*नागपुरिया अथवा नागपुरी समाज*
नागपुरिया अथवा नागपुरी समाज क्षेत्र में दक्षिणी पश्चिमी झारखंड का क्षेत्र है। इस क्षेत्र की पांच भुक्ति तथा आठ उपभुक्ति मिलकर नागपुरिया संस्कृति एवं सभ्यता की गौरवगाथा लिखते हुए सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति यात्रा तय करती है। समाज के केन्द्रीय कार्यालय अधीन 8 भुक्ति कार्यालय है
*1. रांची भुक्ति* - रांची, झारखंड की राजधानी रांची और बुंडू अनुमण्डल में विभाजित है और प्रत्येक अनुमंडल को आगे ब्लॉक, पंचायत और गांवों में विभाजित किया गया है। इसमें 18 ब्लॉक और 305 पंचायत शामिल हैं। रांची अनुमंडल के तहत, 14 ब्लॉक हैं और बुंडू अनुमंडल में 4 ब्लॉक हैं।
रांची, अपने आधुनिक रूप में, भारतीय राज्य झारखंड की राजधानी है। शहर में एक मध्यम जलवायु होती है और अविभाजित बिहार के समय से गर्मियों की राजधानी थी । इसे “जलप्रपातों का शहर” के रूप में जाना जाता है।
*राजनैतिक स्वरूप* - रांची एक संसदीय क्षेत्र है तथा तमाड़, सिल्ली, खिजरी, रांची, हटिया, कांके व मांडर नामक 7 विधानसभा क्षेत्र है। ( सिल्ली व खिजरी अमरा बंगाली समाज में बताए गए है।)
*2. खूँटी भुक्ति* - खूँटी जिला राँची जिले को विभाजित करके बनाया गया २३वा नया जिला है । दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल का हिस्सा खूँटी 12 सितंबर 2007 को 6 ब्लॉक के साथ नया जिला बना है, और राज्य की राजधानी, रांची से 40 किमी की दुरी पर अवस्थित है। खूँटी भुक्ति में एक अनुमंडल व रानियाँ, मुरहू, तोरपा, कर्रा, खूँटी व अडकी नामक 6 प्रखण्ड है। यहाँ 86 पंचायत व 756 गाँव भी है।
*राजनैतिक स्वरूप* - खूंटी एक लोकसभा क्षेत्र तथा जिले में खूंटी व तोरपा नामक दो विधानसभा क्षेत्र है।
*3. सिमडेगा भुक्ति* - जिले में एक अनुमंडल तथा सिमडेगा, पाकरटार, कुरडेग, केरसई, बोलबा, ठेठईटांगर, कोलेबिरा, जलडेगा, बासजोर और बानो नामक 10 प्रखण्ड है। जिले में 1 नगर निकाय, 94 ग्राम पंचायत तथा 451 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - यह जिला खूंटी लोकसभा क्षेत्र आता है तथा जिले में कोलेबिरा व सिमडेगा नामक दो विधानसभा क्षेत्र है।
*4. गुमला भुक्ति* - गौ मेला शब्द से गुमला शब्द आया है। जिले को तीन अनुमंडल व 12 प्रखण्ड में विभाजित किया गया है।गुमला अनुमंडल के अंतर्गत कुल 6 प्रखंड आते हैं - गुमला, घाघरा, भरनो, बिशुनपुर, रायडीह और सिसई, बसिया अनुमंडल के अंतर्गत कुल 3 प्रखंड हैं - पालकोट, बसिया और कामडारा तथा चेनपुर अनुमंडल में तीन प्रखण्ड आते हैं - चेनपुर, अल्बर्ट एका व डुमरी है।
*राजनैतिक स्वरूप* - गुमला भुक्ति लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में आता है तथा जिले में गुमला, सिसई व बिशुनपुर नामक तीन विधानसभा क्षेत्र है ।
*5. लोहरदगा भुक्ति* - 1983 ई0 में राँची को विभाजित कर तीन जिले यथा राँची, गुमला और लोहरदगा के निर्माण के फलस्वरूप लोहरदगा जिला के रूप में अस्तित्व में आया। जिले का नामकरण लोहरदगा शहर के नाम पर किया गया जो जिले का प्रशासनिक मुख्यालय बना। 1972 ई. में लोहरदगा को अनुमंडल एवं 1983 ई. में जिले का रूप में स्थान प्राप्त हुआ | जैन पुराणों के अनुसार भगवान महावीर ने लोहरदगा की यात्रा की थी। जहाँ पर भगवान महावीर रुके थे उस स्थान को “लोर-ए-यादगा” के नाम से जाना जाता है जिसका मुंडारी में आंसुवों की नदी (River of Tears) होता है। सम्राट अकबर पर लिखी पुस्तक “आयने अकबरी” में भी “किस्मत-ए-लोहरदगा का उल्लेख है। लोहरदगा हिंदी के दो शब्दों ‘लोहार’ जिसका शाब्दिक अर्थ लोहे का व्यापारी और ‘दगा’ जिसका अर्थ केंद्र अर्थात लोह खनिज का केंद्र होता है। लोहरदगा जिले में एक अनुमंडल लोहरदगा एवं 7 प्रखंड हैं - भंडरा, किस्को, लोहरदगा, कुरु, कैरो, पेशरार एवं लोहरदगा । यहाँ 353 गाँव है।
