूनिट तैयार करना है। जैसे कृषि मास्टर यूनिट, खनिज मास्टर यूनिट इत्यादि।
(प्रश्न सांस्कृतिक आंदोलन में समय, शक्ति व श्रम व्यय करने की अपेक्षा आर्थिक क्षेत्र निर्माण को प्रथम कार्य लिया जाए तो? उत्तर - इकोनॉमिक जोन का निर्माण के लिए जनशक्ति व धनशक्ति जरुरत होती है। वह भावनात्मक समर्पण के बिना संभव नहीं है। भावनात्मक समर्पण को आध्यात्मिक आकर्षण व सांस्कृतिक एकता ही तैयार कर सकती है। अतः सांस्कृतिक आंदोलन आवश्यक है तथा यह आर्थिक सबलता को स्थायित्व व सही दिशा प्रदान करता है।
*२.विवेकपूर्ण आर्थिक व्यवस्था की स्थापना (establishmet of a fair economic system)* - प्रउत ने समान वितरण को नहीं विवेकपूर्ण वितरण को अपनाया है, इसलिए समाज आंदोलन के इस क्षेत्र में रचनात्मक कार्य का एक महत्वपूर्ण अंग विवेकपूर्ण आर्थिक व्यवस्था के सदविप्र बोर्ड को स्थापित करना है।
*🌼 तृतीय रचनात्मक कार्य🌼*
*१.सामाजिक मंच (Social platform) अथवा सामाजिक मंचों तैयार करना (creating social platforms)* - समाज का संरचनात्मक गठन समाज आंदोलन का सबसे पहला कार्य है लेकिन समाज का सुव्यवस्थित संगठन तैयार करना समाज आंदोलन ने तृतीयक कार्य में रखा है। समाज इकाई जब तक जाति, मजहब, सम्प्रदाय में बटी है तब तक एक मजबूत समाज इकाई का निर्माण तैयार नहीं हो सकता है। अतः सामाजिक मंच के माध्यम से संवाद के द्वारा एक अखंड अविभाज्य मानव समाज निर्माण की मानसिकता तैयार करना तथा विप्लव विवाह, सामाजिक कुरीतियों का निवारण और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव तैयार करने के सामाजिक मंच कार्य करेंगे। सांस्कृतिक एवं आर्थिक रचनात्मक योजना स्थायित्व प्रदान करेगा।
(प्रश्न - सबसे पहला कार्य क्यों नहीं और यह प्रउत की विषय वस्तु नहीं है। फिर क्यों? उत्तर - वर्तमान समाज उपरोक्त बीमारियां को मर्यादा मानता है उसकी ओर आरंभ बढ़ाया एक कदम समाज को खड़ा होने पहले ही लडखडा सकता है। अतः समाज आंदोलन प्रबल एवं सबल होने पर ही इसमें हाथ लगाना चाहिए। यह सत्य यह प्रउत की विषय वस्तु नहीं है लेकिन प्रउत की मातृ संस्थान के उद्देश्य पूर्ण करना भी प्रउत की जिम्मेदारी में आता है। इसलिए समाज आंदोलन ऐसा कर सकता है। इसके अलावा इन व्याधियों को ऐसे ही छोड़ कर समाज आंदोलन आगे बढ़ता है तो वह अपने उद्देश्य के नजदीक पहूंचकर भी धराशायी हो सकता है )
*२. प्रउत के सूत्रों को लागू करना* - समाज आंदोलन का तृतीयक कार्ययोजना में न्यूनतम आवश्यकता की ग्रारंटी, गुणीजन का आदर, धनसंचय की नीति इत्यादि तथा शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, उद्योग व रोजगार इत्यादि नीति पर रचनात्मक कार्य करना।
( प्रश्न - यह प्रउत का पहला धर्म है फिर तृतीयक में क्यों? उत्तर - प्रउत यह व्यवस्था तब देगा जब समाज होगा समाज का संगठन तृतीयक स्तर में जाकर पूर्ण होता है, इसलिए तब ही इनकी आवश्यकता है)
*🌼 चतुर्थ रचनात्मक कार्य🌼*
*१. राजनैतिक यात्रा (Political journey)* - प्रउत प्राउटिस्टों अथवा आनन्द मार्गियों के लिए ही नहीं है। यह संपूर्ण समाज के लिए अतः राजनैतिक यात्रा की भी आवश्यकता है। उसके लिए आवश्यक कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित है। यह समाज इकाइयों के वर्तमान विद्यमान राजनैतिक स्वरूप पर निर्भर करती है। अतः सर्वत्र एक समान रहेगी।
*२. सुराज की स्थापना* - अंततोगत्वा सुराज की स्थापना ही प्रउत व्यवस्था का ध्येय है। जिसे सदविप्र राज कहा गया है। सदविप्र राज ही सर्व भवन्तु सुखिनः प्रदान करता है।
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