*बिहार की राजनीति एवं हमारा समाज आंदोलन।*
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श्री आनन्द किरण "देव"
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प्रउत की जन्मस्थली बिहार राज्य है। बिहार की धरा पर बैठकर प्रउत प्रणेता ने विश्व के सर्वजन हितार्थ, सर्वजन सुखार्थ प्रगतिशील उपयोग तत्व दिये तथा उनको क्रियांवित करने की अधिकांश क्रियाविधि की रचना इसी धरा पर की गई थी। महासंभूति के लौकिक संस्पर्श अधिकांश अनुभव करने वाले अधिकांश प्राउटिस्ट इस धरा से है। इस धरा का सौभाग्य है कि समाज आंदोलन का सूत्रपात भी यहाँ से हुआ। आशा करता हूँ कि प्रउत व्यवस्था के स्थापना का सुयोग भी इस धरा को मिले। इन सभी कारणों से बिहार का राजनैतिक परिवेश एवं समाज आंदोलन को समझना आवश्यक है।
बिहार के इतिहास के पन्नों में मिथिला, मगध, अंग तथा भोजपुर का वर्णन आता है। समाज आंदोलन ने बिहार को अंगिका, मिथिला, मगही व भोजपुरी सामाजिक आर्थिक इकाइयों में विभक्त किया है। बिहार के राजनैतिक इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि बिहार राज्य 1905 में बंगाल विभाजन के वक्त अस्तित्व में आया। बिहार से 1936 को उडिसा पृथक किया गया तथा 2000 को झारखंड राज्य अस्तित्व में आया।
*बिहार का परिचय*
बिहार का भूभाग नदियों का मैदान एवं कृषि योग्य भूभाग है। भौगोलिक तौर पर बिहार को तीन प्राकृतिक विभागो में बाँटा जाता है- उत्तर का पर्वतीय एवं तराई भाग, मध्य का विशाल मैदान तथा दक्षिण का पहाड़ी किनारा। गंगा नदी राज्य के लगभग बीचों-बीच बहती है। उत्तरी बिहार बागमती, कोशी, बूढी गंडक, गंडक, घाघरा और उनकी सहायक नदियों का समतल मैदान है। सोन, पुनपुन, फल्गू तथा किऊल नदी बिहार में दक्षिण से गंगा में मिलनेवाली सहायक नदियाँ है। बिहार के दक्षिण भाग में छोटानागपुर का पठार, जिसका अधिकांश हिस्सा अब झारखंड है, तथा उत्तर में हिमालय पर्वत की नेपाल श्रेणी है। हिमालय से उतरने वाली कई नदियाँ तथा जलधाराएँ बिहार होकर प्रवाहित होती है और गंगा में विसर्जित होती हैं। वर्षा के दिनों में इन नदियों में बाढ़ की एक बड़ी समस्या है। हिंदी बिहार की राजभाषा और उर्दू द्वितीय राजभाषा है। मैथिली भारतीय संविधान के अष्टम अनुसूची में सम्मिलित एकमात्र बिहारी भाषा है। भोजपुरी, मगही तथा अंगिका बिहार में बोली जाने वाली अन्य प्रमुख भाषाओं और बोलियों में सम्मिलित हैं। बिहार ने हिंदी को सबसे पहले राज्य की अधिकारिक भाषा माना है। सत्तू, चूड़ा-दही और लिट्टी-चोखा जैसे स्थानीय व्यंजन हैं।
*बिहार की राजनीति*