*राजनैतिक स्वरूप* - लोहरदगा एक लोकसभा क्षेत्र है तथा यहाँ लोहरदगा एक विधानसभा क्षेत्र है।
*6. लातेहार भुक्ति (गारु व महुआडन उपभुक्ति)* - लातेहार भुक्ति के दो अनुमंडल में से महुआडान अनुमंडल नागपुरिया समाज का अंग है। जिसके दो प्रखण्ड है - महुआडान व गारु दोनों ही नागपुरिया समाज के अंग है। नागपुरिया समाज की केन्द्रीय इकाई के अधीन लातेहार भुक्ति इकाई में महुआडान व गारू नामक उपभुक्ति रहेंगी।
*राजनैतिक स्वरूप* - दो प्रखण्ड मनिका विधानसभा क्षेत्र में प्रखण्ड है।
*7. पतरातू उपभुक्ति(रामगढ़ भुक्ति)* - झारखंड राज्य के रामगढ़ भुक्ति के 6 प्रखण्ड में से एक प्रखण्ड पतरातू नागपुरिया समाज का हिस्सा है। जानकारी के अनुसार पतरातू प्रखण्ड में 42 पंचायत तथा 85 गाँव
*राजनैतिक स्वरूप* - पतरातू प्रखण्ड बडकागांव विधानसभा क्षेत्र में आता है।
*8. पश्चिम सिंहभूमि भुक्ति ( आनंदपुर उपभुक्ति, गुदरी उपभुक्ति, बंदगांव उपभुक्ति, सोनुआ उपभुक्ति व गोइलकेरा उपभुक्ति)* - राज्य के सबसे पुराने तथा बड़े जिले पश्चिम सिंहभूमि भुक्ति इकाई में आनन्दपुर, गुदरी, बंदगांव, सोनुआ व गोइलकेरा उपभुक्ति नागपुरिया समाज परिक्षेत्र में रेखांकित की गई है। जिले में तीन अनुमंडल है, उसके पोड़ाहाट चक्रधरपुर अनुमंडल के 7 प्रखण्ड में से नागपुरिया समाज की पांचों उपभुक्तियां अथवा प्रखण्ड इस क्षेत्र में आते है।
*राजनैतिक स्वरूप* -यह सभी उपभुक्तियां सिंहभूमि नामक लोकसभा क्षेत्र में तथा जहाँ तक जानकारी है उसके अनुसार चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्राधिकार में पांचों प्रखण्ड है।
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नागपुरी भाषा....... ✍
1. नागपुरी भाषा छोटानागपुर (झारखंड) की राजभाषा है।
2. नागवंशी जनगोष्ठी के संस्कारों की भाषा है
3. नागपुरी भाषा की बोलियाँ -सदान, मुण्डा, खड़िया, उराँव आदि।
4. नागपुरी के पूर्व नाम, सदानी, सदरी या सादरी, गँवारी भी प्रचलित रहे हैं। अब यह नागपुरी नाम पर विराम पा गई है।
5. नागपुरी भाषा के प्रख्यात विद्वान प्रो॰ केसरी कुमार हुए है
6. एक मत - फादर नवरंगी ने यह स्वीकार किया है कि यह कहना कठिन है कि नागपुरिया सदानी (नागपुरी) भाषा किस प्राचीन प्राकृत अथवा मध्ययुग की किसी अपभ्रंश बोली का वर्तमान रूप है।
7. विद्वानों ने नागपुरी अथवा नागपुरिया सदानी का संबंध मगही, मैथिली, अंगिका, भोजपुरी, कौशल, उत्कल, बंगाल, नेपाली से संबंध रेखांकित किया है। सबसे चौकाने वाला तथ्य इस भाषा को मारवाड़ी से संबंधित चिन्हित किया है।
8. अधिकांश विद्वान इसको मागधी प्राकृत से आया मानते है। अर्थात संस्कृत नागपुरी अथवा नागपुरिया भाषा की जननी है।
9. इसकी लिपि - कैथी थी अन्ततोगत्वा देवनागरी लिपि ही इसके लिए मान्य हुई।
10. नागवंशी राजा रघुनाथ शाह एक कवि और रामगढ़ के राजा दलेल सिहं एक रचनाकार थे। अन्य रचनाकार हनुमान सिंह, जयगोविंद मिश्र, बरजू राम, महाकवि घासी राम, बेनीरामराम मेहता और दास महली नागपुरी के रचनाकार रहे हैं।
11. वाक्यांश -
1. मोर नाव महेश। (मम नाम महेश। मेरा नाम महेश है।)
2. तोयं कैसन आहीस्? (भवान कथम् अस्ति? तुम कौसे हो?)
3.हामे दुयो जाइल। (आवां गच्छावः। हम दोनो जाते हैं।)
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