हमारा समाज आंदोलन -07 (अखिल भारतीय समाज)


हमारा समाज आंदोलन में भारतवर्ष के परिक्रमण में पाया की भारतीय समाज आंदोलन का अधिशेष पृष्ठ अखिल भारतीय समाज आंदोलन को समझने में है। भारतीय समाज आंदोलन पूर्व, मध्योत्तर, उत्तर, पश्चिम व दक्षिण अभियान वर्तमान भारतवर्ष की सीमा के उस पार बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान व श्री लंका की सीमा में भी समाविष्ट है। क्या इन देशों की जनता के सहयोग के बिना भारतीय समाज आंदोलन का संपूर्ण अभियान लिखा जा सकता है। राजनैतिक सत्ता हथियाना हमारा लक्ष्य नहीं इसलिए उत्तर हा में देकर हम अपने आप से झूठ नहीं बोल सकते है। अत: स्वीकारना होगा कि भारतीय समाज आंदोलन के पूर्णत्व के लिए नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान की जनता से सहयोग लेना होगा। हम देश में तोडफोड की बात में विश्वास नहीं रखते है। अपने स्वार्थ के लिए वैमनस्य फैलाना, कटुता पैदा करना अथवा फूट डालना हमारे संस्कारों में नहीं है इसलिए एक मात्र चिंतन अखिल भारतीय समाज आंदोलन ही शेष रह जाता है। 

अखिल भारतीय समाज आंदोलन क्या है?

अखिल भारतीय समाज आंदोलन भारतवर्ष की राजनैतिक इकाई में भूटान, नेपाल, श्रीलंका एवं पाकिस्तान को मिलाने का अभियान नहीं है अपितु यह अभियान इन देशों में मानवीय चेतना का जागरण कर प्रउत के आदर्श पर सर्वजन सुखार्थ सर्वजन हितार्थ व्यवस्था स्थापित करने का है। राजनैतिक सत्ता का बटा रहना अवश्य ही दुखद विषय है लेकिन राजनैतिक एक्किकरण अभिकल्पना मानवीय चेतना एवं नव्य मानवतावाद पर काम किये बिना करना, गलत हाथों में राजनीति की बागडोर देना है। अतः पाठक भूल कर भी यह नहीं सोचें कि अखिल भारतीय समाज आंदोलन, अखंड भारत के अभियान का अंग अथवा सहयोगी है। यह स्वतंत्र अभिकल्पना है। जो प्रउत के समाज आंदोलन के साथ भारतवर्ष के भ्रमण मिली है। यद्यपि इस अभिकल्पना की शब्दावली प्रउत के विराट ज्ञान कोष में नहीं मिलती है, क्योंकि प्रउत का समाज आंदोलन सार्वभौमिक है। वहाँ भारतीय, अखिल भारतीय जैसे शब्द नहीं लिख जाते है। प्रउत एक वैश्विक चिंतन है, यह विश्व की अभिकल्पना लेकर चलता है। यहाँ राजनैतिक इकाइयों की सीमाओं के चिंतन का कोई स्थान नहीं है। 

प्रउत का दिल्ली सेक्टर लंबे समय से 44 समाजों की अभिकल्पना को मूर्त रूप देने पर चिंतन कर रहा है, इसलिए हमने भी भारत भ्रमण का कार्यक्रम बनाया। यह अच्छा रहा तथा इसी से अखिल भारतीय समाज आंदोलन का भी चिंतन सामने आया। प्राउटिस्ट ग्लोबल का धन्यवाद देना भी आवश्यक है कि उनके कर्मेष्णा निर्मित मानचित्रावली को लेकर भारत दर्शन का के कार्य को मूर्त रूप दिया। 

अखिल भारतीय समाज आंदोलन का स्पष्टता से समझना होगा

जिन देशों से होकर भारतीय समाज आंदोलन जाता है उन देशों के जन मानस में भी समाज आंदोलन का भाव अंकुरण करना है तथा उन्हें भी साथ लेकर चलना है। गिलगित समाज, बाल्टिस्तानी समाज, सिंध समाज, मुल्तानी/सिराकी समाज, भूटान समाज, गोरखाली समाज, नेवारी समाज, राय समाज, थारू समाज, गुरुंग समाज, शेरपा समाज, मगर समाज, लिम्बु समाज, तामांग समाज व सिंहल समाज में भी सामाजिक आर्थिक उन्नयन की चेतना को राजनैतिक चेतना से मजबूत करना होगा। यहाँ भी प्राउटिस्टों को समाज आंदोलन चलाना होगा। 

1. पाकिस्तानी समाज आंदोलन - 

भारतवर्ष का असी पंजाबी समाज आंदोलन रावलपिंडी तक जाता है तथा असी डोगरी व अस्य कशियार समाज आंदोलन पाक अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में जाकर संपन्न होते है। मारवाड़ी समाज आंदोलन भी पाकिस्तान में प्रवेश करता है। अतः इस कार्य में पाकिस्तान व भारतवर्ष की जनता को राजनैतिक, जातिगत व मजबहीय भावों से उपर उठकर सहयोगात्मक भाव से आगे चलना होगा। इस कार्य को दृढ़ता प्रधान करने के लिए गिलगित, बाल्टिस्तानी, सिंध व मुल्तानी/सिराकी समाज में सामाजिक आर्थिक चेतना का जागरण करना होगा। हम सभी जानते है कि राजनीति किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। अतः इस दलदल से उपर रहकर जनहितार्थ साधना करनी होगी। 

१. गिलगित समाज, 
२. बाल्टिस्तानी समाज
 ३. सिंध समाज
 ४. मुल्तानी/सिराकी समाज

      2. नेपाली समाज आंदोलन 

 मैथिली, प्रगतिशील भोजपुरी, अंगिका व अवधी की सीमाएं नेपाल में जाती है। इसलिए नेपाल के समग्र समाज को साथ लेकर चलना भारतीय समाज आंदोलन का कर्तव्य है। गोरखाली , नेवारी, राय, थारू, गुरुंग, शेरपा, मगर, लिम्बु, व तामांग समाज की योजना भी बनानी होगी। 

१.गोरखाली समाज
२.नेवारी समाज
 ३.राय समाज
४.थारू समाज
५.गुरुंग समाज
 ६. शेरपा समाज
७.मगर समाज
८. लिम्बु समाज
९. तामांग समाज
     3. भूटानी समाज आंदोलन

 भारतीय समाज आंदोलन की सीमाएं भूटान देश को जाकर लगती है। भूटान समाज का मानचित्र भी बनाना हमारे समाज आंदोलन की जिम्मेदारी है। 

१.भूटान समाज

      4. बाग्लादेश का समाज 

 भारतीय समाज आंदोलन के आमरा बंगाली समाज का हिस्सा होने के कारण बांग्लादेशी समाज में आत्मनिर्भर का सूत्र स्थापित करना होगा। 

बंगालिस्तान समाज का हिस्सा है बांग्लादेश
    5. श्रीलंकाई समाज आंदोलन
तमिल समाज आंदोलन श्रीलंका में जाता है, इसलिए वहाँ के सिंहली समाज आंदोलन को भी साथ लेकर चलना होगा।

सिंहली समाज
Previous Post
Next Post

post written by:-

0 Comments: