दक्कन मध्य भारतीय समाज में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व गोआ के समाज पर चर्चा करेंगे।
1. मालवा समाज
मध्यप्रदेश राज्य का दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र मालवा समाज कहा जाता है। मालवा सभ्यता एवं संस्कृति द्योतक यह समाज नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बडवानी, घार, खरगौन, इन्दौर, उज्जैन, आगर मालवा, राजागढ़, शाजापुर, देवास, खंड़वा, बहरानपुर, हरदा, सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, बैतूल, छिंदवाड़ा व नरसिंहपुर नामक मध्यप्रदेश के 24 जिलों की सामाजिक आर्थिक इकाई है। यहाँ जमीन उपजाऊ है तथा मानसून भी उपयुक्त समय आता है।
2. बुंदेलखंड समाज
उत्तरी मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश का कुछ क्षेत्र मिलकर बुंदेलखंडी समाज बना है। मध्यप्रदेश के भिंड, ग्वालियर, दातिंया, अशोक नगर, गुना, सागर, दमोह, छतरपुर, टिकमगढ़ व शिवपुरी जिले की करोरा तहसील तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर, झांसी, हम्मीरपुर, महोबा, बांदा व जालौन जिले मिलकर बुंदेलखंड सभ्यता एवं संस्कृति के आधार पर नव सृजन को आतुर है।
3. बघेलखंड समाज
मध्यप्रदेश का पूर्वी भाग व उत्तर प्रदेश के निकटवर्ती क्षेत्र बघेलखंडी समाज है। मध्यप्रदेश के सिवनी, जबलपुर, कटनी, सताना, सतना,पन्ना, मंडला, डिडौरी, उमरिया, अनूपपुर, शाहडोल, सीधी, रीवा व सिंगरौली जिले तथा उत्तर प्रदेश के चित्रकुट, मंझनपुर व प्रयाग का हिस्सा बघेलखंडी सभ्यता व संस्कृति का हिस्सा है।
4. छत्तीसगढ़ी समाज
मध्यप्रदेश का बालघाट, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर, व बीजापुर, सुकमा व दंतेवाड़ा का कुछ हिस्सा छोड़ कर संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य छत्तीसगढ़ी समाज का निर्माण हुआ। इसे आत्मनिर्भर इकाई के रुप में विकसित कर नक्सलवादी समस्या पर पूर्ण विराम लगाया जा सकता है।
5. विदर्भ समाज
पूर्वी महाराष्ट्र विदर्भ क्षेत्र कहलाता है। बुलढाणा, वाशिम, अमरावती, अकोला, यवतमाल, चन्द्रपुर, वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया व गडचिरोली नामक 11 जिले पुरे भारत को अन्न पूर्ति करने की क्षमता रखता है। लेकिन जल का अभाव है। इसलिए विदर्भ समाज की योजना बनाना आवश्यक है।
6. सहयाद्रि समाज
पश्चिमी, उत्तरी व दक्षिणी महाराष्ट्र सहयाद्रि समाज है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सतारा, सांगली, सोलापुर, रायगढ़, अहमदनगर, ठाणे, मुम्बई, पालघर, नाशिक, धुले, नंदुरबार, जलगांव, औरंगाबाद, जलाना, बीड, उस्मानाबाद, परभणी, हिंगोली व नांदेड को सहयाद्रि समाज के रुप में चिन्हित किया गया है। यह सज्ञयाद्री संस्कार के आधार पर सामाजिक आर्थिक इकाई के रुप विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
7. कोंकणी समाज
गोवा तथा कुछ महाराष्ट्र, केरल व कर्नाटक का क्षेत्र कोंकणी समाज है। महाराष्ट्र से रत्न्नागिरी व सिंधुदुर्ग, गोवा राज्य (उत्तर व दक्षिण गोवा) तथा कर्नाटक का उत्तर कन्नड़ मिलकर कोंकणी भाषी क्षेत्र है। जहाँ कोंकणी सभ्यता व संस्कृति का इतिहास लिखकर सामाजिक आर्थिक विकास की चेतना जागाई जा सकती है।
मध्य दक्कन भारत का समाज आंदोलन अवश्य ही कारगर होगा ।
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