🌹धर्मयुद्ध मंच से 🌹
®श्री आनन्द किरण®
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🌺विक्रम संवत 🌺
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भारतवर्ष का सबसे अधिक प्रचलित पंचाग विक्रम संवत कल दिनांक 10 मार्च 2010 को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा २०७७(2077) है। अर्थात आज विक्रम संवत २०७६(2076) का आखिर दिन है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा विक्रम संवत का प्रथम दिन है। मान्यता के अनुसार विक्रम नववर्ष लगभग पन्द्रह दिन बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। यह दिन भारतवर्ष चैत्र नवरात्रि का स्थापना दिवस है। धर्मयुद्ध मंच पाठकों का ध्यान आकृष्ट करना चाहता है कि यह विश्व का प्रथम पंचाग है कि इसका नववर्ष पन्द्रह दिन बाद मनाने की परंपरा है। ऐसा क्यों? यह प्रश्न इस विषय को आस्था के मंच से धर्मयुद्ध मंच पर लेकर आता है।
इस प्रश्न का उत्तर खोजने के क्रम में धर्मयुद्ध मंच विक्रम संवत के महिनों की ओर भ्रमण करता है। विक्रम संवत की मान्यता के अनुसार पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस नक्षत्र के नाम पर महिने का नामकरण किया गया है। चैत्र, वैशाख, जेष्ठ आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक. मार्गशीर्ष, पौष माघ व फाल्गुन है। इसमें से नाम विज्ञान के अनुसार जेष्ठ माह सबसे बड़ा माह है। कार्यदिवस गणना में भी बारह दिन अमान्य कार्य दिवस बताए गए है। जिसमें जेष्ठ कृष्ण प्रतिपदा आषाढ द्वितीया इस प्रकार तृतीया चतुर्थां चलता रहता है। भारतवर्ष में कृषि वित्त वर्ष जेष्ठ से वैशाख माह तक माना गया था। इसको आधार मानकर कृषि सहायक, कृषि आधारित उद्योग एवं कृषि सहायक उद्योगों के वित्त का निर्धारण किया जाता था। इसलिए भारतवर्ष में वैशाखी पूर्णिमा को बड़ा उत्सव मनाया जाता था। भारतवर्ष में बौद्धों एवं अबौद्धों के संग्राम काल में बुद्ध के जन्म एवं निर्वाण दिवस के महत्व को लुप्त करने के लिए संभवतया बसंतोत्सव के बाद चैत्र मास से वार्षिक पंचाग बदलने की परंपरा का सूत्र पात हुआ। गुप्त काल में बोद्ध का का प्रभाव क्षीण हुआ था तथा गुरुड़ ध्वज वैष्णवों का प्रभाव स्थापित हुआ। उस युग में विक्रम संवत एक अधिकारिक पंचाग के रुप में स्वीकृति पाई। इस समय जेष्ठ के स्थान पर चैत्र को प्रथम माह घोषित किया गया तथा उसकी स्थापना के प्रथम दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत दिवस के रुप अंगीकार किया गया।
इससे पूर्व भारतवर्ष में वैशाखी पूर्णिमा को सृष्टि स्थापना दिवस, आनन्द पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता था।
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श्री आनन्द किरण@ धर्मयुद्ध
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