हमारा समाज आंदोलन -06 (दक्षिण भारतीय समाज)


हमारा समाज आंदोलन भारतवर्ष की परिक्रमा करते हुए दक्षिण भारतवर्ष की ओर निकल पड़ा है। वैश्विक समाज के निर्माण के लिए निर्माण की नब्ज को समझना होगा। भारतवर्ष के परिभ्रमण से कुछ बातें निकल कर आई है। प्रथम भारतवर्ष के सशक्त राष्ट्र तभी बन सकता है, जब उसकी सामाजिक इकाईयों सशक्त बनाया जाए। दूसरी आर्थिक इकाईयों के सशक्त बनने के लिए भारतवर्ष का राजनैतिक प्रशासनिक हिस्सा को भी सशक्त बनना होगा। इसलिए इस पर गहन मंथन की आवश्यकता है। फिलहाल दक्षिण भारत का दौरा करते है। यहाँ हमें 

           1. तेलंगाना समाज
तेलंगाना राज्य व छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों को मिलाकर तेलांगना समाज इकाई रुप दिया है। तेलंगाना सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक तेलंगाना समाज में तेलंगाना राज्य के सभी जिलें व छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर, सुकम्मा, दंतेवाड़ा व बक्सर जिले शामिल हैं।  

      2. आंध्रा/ सिरकार समाज
 आंध्र प्रदेश का उत्तरी पूर्वी भाग सिरकार समाज इकाई बनाई गई है। इसमें आंध्रप्रदेश राज्य के श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापट्टनम, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा, गुंटूर व प्रकाशम जिला आता है। इसके उत्तर पश्चिम व उत्तर में उडिसा, पश्चिम में तेलंगाना, दक्षिण में रायलसीमा समाज व पूर्व में अरब सागर है। 

          3. रायलसीमा समाज
आंध्र प्रदेश का दक्षिणी क्षेत्र रायलसीमा सामाजिक इकाई बनाया गया है। कुरनूल, अनंतपुर, कडप्पा, नेल्लोर व चित्तूर जिलों का समूह रायलसीमा सभ्यता एवं संस्कृति की धरोहर है। 

             4. कन्नड़ समाज
 कर्नाटक राज्य के पश्चिम के अरब सागर तटीय जिले उत्तर कन्नड़, उड्डपी का कुन्दनपुर क्षेत्र छोड़कर, दक्षिण कन्नड़ व कोडागू जिलो को छोड़ कर शेष कर्नाटक राज्य के जिलों को कन्नड़ समाज नामक आर्थिक इकाई बनाया है। 

             5. तुलु समाज
 कर्नाटक के उड्डपी व दक्षिण कन्नड़ जिला मिलकर तुलु भाषी क्षेत्र है। अत: यह तुलु समाज कहलाता है। तुलू (Tulu) एक द्रविड़ भाषा है, जिसे बोलने-समझने वाले लोग मुख्यतया कर्नाटक के दो जिले है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, तुलू भाषी (तुलू भाषा बोलने वाले) स्थानीय लोगों की संख्या लगभग 18,46,427 थी। तुलू भाषा वर्तमान में दक्षिण भारत के तुलूनाडू क्षेत्र तक ही सीमित है। तुलूनाडू: दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक राज्यों के तुलू बाहुल्य क्षेत्र को तुलूनाडू नाम से भी जाना जाता है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडूपी ज़िले तथा केरल के कासरागोड ज़िले का पयास्वनी या चंद्रगिरि नदी तक का उत्तरी भाग इस क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मंगलुरु, उडूपी और कासरागोड शहर तुलू सभ्यता के प्रमुख केंद्र हैं।

           6. कोडागू समाज
कर्नाटक के दक्षिण पश्चिम एक जिला एक कोडागू है। वह एक समाज है। कोडागू जिले में कुछ उपमंडल है 3 तहसीलें या तालुका है, जिनके नाम मदिकेरी, सोमवारपेट, वीरजपेट है, यहाँ पर कुछ विकास खंड है। कोडागू जिले में 2 विधानसभा क्षेत्र है जिनके नाम मदिकेरी और विराजपेट है, और 1 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है जो की कोडागु-मैसूर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र लोक सभा क्षेत्र है। कोडागू का इतिहास, कोडागू का समस्त भूभाग हलेरी साम्राज्य का अंग था उसके बाद केलाडी नायक राजाओ ने यहाँ पर शासन किया जो की १६०० से १८३४ तक रहा, १८३४ में कूर्ग की लड़ाई के बाद यहाँ पर अंग्रेजो का आधिपत्य हो गया था जो की 1947 तक बना रहा, इस भूभाग का नाम कोडागु यहाँ के निवासिओं के कारन पड़ा जो की मूल रूप से खेती करते थे लेकिन एक लड़ाका जाती थी जिनको कोदवा कहा जाता था।

        7. नव्या मलयाली समाज
केरल राज्य के सभी जिले व तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले कुछ हिस्सा लेकर नव्या मलयाली समाज बना है। मलयाली सभ्यता एवं संस्कृति का वाहक है नव्या मलयाली समाज। 

              8. तमिल समाज 
तमिलनाडु व श्री लंका तमिल भाषी क्षेत्र तमिल समाज इकाई है। तमिल सभ्यता एवं संस्कृति की धरोहर आर्थिक सामाजिक इकाई के रुप में विकसित करने के लिए तमिल समाज तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले का उत्तर पूर्व का हिस्सा छोड़ संपूर्ण तमिलनाडु व श्रीलंका के उत्तर, उत्तर पश्चिम व पूर्व प्रांत के तमिल भाषी क्षेत्र शामिल किये गए। तमिल समाज के विकास एवं तमिल संस्कृति को संवृद्धि में समाज आंदोलन की भूमिका है। 

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