बिहार राज्य भारतीय गणराज्य के संघीय ढाँचे में द्विसदनीय व्यवस्था के अन्तर्गत आता है। राज्य का संवैधानिक मुखिया राज्यपाल है लेकिन वास्तविक सत्ता मुख्यमंत्री और मंत्रीपरिषद के हाथ में होता है। विधानसभा में चुनकर आनेवाले विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री का चुनाव पाँच वर्षों के लिए किया जाता है जबकि राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। प्रत्यक्ष चुनाव में बहुमत प्राप्त करनेवाले राजनीतिक दल अथवा गठबंधन के आधार पर सरकार बनाए जाते हैं। उच्च सदन या विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष ढंग से ६ वर्षों के लिए होता है।
प्रशासनिक सुविधा के लिए बिहार राज्य को 9 प्रमंडल तथा 38 मंडल (जिला) में बाँटा गया है। जिलों को क्रमश: 101 अनुमंडल, 534 प्रखंड (अंचल), 8,471 पंचायत, 45,103 गाँव में बाँटा गया है। राज्य का मुख्य सचिव नौकरशाही का प्रमुख होता है जिसे श्रेणीक्रम में आयुक्त, जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी या अंचलाधिकारी तथा इनके साथ जुड़े अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण रिपोर्ट करते हैं। पंचायत तथा गाँवों का कामकाज़ सीधेतौर पर चुनाव कराकर मुखिया, सरपंच तथा वार्ड सदस्यों के अधीन संचालित किया जाता है। नगरपालिका आम निर्वाचन 2017 के बाद बिहार में नगर निगमों की संख्या 12, नगर परिषदों की संख्या 49 और नगर पंचायतों की संख्या 80 है।
*बिहार का राजनैतिक इतिहास* - बिहार की राजनैतिक यात्रा के जनक डॉ. श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू है। यह बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे। बिहार के निर्माण में इनको मुख्य सहयोग डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह का रहा। यह राज्य के प्रथम उपमुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री थे। का राजनैतिक इतिहास बता है कि अंतरिम सरकार के युग से लेकर 1990 तक लगभग कांग्रेस का एक सत्र राज्य रहा। यद्यपि इस युग में 1967 में जन क्रांति दल के श्री महामाया सिन्हा ने प्रथम बार कांग्रेस के राज में छेद मारा था लेकिन यह अस्थायी सिद्ध हुआ। दूसरी 1970 में सोशिलिष्ट पार्टी के श्री कर्पूरी ठाकुर ने कांग्रेस से सत्ता छिनने में कामयाब रहे लेकिन वह भी पूर्व की भांति स्थायित्व नहीं दे पाए। तीसरी बार 1977 में जनता पार्टी का बदलाव भी असफल सिद्ध हुआ। बिहार की राजनीति का मुख्य बदलाव 1990 में श्री लालू प्रसाद यादव के रुप में आया जो आज तक चल रहा है। यद्यपि मुख्यमंत्री के चहरे बदले लेकिन सत्ता का ध्रुवीकरण लालू प्रसाद यादव रहे दूसरा ध्रुव नीतिश कुमार है। बिहार की राजनीति यात्रा में मतदाताओं के व्यवहार का अध्ययन करने से पता चलता है कि मानव समाज में भेद सृष्ट करने वाली जातिगत गणित का प्रभुत्व रहा है। राजनीति की मूल समस्या विकास एवं प्रगति को चुनाव में मुद्दा बनाया जाता है लेकिन अंततोगत्वा उसी लकीर पर चलती नजर आती है। राजनैतिक नेतृत्व जनमत की इस कमजोरी को अपना हथियार बनाकर राजनैतिक खेल खेलते हैं।
*प्रउत दर्शन से प्रउत व्यवस्था की ओर*
- प्रउत सामाजिक आर्थिक दर्शन है प्रउत दर्शन की क्रियांवित के लिए समाज आंदोलन एवं संगठात्मक आंदोलन की कार्य योजना का
निर्माण हुआ। यह समाज आंदोलन आध्यात्मिक नैतिकवान व्यक्तित्व के बल पर नव्य मानवतावादी सोच पर आधारित एक मानव समाज बनाने का संकल्प है। बिहार को आदर्श समाज देने के लिए प्रउत ने चार सांस्कृतिक क्षेत्र में विभक्त है। इन सांस्कृतिक इकाइयों को समाज धर्म में प्रतिष्ठित करने के लिए सामाजिक आर्थिक जिम्मेदारियों से विभूषित किया है। आदर्श बिहार बनाने की जिम्मेदारी समाज आंदोलन पर है। बिहार सर्व समाज समिति चारों समाज इकाइयों में आपसी सामंजस्य एवं सहयोग का भाव विकसित कर एक आदर्श मानव समाज देना है। बिहार के समाज इकाइयों की तस्वीर इस प्रकार उभरकर आईं है।
🌹 *बिहार में समाज आंदोलन* 🌹- बिहार राज्य में चार समाज इकाइयों का प्रांतीय कार्यालय तथा संभवतया अधिकांश का केन्द्रीय कार्यालय भी है।
🌼 *अंगिका समाज*🌼
*1. अररिया भुक्ति*
*2. पूर्णिया भुक्ति*
*3. कटिहार भुक्ति*
*4. भागलपुर भुक्ति*
*5. बंका भुक्ति*
*6. जमुई भुक्ति*
*7. मुंगेर भुक्ति*
*8. खगरीया भुक्ति*
*9.आलमनगर उपभुक्ति( मधेपुरा भुक्ति)*
10. *हलसी उपभुक्ति(लखीसराय भुक्ति)*
🌼 *मिथिला समाज* 🌼
*1. सुपौल भुक्ति*
*2. मधेपुरा भुक्ति*
*3. सहरसा भुक्ति*
*4. दरभंगा भुक्ति*
*5. मधुबनी भुक्ति*
*6. बेगूसराय भुक्ति*
*7.समस्तीपुर भुक्ति*
*8. वैशाली भुक्ति*
*9. मुजफ्फरनगर भुक्ति*
*10. शिवहर भुक्ति*
*11. सीतामढ़ी भुक्ति*
🌼 *प्रगतिशील मगही समाज* 🌼
*1.पटना भुक्ति*
*2.अरवल भुक्ति*
*3.औरंगाबाद भुक्ति*
*4. जहानाबाद भुक्ति*
*5. गया भुक्ति*
*6. नालंदा भुक्ति*
*7. लखीसराय भुक्ति*
*8. शेखपुरा भुक्ति*
*9. सिकन्दरा उपभुक्ति ( जमुई भुक्ति)*
*10. नवादा भुक्ति*
🌼 *प्रगतिशील भोजपुरी समाज*🌼
*1.पूर्वी चंपारण*
*2.पश्चिम चंपारण भुक्ति*
*3.गोपालगंज भुक्ति*
*4.सिवान भुक्ति*
*5.सारण भुक्ति*
*6.बक्सर भुक्ति*
*7.भोजपुर भुक्ति*
*8. रोहतास भुक्ति*
*9 भभुआ कैमूर भुक्ति*
प्रउत की जन्मभूमि बिहार की धरा से सदविप्र राज का प्रथम सूर्योदय हो ऐसी आशा करते हुए यह लिखने में हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ कि अब समाज आंदोलन क्रियांवित में बिहार राज्य अग्रणीय रहा है। बिहार के सभी प्राउटिस्टों की कर्म साधना को नमन करते हुए आग्रह करता हूँ कि इस विश्व धरा को आपका मार्ग दर्शन मिलता रहे।
भारतीय लोकसभा को 40 सांसद देने वाली यह धरा भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है। 243 बिहार विधानसभा क्षेत्र सदविप्रों की इंतजार कर रहे है। चार समाज इकाई के प्रबुद्धजनों को बिहार में समाज आंदोलन के क्रमिक आंदोलन - सांस्कृतिक आंदोलन, आर्थिक आंदोलन, सामाजिक आंदोलन तथा राजनैतिक आंदोलन में इसी मूर्त लग जाना है। शेष उत्तर प्रदेश की राजनैतिक यात्रा में जो बात लिखी गई वह सभी समाज के लिए अनुकरणीय है।
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